चट्टानों में धंस गए ढांचे, गर्त में गई छत… विनाश सटीक शब्द है’, ट्रंप ने बताया हमले के बाद ईरानी न्यूक्लियर साइट का हाल

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के न्यूक्लियर साइट पर अमेरिकी अटैक से हुए तबाही को बताने के लिए विनाश सटीक शब्द है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर ऑपरेशन मिडनाइट हैमर की खूब तारीफ की है. ट्रंप ने कहा है उपग्रह चित्रों से पता चलता है कि ईरान में सभी परमाणु स्थलों को भारी क्षति हुई है. राष्ट्रपति ने कहा कि इन न्यूक्लियर साइट्स को असली नुकसान तो धरती के गहरे नीचे हुआ है. 

ट्रंप ने लिखा, “उपग्रह चित्रों से पता चलता है कि ईरान में सभी परमाणु स्थलों को भारी क्षति हुई है. विनाश एक सटीक शब्द है! दिखाई गई सफेद स्ट्रक्चर चट्टान में गहराई से धंसी हुई है, यहां तक कि इसकी छत भी जमीन से काफी नीचे चली गई है, और आग से बच गई दिखती है. सबसे ज्यादा नुकसान जमीन से काफी नीचे हुआ, बुल्सआई!!!”
रविवार को हमले के बाद भी ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने तीन ईरानी परमाणु स्थलों को “पूरी तरह से नष्ट” कर दिया है, इसे उन्होंने “जोरदार सफल” हमला बताया है.

इन न्यूक्लियर साइट्स पर हमले के लिए अमेरिका सेना ने बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया था. 
बता दें कि अमेरिका के ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन के अनुसार, “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के तहत शुक्रवार मध्य रात्रि को अमेरिका से सात बी-2 स्टील्थ बमवर्षकों का एक बड़ा दल टारगेट की ओर रवाना हुआ. इनमें से प्रत्येक में दो क्रू मेंबर के सदस्य थे.”

अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार दुश्मन को चकमा देने के लिए छद्म विमानों का एक समूह प्रशांत महासागर के ऊपर पश्चिम की ओर उड़ गया, जबकि मुख्य हमलावर ग्रुप 18 घंटे की उड़ान के लिए पूर्व की ओर बढ़ गया. इस दौरान ये विमान अपने बेस से कम से कम संचार स्थापित कर रहा था. 

शाम 5 बजे EST (स्थानीय समयानुसार सुबह 1:30 बजे और जीएमटी 21:00 बजे) क्षेत्र में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने दो दर्जन से अधिक टॉमहॉक मिसाइलें दागीं, इन मिसाइलों का लक्ष्य ईरान का इस्फहान न्यक्लियर साइट था. इस हमले में इस्फहान को भारी नुकसान पहुंचा. यहां EST का मतलब Eastern Standard Time है. इस स्टैंडर्ड टाइम का इस्तेमाल नॉर्थ अमेरिका, कैरेबियन और सेंट्रल अमेरिका में होता है.
शाम 6:40 बजे ईएसटी (ईरान समयानुसार सुबह 2:10 बजे और जीएमटी 22:40 बजे) लीड टीम बी-2 ने फोर्डो पर 2 जीबीयू-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (एमओपी) गिराए. ये तबाही का दृश्य था. इसके बाद फोर्डो और नतांज में कुल 14 एमओपी गिराए गए. बता दें कि एक MOP का वजन 13 हजार किलोग्राम होता है.
फोर्डो, नतांज़ और इस्फ़हान तीनों परमाणु स्थलों पर हमला किया गया. टॉमहॉक मिसाइलों की अंतिम वेव ने आश्चर्य बनाए रखने के लिए इस्फहान पर सबसे अंत में हमला किया.

इस पूरे ऑपरेशन में कुल मिलाकर 125 से अधिक अमेरिकी विमानों ने भाग लिया, जिनमें स्टील्थ बॉम्बर, लड़ाकू जेट, दर्जनों टैंकर, निगरानी विमान और सहायक दल शामिल थे.
पेंटागन ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा बी-2 लड़ाकू अभियान बताया है. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार ये मिशन अब तक का दूसरा सबसे लंबा बी-2 मिशन था. अमेरिका के इस ऑपरेशन के बाद पूरे पश्चिम एशिया में मौजूद अपने सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा अमेरिका ने बढ़ा दी है.

ईरानी मीडिया का दावा

वहीं तेहरान की सरकारी मेहर समाचार एजेंसी ने बताया कि फोर्डो साइट पर संवर्धित यूरेनियम को पहले ही कहीं और ले जाया जा चुका है.
मेहर ने एक अज्ञात ईरानी स्रोत का हवाला देते हुए बताया कि “फोर्डो इनरिचमेंट सेंटर में पहले से स्टोर किए गए अधिकांश यूरेनियम को दूसरे स्थान पर ले जाया गया है.”
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा है कि अमेरिका का मानना ​​है कि वाशिंगटन द्वारा इस्फहान सहित ईरानी परमाणु स्थलों पर हमले से पहले ईरान के 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम के भंडार का एक बड़ा हिस्सा इस्फ़हान में मौजूद था.
रुबियो ने कहा कि हालांकि किसी को भी कुछ दिनों तक निश्चित रूप से पता नहीं चलेगा. उन्हें संदेह है कि ऑपरेशन से पहले ईरान के यूरेनियम भंडार को स्थानांतरित किया गया था.

रुबियो ने कहा, “मुझे संदेह है कि उन्होंने इसे स्थानांतरित किया. वे अभी ईरान के अंदर कुछ भी ट्रांसफर नहीं कर सकते. मेरा मतलब है जैसे ही कोई ट्रक कहीं से चलना शुरू करता है, इजरायली इसे देख लेते हैं, और वे इसे निशाना बनाकर टारगेट करते हैं. इसलिए हमारा आकलन है कि हमें यह मानना ​​होगा कि इस्फहान में जमीन के नीचे बहुत सारा 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम दबा हुआ है.”
इस्फहान न्यूक्लियर सेंटर पर अब तक दो बार हमला हो चुका है. 

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