BRICS या अमेरिका…भारत किस पर लगाए दांव? सबसे बड़े सवाल का अमेरिकी अर्थशास्‍त्री ने दिया चौंकाने वाला जवाब

नई दिल्‍ली: भारत के सामने बहुत बड़ी दुविधा खड़ी हो गई है। एक तरफ अमेरिका है तो दूसरी तरफ रूस, चीन और ब्राजील वाला ब्रिक्‍स समूह। इस समूह का वह खुद भी ह‍िस्‍सा है। उसे दोनों में से किसी एक को चुनना है। यूक्रेन युद्ध के बाद से अब तक वह अमेर‍िका या रूस दोनों में से किसी भी खेमे में शामिल होने से बचता रहा है। इस पूरी अवधि के दौरान भारत ने जहां अमेरिका के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया। वहीं, रूस के साथ भी अपने पुराने रिश्‍ते बनाए रखे। लेकिन, अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने आते ही भारत को ‘अग्निपरीक्षा’ देने के लिए मजबूर कर दिया। उन्‍होंने पिछले अमेरिकी प्रशासन से पूरी तरह से यू-टर्न ले लिया। आज भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि वह अमेरिका को चुने या ब्रिक्‍स को। इसका अमेरिकी अर्थशास्‍त्री जेफरी सैक्‍स ने चौंकाने वाला जवाब दिया है।

जेफरी सैक्स ने भारत को अमेरिका पर बहुत ज्‍यादा भरोसा करने से सावधान किया है। उनका कहना है कि अमेरिका के साथ सुरक्षा समझौते शायद सफल न हों। सैक्स ने सुझाव दिया है कि भारत को ब्रिक्‍स देशों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब भारत से उतना सामान नहीं खरीदेगा, जितना उसने पहले चीन से खरीदा था। सैक्स ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर लगाए गए टैरिफ और रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने बिना सोचे-समझे फैसले लिए। भारत को अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। सैक्स ने भारत को स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने और ब्रिक्‍स जैसे बहुध्रुवीय भागीदारों के साथ जुड़ने की सलाह दी है।

ट्रंप नहीं हैं बहुत तार्क‍िक व्‍यक्‍त‍ि

इंटरव्यू में सैक्स ने कहा कि कुछ लोगों को लगता था कि भारत चीन की जगह एक अच्छा व्यापारिक भागीदार बन जाएगा। लेकिन, उन्होंने इसे भोलापन बताया। सैक्स ने कहा कि अमेरिका भारत से ज्‍यादा सामान नहीं खरीदेगा, जैसा कि उसने चीन से नहीं किया। उन्होंने कहा कि यह उनकी राय नहीं है कि अमेरिका को क्या करना चाहिए, बल्कि यह उनकी भविष्यवाणी है कि अमेरिका क्या करेगा।

वह बिना सोचे-समझे काम करते हैं। उन्होंने सोचा कि भारत तुरंत उनकी मांगों को मान लेगा, भारत कहेगा – ‘हम रूसी तेल नहीं खरीदेंगे’। यह एक धमकी थी। भारत ने सही ढंग से धमकी के आगे घुटने नहीं टेके।’

सैक्स ने आगे कहा, ‘यह एक अच्छी तरह से सोची-समझी रणनीति नहीं थी। ट्रंप जो कुछ भी करते हैं, उसमें से बहुत कम एक अच्छी तरह से सोची-समझी रणनीति होती है। हालांकि, इसने भारत को उस चीज के बारे में सचेत कर दिया है जो मैं लंबे समय से कह रहा हूं, जो यह है कि भारत को अमेरिका पर अपने मुख्य भागीदार के रूप में भरोसा नहीं करना चाहिए। भारत को निश्चित रूप से अपनी स्वतंत्र विदेश नीति की आवश्यकता है। उसे अमेरिका के बयानों और प्रतिबद्धताओं पर कुछ ध्यान से देखना चाहिए।

ट्रंप ने क्‍यों नहीं बनाया चीन को न‍िशाना?

प्रोफेसर सैक्स ने इस बारे में भी बात की कि ट्रंप ने चीन को क्यों नहीं निशाना बनाया, जबकि वह रूसी तेल का ज्‍यादा बड़ा खरीदार है। उन्होंने कहा, ‘ट्रंप ने चीन को सजा देने की कोशिश की। लेकिन, चीन ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। उसने अमेरिकी उद्योग के लिए जरूरी रेयर अर्थ और रेयर अर्थ मैग्नेट और अन्य घटकों के निर्यात में कटौती कर दी। यह सिद्धांत का मामला नहीं है। यह धमकियों का मामला है। यह इस बात का मामला है कि ट्रंप बिना सोचे-समझे क्या करने का फैसला करते हैं, उन्हें लगता है कि वह किससे बच सकते हैं। इसलिए अगर आप निरंतरता की तलाश कर रहे हैं तो आप निश्चित रूप से गलत जगह पर देख रहे हैं। यह अमेरिका से नहीं आने वाला है।’

सैक्स ने अमेरिका-भारत संबंधों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, ‘ट्रंप रणनीतिकार नहीं हैं। वह तार्किक विचारक नहीं हैं। वह लगातार या दूरदर्शी विचारक नहीं हैं। अमेरिकी विदेश नीति अभी आवेगपूर्ण है। यह अल्पकालिक है। यह काम नहीं करती है। ट्रंप को लगता है कि उनके पास किसी भी अन्य देश के मुकाबले सारे पत्ते हैं। इसलिए उन्हें लगता है कि अमेरिका जो चाहे वह मांगने की ताकत रखात है।’

लड़खड़ा रहा है अमे‍र‍िका

सैक्स ने कहा कि इन कदमों के पीछे की प्रेरणा लगातार नीति से ज्‍यादा शक्ति का प्रदर्शन करना है। लेकिन, अगर आप मनोदशा जानना चाहते हैं तो अमेरिका लड़खड़ा रहा है। कारण है कि वह अपना प्रभुत्व खो रहा है। वह अपने प्रभुत्व को फिर से स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। वह डर को फिर से स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।सैक्‍स ने विस्तार से बताया कि अमेरिका किस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्‍होंने कहा, ‘वह चाहता है कि भारत अमेरिका के प्रति विनम्र रहे। वह चाहता है कि रूस अमेरिका के प्रति विनम्र रहे। वह चाहता है कि चीन अमेरिका के प्रति विनम्र रहे। वह चाहता है कि ब्रिक्‍स किसी तरह गायब हो जाए। ऐसा नहीं होने वाला है। दुनिया बदल गई है। दुनिया बहुध्रुवीय है। कई महाशक्तियां हैं: रूस, भारत, चीन, अमेरिका।’

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *