ऑपरेशन सिंदूर: संसद में विपक्षी ‘मिसाइलों’ के जवाब में मोदी सरकार का ‘डिफेंस‍ सिस्‍टम’ एक्टिव

संसद का मानसून सत्र शुरू हो चुका है, और 21 अगस्त तक चलेगा. पूरे 32 दिन तक. दोनों सदन 12 से 17 अगस्त तक 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए स्थगित रहेंगे. लेकिन, इस शेड्यूल के बीच संसद में पहला दिन पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर हुए हंगामे की भेंट चढ़ता दिख रहा है. लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत प्रश्‍नकाल से हुई तो विपक्ष हंगामा करने लगा. जिस पर स्‍पीकर ओम बिड़ला ने कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्‍थग‍ित कर दी. जब कार्यवाही शुरू हुआ तो विपक्ष के सांसद सदन के वेल में आ गए. इसी बीच राहुल गांधी ने ऑपरेशन सिंदूर पर कुछ कहना चाहा, लेकिन चूंकि विपक्षी सांसद वेल में शोर कर रहे थे तो राहुल को भी कुछ कहने की इजाजत नहीं मिली. और इसी पर हंगामा और बढ़ गया. उधर, ऊपरी सदन राज्‍यसभा में भी विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और सदन के नेता जेपी नड्डा के बीच तीखी बहस हुई. और यहां भी कार्यवाही दो बार स्‍थग‍ित करनी पड़ी.

इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में चर्चा के लिए केंद्र सरकार को तैयार होना ही पड़ा. हालां‍कि, इसके अलावा कोई रास्ता भी कहां था? संसद के स्पेशल सेशन के नाम पर तो सरकार ने अपने मन की ही की थी. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखते रहे, लेकिन सरकार ने तो जैसे रिएक्ट ही नहीं किया. 
पूर्व रक्षा मंत्री शरद पवार के सामने आ जाने से सरकार थोड़ा सपोर्ट भी मिल गया. बाकी सपोर्ट तब मिला जब अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने शुरू में कांग्रेस की मांग को महत्व नहीं दिया. हालांकि, बाद में विशेष सत्र की मांग वाले पत्र पर जिन 16 दलों के हस्ताक्षर थे, ये दोनों पार्टियां भी शामिल रहीं – लेकिन, शरद पवार का साथ न देना,  और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी का इंडिया ब्लॉक से दूरी बना लेना भी विपक्षी गठबंधन के खिलाफ ही गया. 

जैसे विपक्ष का एजेंडा साफ है, सरकार ने भी अपनी तरफ से बता दिया है कि 17 विधेयक पेश किये जाएंगे. पेश किये जाएंगे तो बहुमत की सरकार पास भी करा लेगी, अगर राजनीतिक तौर पर ठीक नहीं लगा, तो पेश किये जाने के बाद संसदीय समितियां तो हैं ही. 
सदन की कार्यवाही से पहले ही ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र
विपक्ष का रुख तो पहले से ही साफ था, सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर भी फीडबैक ले ही लिया था – लिहाजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सत्र शुरू होने से पहले ही ऑपरेशन सिंदूर पर अपनी बात फिर से दोहरा दी.  सदन से बाहर, संसद परिसर में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ये मानसून सत्र एक विजयोत्सव है… पूरी दुनिया ने भारत के सैन्य के सामर्थ्य का रूप देखा है.
22 जून के  पहलगाम हमले पर जवाबी कार्रवाई का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सेना ने जो लक्ष्य निर्धारित किया था, उसे 100 फीसदी अचीव किया… आतंकियों के आकाओं के घर में जाकर 22 मिनट के भीतर ऑपरेशन सिंदूर के तहत उसको जमींदोज कर दिया गया. बोले, मैंने बिहार के कार्यक्रम में इसकी घोषणा की थी, हमारी सैन्य शक्ति ने बहुत ही कम समय में सिद्ध करके दिखा दिया… और इसमें मेन इन इंडिया सैन्य शक्ति का… ये नया स्वरूप देखकर दुनिया आकर्षित हुई है.

