बुधवार को गणेश चतुर्थी है। इस दिन बुधवार गणेश जी की पूजा का दिन है, इसके अलावा चित्रा नक्षत्र भी है। इस सुंदर योग में गणपति की पूजा बहुत ही फलदायी रहेगी। अगर आप अभी तक गणपति की स्थापना नहीं कर पाएं हैं, तो गणपति की स्थापना के लिए दोपहर और शाम को भी मुहूर्त है। गणपति की स्थापना दोपहर में 12:30 तक और शाम को 3:45 से शाम 6:45 तक कर सकते हैं। आपको बता दें कि गणपति की पूजा करें तो सबसे पहले दरवाजे, उनके बैठने के स्थान पर स्वास्तिक बनाएं। दरअसल स्वास्तिक को गणेश जी का प्रतीक माना जाता है। इसलिए भगवान की स्थापना से पहले जहां उन्हें स्थापित करेंगे, वहां स्वास्तिक बनाएं। इससे आपकी लाइफ के सभी विघ्न खत्म होते हैं और भगवान की कृपा से जल्दी सफल होते हैं।
गणेश जी को दूर्वा अर्पित करेंगणेश पूजा में दूर्वा रोज रखनी चाहिए। दूर्वा के बिना गणेश पूजा अधूरी रहती है। दूर्वा को गिनकर उसके 11, 7 आदि को एक साथ करके गणेश जी को अर्पित करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता अनुसार, जब गणेश जी ने अनलासुर नामक दैत्य को निगल लिया था, तब पेट में उत्पन्न जलन को शांत करने हेतु उन्होंने दूर्वा का सेवन किया था। तब से दूर्वा उन्हें अत्यंत प्रिय है।
कब होगा सितंबर में गणपति का विसर्जन पको बता दें कि भाद्रपद महीना समाप्त होने से एक दिन पहले गणपति का विसर्जन होगा। पूर्णिमा से एक दिन पहले अनंत चतुर्दशी को गणपति का विसर्जन होता है, जब बप्पा की प्रतिमा का विधिवत विसर्जन किया जाता है। इस बार गणेश प्रतिमा विसर्जन 6 सितंबर शनिवार को किया जाएगा। भगवान से सुख-समृद्धि की कामना कर अगले बरस जल्दी आने की आस में भक्त उन्हें विदा करते हैं।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)
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