पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की अध्यक्षता मिलने पर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। पार्टी ने इसे भारत की कूटनीतिक विफलता बताया और सवाल उठाया कि पाकिस्तान जैसे देश, जो खुद आतंकवाद फैलाने में शामिल है, उसे वैश्विक मंच पर इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसे मिल गई।
दरअसल, पाकिस्तान ने मंगलवार को घोषणा की कि वह जुलाई महीने के लिए यूएनएससी का अध्यक्ष बनेगा। पाकिस्तान जनवरी 2025 से सुरक्षा परिषद में गैर-स्थायी सदस्य है। इसके अलावा पाकिस्तान को तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद रोधी समिति का उपाध्यक्ष भी बनाया गया है।कांग्रेस बोली- आतंकवाद फैलाने वाला बना सुरक्षा संरक्षकबंगलूरूमें पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पाकिस्तान जैसे देश को यूएनएससी का अध्यक्ष बनाना वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने आगे कहा कि आतंक फैलाने वाला देश अब वैश्विक सुरक्षा का संरक्षक बन गया है। यह भारत सरकार के लिए शर्मनाक है।पाकिस्तान की भूमिका पर उठाए सवालसुरजेवाला ने कहा कि पाकिस्तान का इतिहास आतंकियों को पनाह देने, आतंकवाद को बढ़ावा देने और भारत में हमले करवाने का रहा है। हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले को भी उन्होंने पाकिस्तान प्रायोजित हमला बताया। साथ ही उन्होंने ये भी कहा ऐसे में पाकिस्तान को इस तरह की जिम्मेदारियां मिलना भारत की कूटनीतिक विफलता का प्रमाण है।
भारत की चुप्पी पर भी सवालकांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर दुनिया में अपनी कूटनीतिक ताकत का ढोल पीटते हैं, लेकिन पाकिस्तान को इन जिम्मेदारियों से रोकने में असफल रहे। सुरजेवाला ने कहा कि जब 4 जून 2025 को पाकिस्तान को UN आतंकवाद रोधी समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया, तब भी भारत ने कोई कड़ा विरोध दर्ज नहीं कराया।
पड़ोसी देशों से भी रिश्ते बिगड़ने का आरोपसुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार की कूटनीति फोटो खिंचवाने और दिखावे तक सीमित रह गई है। कांग्रेस के समय में जो भरोसेमंद रिश्ते पड़ोसी देशों और एशिया के कई देशों से बने थे, वह अब टूटते जा रहे हैं। आज भारत अलग-थलग पड़ गया है। मालदीव, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देश भी हमारे साथ नहीं खड़े हैं।इतना ही नहीं, इसके साथ ही कांग्रेस ने सरकार से जवाब भी मांगा कि आखिर भारत वैश्विक मंच पर इतनी बड़ी कूटनीतिक हार का शिकार क्यों हुआ और पाकिस्तान को इन पदों पर बैठने से रोकने के लिए क्या प्रयास किए गए
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