प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा सुर्खियों में रही. राष्ट्रपति मुइज्जू ने एयरपोर्ट जाकर गर्मजोशी से PM मोदी का स्वागत किया. दोनों देशों के मुखिया आत्मीयता से एक-दूसरे से मिले. इस दौरान भारत ने अपने पड़ोसी देश को करीब पांच हजार करोड़ रुपये की लोन सहायता देने का एलान किया. मालदीव ने भी कृतज्ञता प्रकट की और भारत को ‘फर्स्ट रिस्पांडर’ और ‘सबसे भरोसेमंद साझेदार’ बताया.
दोनों देशों के बीच ठंडे पड़ चुके रिश्तों ने गरमाहट ली और इस गरमाहट की आंच पहुंची चीन तक. चीन को मिर्ची लगनी तय थी. उसने भारतीय मीडिया पर ही अपनी भड़ास निकाल डाली. चीनी एक्सपर्ट्स ने भारतीय मीडिया की आलोचना की है. दावा किया कि भारतीय मीडिया ने अपनी कवरेज में दिखाया कि PM मोदी के दौरे से चीन की मालदीव पर पकड़ कमजोर हो रही है.
चीनी मुखपत्र Global Times ने चीनी एक्सपर्ट्स के हवाले से एक रिपोर्ट छापी है. जिसमें Tsinghua University के National Strategy Institute के रिसर्च डायरेक्टर कियान फेंग के हवाले से कहा गया,
भारतीय मीडिया का यह नजरिया पुरानी मानसिकता का है, जो विशुद्ध रूप से शत्रुतापूर्ण मानसिकता पर आधारित है.
रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ भारतीय मीडिया संस्थानों ने PM मोदी की यात्रा को चीनी प्रभाव के खिलाफ जीत के तौर पर प्रस्तुत किया. आगे लिखा,
मालदीव एक संप्रभु राष्ट्र है जो स्वाभाविक तौर पर पड़ोसी भारत के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता देता है. मालदीव चीन के Belt and Road Initiative में भी शामिल है और वह दोनों देशों के साथ संतुलित विदेश नीति अपनाने की कोशिश कर रहा है.
Global Times ने अपनी इस रिपोर्ट में जनवरी में मुइज्जू की चीन यात्रा का भी जिक्र किया. मुइज्जू के पिछले बयानों का जिक्र करते हुए लिखा गया,
उन्होंने (मुइज्जू ने) कहा था कि मालदीव हमेशा चीन का सबसे करीबी साझेदार बना रहना चाहता है. मुइज्जू ने कहा कि मालदीव दुनिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए चीन के नेतृत्व की सराहना करता है.
चीन और भारत के साथ संबंध
2023 में मुइज्जू ‘मालदीव फर्स्ट’ की नीति के सहारे ही सत्ता में आए थे. जिसका मकसद चीन के साथ संबंध अच्छे बनाना और भारत पर निर्भरता कम करना था. ‘इंडिया आउट’ कैंपेन इसी कड़ी का एक हिस्सा था. मुइज्जू का यह कैंपेन मालदीव में भारतीय सैनिकों की मौजूदगी के खिलाफ था. हालांकि, भारत ने तब सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई और मई 2024 तक 76 सैनिकों को टेकनीशियनों से बदल दिया.
मालदीव में जब भी किसी नए राष्ट्रपति का चुनाव होता है, तो वह अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा पर भारत आता है. सितंबर 2023 में जब मुइज्जू नए राष्ट्रपति बने तो उन्होंने पहले तुर्की और फिर चीन का दौरा किया. अब मालदीव एक बार फिर भारत के साथ अपने ठंडे पड़ चुके संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है. साथ ही चीन के साथ भी अपने हित साधने के लिए संतुलित विदेश नीति अपनाने की कोशिश कर रहा है.
![]()