आसिम मुनीर मेरे दुख को तभी समझेंगे, जब उनके बच्चों को… लेफ्टिनेंट विनय के पिता का

पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले 26 लोगों में एक लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी थे, जिनकी शादी को महज हफ्ताभर भी नहीं बीता था। उनके शव के साथ उनकी पत्नी हिमांशी नरवाल की तस्वीर ने देश को हिलाकर रख दिया था। पाकिस्तान के प्रति लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था। बेटे को खोने के कई महीनों बाद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के पिता का दर्द फिर से छलका है। उन्होंने पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर पर निशाना साधते हुए कहा है कि वह उनके दुख को तभी समझ पाएंगे, जब वह भी अपने बेटे या बेटी को को इसी तरह से खोएंगे।

लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के पिता राजेश ने ‘एनडीटीवी’ से बात करते हुए कहा, ”वह (पाकिस्तानी आर्मी चीफ मुनीर) मेरे दर्द को तभी समझ सकेंगे, जब कोई उसके बेटे या बेटी को नुकसान पहुंचाएगा। जिस दिन उन्हें पता चलेगा कि बेटे या बेटी की आतंकी हमले में मौत हो गई, तभी उसे दर्द का अहसास होगा। यदि मुझे एक सामान्य व्यक्ति को बंदूक चलाने के लिए दी जाए और मैं उसके बेटे या बेटी को ले जाऊं तब उसे दर्द का पता चलेगा।”

16 अप्रैल को विनय और हिमांशी की शादी हुई थी और इसके तीन दिन बाद दोनों का रिसेप्शन हुआ। हनीमून मनाने के लिए कपल कश्मीर गया था। इसी दौरान, 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ और आतंकवादियों ने विनय नरवाल के सिर में गोली मार दी। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था और पाकिस्तान व पीओके में एयर स्ट्राइक करते हुए कई आतंकियों को मार गिराया। इस दौरान मई में चार दिनों तक दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था।

लेफ्टिनेंट विनय के पिता ने बात करते हुए आगे कहा, ”मैं यहां तक कि परिवार के सामने रो भी नहीं सकता। मेरी पत्नी, मेरे पैरेंट्स सभी पूरी तरह से टूट गए हैं, लेकिन मुझे शांत रहना है ताकि मैं मजबूत दिखूं। मन में शांति नहीं है। इतने दिन हो गए, लेकिन हम लोग सो नहीं पा रहे। पूरी तरह से दिमाग सुन्न हो गया है। कोई भी दो या तीन घंटे से ज्यादा सो नहीं पाता है। जब हम मनोचिकित्सक के पास जाते हैं तो वे दवा लिखते हैं, लेकिन इसका कोई इलाज नहीं है।”
पहलगाम आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर का बड़ा रोल सामने आया था। उन्होंने हिंदुओं के खिलाफ जमकर जहर उगला था। इसके बाद 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के दौरान आतंकियों ने लोगों से उनका धर्म पूछकर मार डाला था। 16 अप्रैल को इस्लामाबाद में प्रवासी पाकिस्तानियों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए जनरल मुनीर ने पाकिस्तान के लोगों से बच्चों को कहानियां सुनाने का आह्वान भी किया ताकि वे यह न भूलें कि वे हिंदुओं से अलग हैं।

उन्होंने पाकिस्तान के संस्थापक एमए जिन्ना द्वारा प्रतिपादित टू नेशन थ्योरी का हवाला देते हुए कहा, “आपको अपने बच्चों को पाकिस्तान की कहानी सुनानी होगी ताकि वे यह न भूलें कि हमारे पूर्वज जीवन के हर पहलू में हिंदुओं से अलग समझते थे। उन्होंने कहा था, “हमारे धर्म अलग हैं, हमारे रीति-रिवाज अलग हैं, हमारी परंपराएं अलग हैं, हमारे विचार अलग हैं, हमारी महत्वाकांक्षाएं अलग हैं। यहीं टू-नेशन थ्योरी की नींव रखी गई थी। हम दो राष्ट्र हैं, हम एक राष्ट्र नहीं हैं।” मुनीर के इस संबोधन को भड़काने वाला माना गया और हफ्तेभर में ही कश्मीर में आतंकवादियों का हमला हो गया था।

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