मोदी के संबोधन से पहले कांग्रेस नेताओं के तंज भरे बयान और मांगें भी सामने आने लगी थी. जयराम रमेश ने जहां प्रधानमंत्री मोदी के बयान से पहले कटाक्ष किया, प्रमोद तिवारी ने पहलगाम और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की मांग दोहराई. 
बहस और बात भी होगी, या सिर्फ हंगामा होगा?
संसद मॉनसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कह दिया कि सरकार ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है. बोले, ये राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे हैं… सरकार पीछे नहीं हट रही, और न कभी हटेगी… बल्कि, नियमों और परंपराओं के दायरे में चर्चा के लिए हमेशा खुली है.
कांग्रेस की तरफ से मांगों को लेकर नोटिस भी पहले ही दे दिये गये थे. रणदीप सुरजेवाला ने शून्यकाल को स्थगित कर पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए नोटिस दिया है, तो मणिक्कम टैगोर ने पहलगाम हमले और  ऑपरेशन सिंदूर के साथ साथ डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर अलग से नोटिस दिया है.
विपक्ष चर्चा तो बिहार चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग के SIR पर भी चाहता है, लेकिन ज्यादा जोर सीजफायर को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर बहस को लेकर है. 

असल में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीजफायर की जानकारी सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से ही आई थी, और तभी से विपक्ष की तरफ से चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाये जाने की मांग होने लगी थी. हालांकि, भारत की  तरफ से बार बार यही बताया गया कि सीजफायर भारत और पाकिस्तान की रजामंदी से हुई, और इसकी पहल पाकिस्तान की तरफ से की गई थी. 
अब देखना है ऑपरेशन सिंदूर पर बहस कितनी होती है, और कितना हंगामा होता है. 
बहस के लिए अब बचा क्या है?
पहलगाम अटैक, ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर – सभी टॉपिक पर बात करीब करीब हो चुकी है. सरकार अपनी बात बता चुकी है, और विपक्ष भी अपनी बात कह चुका है.
अब बचता है कि बात किस फोरम पर हो रही है. संसद देश और संविधान का सबसे पड़ा फोरम है. अदालती कार्यवाही में तो फिल्मी डायलॉग ही गूंजते हैं, जो कहूंगा सच कहूंगा, सच के सिवा कुछ नहीं कहूंगा – लेकिन संसद में जो कहा जाता है, वो रिकॉर्ड होता है. जो रिकॉर्ड के लायक नहीं होता, डिलीट कर दिया जाता है. 
विपक्ष की तरफ से सर्वदलीय बैठक में बार बार प्रधानमंत्री मोदी को बुलाने की मांग हो रही थी. ऑपरेशन सिंदूर पर हुई बैठकों की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कर रहे थे. मॉनसून सत्र वाली बैठक में मोर्चे पर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा थे. अब चाहे हंगामा हो या बहस, विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों का ही ध्यान आने वाले बिहार चुनाव पर होगा. जो भी कहा जाएगा, या जिस बात पर भी हंगामा होगा, उसके मूल में एजेंडा बिहार विधानसभा चुनाव ही होगा, कोई दो राय नहीं लगती. 

ये अच्छी बात है कि देश के सबसे संवेदनशील मुद्दे पर विपक्ष भी अपनी बात कहेगा, और मॉनसून सत्र होने का कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी संबोधन होगा ही – और कुछ हो न हो, आरोप और प्रत्यारोप बिहार की चुनावी रैलियों की झलक तो दिखा ही देंगे.  

सत्ता पक्ष आपकी राय

ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सेना ने जो लक्ष्य निर्धारित किया था, उसे 100 फीसदी अचीव किया… आतंकियों के आकाओं के घर में जाकर 22 मिनट के भीतर ऑपरेशन सिंदूर के तहत उसको जमींदोज कर दिया गया.
– नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

विपक्ष की राय

सवाल ये है कि रक्षा मंत्री को सदन में बोलने की अनुमति है, लेकिन विपक्ष के सदस्यों, जिनमें मैं भी शामिल हूं, जो विपक्ष का नेता हूं, हमें बोलने की अनुमति नहीं है. परंपरा कहती है कि अगर सरकार की ओर से लोग बोल सकते हैं, तो हमें भी बोलने की जगह दी जानी चाहिए.
– राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा

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