भारत के साथ जो हुआ, उसकी वजह यूक्रेन नहीं…, भारी टैरिफ लगाने को लेकर ट्रंप पर भड़के डेमोक्रेट्स

अमेरिका की ‘हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी’ के डेमोक्रेटिक नेताओं ने डॉनल्ड ट्रंप के 50 प्रतिशत टैरिफ वाले फैसले की आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि ट्रंप सरकार ने रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देश चीन के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया और भारत को टारगेट किया. उनका कहना है कि ट्रंप सरकार के इस फैसले का यूक्रेन से कोई संबंध नहीं है.

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी’ अमेरिका की विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति जैसे मामलों पर नजर रखती है. इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ओर के सदस्य शामिल होते हैं. 28 अगस्त को इस कमेटी के डेमोक्रेटिक नेताओं की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा गया,
रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने के लिए चीन या अन्य देश पर प्रतिबंध लगाने के बजाय, ट्रंप भारत पर टैरिफ लगाकर उसे निशाना बना रहे हैं. इससे अमेरिकियों को नुकसान हो रहा है. इसके कारण अमेरिका-भारत संबंध खराब हो रहे हैं. ऐसा लग रहा है- जैसे ये किसी भी तरह से यूक्रेन के बारे में नहीं है.

डॉनल्ड ट्रंप के करीबी ने दिया विचित्र तर्क
ट्रंप की आलोचना की खबर ऐसे वक्त में आई है, जब अमेरिका की ओर से ट्रंप के 50 प्रतिशत टैरिफ को सही साबित करने के लिए बयानबाजी हो रही है. डॉनल्ड ट्रंप के शीर्ष सहयोगी और वाइट हाउस में सलाहकार पीटर नवारो ने रूस-यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’ कह दिया है. उन्होंने कहा,
भारत रूस से कम कीमत पर तेल खरीदता है. रूस उससे मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल अपनी युद्ध मशीनरी को और ज्यादा यूक्रेनियों को मारने में करता है.

नवारो ने तर्क दिया कि भारत के रूस से तेल खरीदने से अमेरिकी लोगों को भी नुकसान उठाना पड़ता है. ब्लूमबर्ग के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा,
इससे उपभोक्ता, व्यवसाय और हर चीज को नुकसान पहुंचता है… क्योंकि भारत के भारी टैरिफ की वजह से हमें नौकरियां, कारखाने, आमदनी और मजदूरी का नुकसान होता है. और फिर करदाताओं को भी नुकसान होता है क्योंकि हमें ‘मोदी के युद्ध’ के लिए धन जुटाना पड़ता है.

पीटर नवारो का मानना है कि यूक्रेन में शांति का रास्ता भारत से होकर जाता है. उन्होंने ये भी कहा कि भारत अगर रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है, तो उसे टैरिफ में 25 प्रतिशत की छूट मिल जाएगी.

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