अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जी7 शिखर सम्मेलन को बीच में ही छोड़कर वापस वॉशिंगटन लौट रहे हैं. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने कनाडा में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले वापस लौटने का फैसला किया है. इजरायल और ईरान तनाव की वजह से ट्रंप ने लोगों को तुरंत तेहरान खाली करने की चेतावनी भी दी है. जी7 समिट से ट्रंप का जल्दी लौटना होगा और सदस्य देशों का इजरायल को खुला समर्थन देना आखिर किस ओर इशारा कर रहा है?
मिडिल ईस्ट में तेज होगी जंग
राष्ट्रपति ट्रंप की वतन वापसी पर व्हाइट हाउस ने कहा कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कई अहम मामलों पर फोकस करने के लिए ट्रंप वापस आ रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार की रात राष्ट्राध्यक्षों के साथ डिनर के बाद जी7 शिखर सम्मेलन को जल्दी छोड़कर अमेरिका के लिए रवाना होंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अमेरिका जंग में शामिल होने जा रहा है, वो अहम मसले क्या हैं, जिनके लिए ट्रंप शिखर सम्मेलन छोड़कर वापस लौट रहे हैं. ट्रंप पहले ही खुलकर इजरायल का समर्थन कर चुके हैं, लेकिन अब तक अमेरिका ने सीधे तौर पर जंग में उतरने का ऐलान नहीं किया है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से संकेत मिलता है कि अमेरिका, इजरायल का मजबूत समर्थन कर रहा है, लेकिन अभी तक अमेरिका ने इन हमलों में सीधे तौर पर अपनी भागीदारी से इनकार किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बीते दिनों कहा था है कि इजरायल ने ईरान के खिलाफ हाल के हमलों को एकतरफा रूप से अंजाम दिया और अमेरिका इन हमलों में शामिल नहीं है. अमेरिका की प्राथमिकता क्षेत्र में अपनी सेनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. लेकिन बदलते माहौल में अमेरिका इस संघर्ष में मोर्चा संभाल सकता है.
जी7 नेताओं ने किया इजरायल का समर्थन
इजरायल ने अमेरिका से खुलकर समर्थन मांगा है और अमेरिका भी इस बारे में विचार कर रहा है. इजरायल ने अमेरिका से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तबाह करने के लिए सैन्य अभियान में शामिल होने की अपील की है. यह अपील खास तौर पर उन परमाणु सुविधाओं पर केंद्रित है, जो काफी अंडरग्राउंड हैं और जिन्हें नष्ट करने के लिए अमेरिका के पास विशेष हथियार मौजूद हैं.
जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी सभी देशों ने खुलकर इजरायल का समर्थन किया है और ईरान पर तनाव कम करने का दबाव बनाया है. जी7 के सदस्यों ने इस बात पर भी जोर दिया कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने का अधिकार नहीं है. साथ ही कहा है कि इजरायल को अपनी आत्मरक्षा में कदम उठाने चाहिए. वैश्विक मंच से इजरायल को खुला समर्थन उसके इरादों को मजबूत करेगा, ऐसे में ईरान पर जारी हमले और तेज हो सकते हैं. साथ ही ट्रंप भी इस समिट के दौरान सदस्य देशों के नेताओं के साथ तनाव पर मंथन करके वापस लौट रहे हैं.
परमाणु समझौते पर नहीं बनी बात
अमेरिका ने पहले ही मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है, जिसमें B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स और अन्य सैन्य साजो-सामान शामिल हैं. यह तैनाती संभावित क्षेत्रीय युद्ध की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की तैयारी का संकेत दे रही है. ट्रंप ने यह भी कहा है कि अगर ईरान अमेरिकी हितों या सैन्य ठिकानों पर हमला करता है, तो इसका तगड़ा जवाब दिया जाएगा, जो अमेरिका की सैन्य तत्परता को दर्शाता है.
ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ परमाणु समझौते को फिर से जीवित करने की कोशिश की है. ट्रंप ने 60 दिन का अल्टीमेटम दिया था, जो बिना किसी सहमति के खत्म भी हो गया. ऐसे में ट्रंप के पास ईरान को सबक सिखाने का बहाना भी है. ईरान ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए दावा किया कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है. हालांकि, इजरायली हमलों ने इन वार्ताओं को बाधित कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है.
इजरायली हमले और अमेरिकी धमकी
इजरायल के हमलों और अमेरिका की चेतावनी ने मिडिल ईस्ट में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है. ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है, जिसमें अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात भी शामिल है. फ्रांस जैसे G7 देश ने सीजफायर और कूटनीतिक समाधान की वकालत की है, लेकिन ईरान के खिलाफ ट्रंप का रुख ज्यादा आक्रामक नजर आ रहा है.
ट्रंप ने सोमवार को सार्वजनिक रूप से तेहरान के निवासियों से तुरंत शहर खाली करने की चेतावनी दी, जिसे एक गंभीर अल्टीमेटम माना जा रहा है. उन्होंने कहा कि ईरान को अमेरिका के साथ परमाणु समझौता करना चाहिए था. इस चेतावनी का मकसद ईरान पर कूटनीतिक दबाव बनाना हो सकता है, ताकि वह परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए मजबूर हो. ट्रंप का यह बयान इजरायल के हमलों के बाद आया, जिसमें तेहरान में सैन्य और परमाणु ठिकानों के साथ-साथ ईरानी स्टेट टेलीविजन सेंटर पर हमले किए गए थे.
ट्रंप का अल्टीमेटम और G7 समिट से जल्दी वापस लौटना इस बात की ओर इशारा करते हैं कि अमेरिका स्थिति को गंभीरता से ले रहा है. अगर ईरान जवाबी कार्रवाई करता है, तो अमेरिका के युद्ध में शामिल होने की संभावना बढ़ सकती है, खासकर अगर उसके ठिकाने निशाना बनते हैं. ट्रंप ईरान पर सैन्य दबाव डालकर उसे परमाणु समझौते के लिए मजबूर करना चाहते हैं, लेकिन इजरायल के हमलों ने इस संभावना को भी कमजोर कर दिया है.
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