अचानक ऐसा क्या हुआ? तीन महीने ताबड़तोड़ निवेश… अब इन निवेशकों ने निकाले ₹5524Cr

साल 2025 में ग्लोबल हालात कई बार बिगड़े, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ  से ट्रेड वॉर की स्थिति बनी और शेयर बाजारों  में उथल-पुथल भी देखने को मिली. इनके साथ ही विदेशी निवेशकों  का सेंटीमेंट भी बदला-बदला नजर आया. फिलहाल, ट्रंप जहां दुनिया के तमाम देशों पर नए सिरे से टैरिफ लगा रहे हैं, तो वहीं भारत के साथ डील को लेकर  को लेकर अभी असमंजस बरकरार है. इसका असर देखें, तो अप्रैल से जून तक तीन महीनों में एफपीआई (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार में ताबड़तोड़ पैसे लगाए, लेकिन जुलाई में तगड़ी बिकवाली कर रहे हैं. इस महीने अब तक विदेश निवेशकों ने 5524 करोड़ रुपये निकाले हैं.
 

18 जुलाई तक 5524 करोड़ रुपये निकाले

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई महीने में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स यानी एफपीआई ने भारतीय बाजार से जमकर निकासी की है. शुद्ध बिकवाल बने नजर आ रहे विदेशी निवेशकों ने बीते 18 जुलाई तक 5,524 करोड़ रुपये निकाले थे. डिपॉजिटरी के आंकड़ों को देखें, तो इस ताजा आंकड़े के साथ साल 2025 में अब तक FPI Outflow 83,245 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. इस महीने एफपीआई के रुझान में ये बड़ा बदलाव हैरान करने वाला है, जिसने अपने पिछले तेजी के रुख को पलटा है. 

लगातार 3 महीने लगाए थे पैसे

  इससे पहले लगातार तीन महीने विदेशी निवेशकों ने तगड़ी रकम का निवेश भारतीय बाजारों में किया था और ये अप्रैल से ही जारी थी. FPI ने अप्रैल महीने में 4,223 करोड़ रुपये का नेट इन्वेस्ट किया था और फिर अगले महीने यानी मई में निवेश का आंकड़ा और बढ़ गया और ये 19,860 करोड़ रुपये हो गया. इसके अगले जून महीने में निवेश की रफ्तार कुछ कम हुई, लेकिन भी एफपीआई ने 14,590 करोड़ रुपये लगाए. बता दें कि इन तीन महीनों की तेजी से पहले भी विदेशी निवेशक बेरुखी दिखा रहे थे और शुरुआती तीन महीनों के आंकड़े देखें, तो जनवरी में 78,027 करोड़ रुपये, फरवरी में 34,574 करोड़ रुपये और मार्च में निवेशकों ने 3,973 करोड़ रुपये निकाले थे. 

क्या ये है FPI की बेरुखी की वजह? 

अब बात करते हैं कि आखिर अचानक विदेशी निवेशकों के रुख में इस बदलाव के पीछे कारण क्या है. तो उनके इस व्यवहार के लिए एक नहीं, बल्कि कई कारकों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-भारत के बीच व्यापार डील  को लेकर असमंजस इसमें बड़ी भूमिका निभाता नजर आ रहा है, जिस पर कुछ मुद्दों को लेकर बात अटकी हुई है. हालांकि, भारत और अमेरिका दोनों ही देशों की ओर से लगातार ये दावा किया जा रहा है कि बातचीत सही ट्रैक पर चल रही है और डील होने के बेहद करीब है. बता दें कि ये डील डेयरी और एग्रीकल्चर सेक्टर से जुड़े मुद्दों को लेकर फंसी हुई है. 
इसके अलावा एफपीआई की निकासी का एक और बड़ा कारण तमाम छोटी-बड़ी कंपनियों द्वारा जारी किए जा रहे पहली तिमाही के नतीजे भी हैं, जो सीधे शेयर बाजार  पर अपना असर दिखा रहे हैं. दरअसल, अप्रैल-जून तिमाही में कंपनियों के मिले-जुले तिमाही नतीज सामने आ रहे हैं, जिसके चलते भी FPI शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं. इसके अलावा अमेरिका-चीन के बीच नए व्यापारिक तनाव  और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड  में बढ़ोतरी भी वजह माना जा रहा है. 

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