रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने INS विक्रांत पर नौसेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि आपकी ताकत ने दुश्मन को किनारे पर ही रोक दिया. मैं आप सभी से कहना चाहता हूं कि आप अपनी तैयारियों में कोई कमी न रखें. अब तक जो हुआ, वह तो वार्म अप था, अगर पाकिस्तान ने फिर से कोई जुर्रत की. तो इस बार Navy भी हरकत में आएगी. और फिर भगवान ही जानता है कि पाकिस्तान का क्या होगा.
उन्होंने कहा कि 1971 इसका गवाह है कि जब Indian Navy हरकत में आई थी, तो पाकिस्तान एक से दो हो गया था. अगर ऑपरेशन सिंदूर में, भारतीय नौसेना अपने फॉर्म में आई होती, तो पाकिस्तान के दो टुकड़े ही न होते बल्कि मैं समझता हूं शायद चार टुकड़े हो जाते.

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे भारत को हिला दिया. इस हमले में 26 लोग मारे गए. भारत ने इस कायराना हमले का जवाब देने के लिए 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. इस ऑपरेशन में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. आइए, जानते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय नौसेना ने क्या किया और किन हथियारों का इस्तेमाल हुआ.
ऑपरेशन सिंदूर क्या था?
ऑपरेशन सिंदूर भारत की सशस्त्र सेनाओं का एक संयुक्त अभियान था, जो 6-7 मई 2025 की रात 1:05 से 1:30 बजे तक चला. यह पहलगाम हमले का जवाब था, जिसे लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे आतंकी संगठनों ने अंजाम दिया था.
भारत ने इन आतंकी संगठनों के नौ ठिकानों पर हमले किए, जिनमें से चार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में और पांच PoK में थे. इन ठिकानों में आतंकियों को ट्रेनिंग, हथियार और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट मिलता था. भारत ने इस ऑपरेशन को “सटीक, संयमित और गैर-उत्तेजक” बताया. इसका मतलब था कि हमले केवल आतंकी ठिकानों पर किए गए, न कि पाकिस्तानी सेना या नागरिक क्षेत्रों पर.
भारतीय नौसेना की भूमिका
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय नौसेना ने अरब सागर में अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन किया. पहलगाम हमले के तुरंत बाद, नौसेना ने INS विक्रांत के नेतृत्व में एक शक्तिशाली टास्क फोर्स तैनात की, जिसमें डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, सबमरीन और विमान शामिल थे. इस टास्क फोर्स ने कराची के दक्षिण में अरब सागर में स्थिति बनाई, जिससे पाकिस्तानी नौसेना को अपने बंदरगाहों तक सीमित रहना पड़ा.
नौसेना के उप-प्रमुख वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद ने बताया कि हमले के 96 घंटों के भीतर हमने अरब सागर में कई हथियारों का परीक्षण किया. हमारी तैनाती ने पाकिस्तानी नौसेना को समुद्र में आने से रोका. नौसेना ने सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और टॉरपीडो का इस्तेमाल किया, जिससे उनकी युद्ध-तैयारी साबित हुई.
भारतीय नौसेना की रणनीति
भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन सिंदूर में “नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर” की रणनीति अपनाई. इसका मतलब है कि बिना सीमा पार किए, लंबी दूरी के हथियारों और जहाजों की तैनाती से दुश्मन पर दबाव बनाया गया. INS विक्रांत, जिस पर 15 मिग-29K फाइटर जेट तैनात थे, ने कराची के पास अरब सागर में डेरा डाला. नौसेना ने मिसाइल और टॉरपीडो फायरिंग ड्रिल किए, जिससे पाकिस्तानी नौसेना खुले समुद्र में नहीं आ सकी.
हमले के लक्ष्य
ऑपरेशन में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया…
• मार्कज सुभान अल्लाह, बहावलपुर (JeM): जैश का मुख्यालय.
• मार्कज तैबा, मुरिदके (LeT): 200 एकड़ का प्रशिक्षण केंद्र.
• मार्कज अब्बास, कोटली (JeM): आत्मघाती हमलावरों का प्रशिक्षण केंद्र.
• सय्यदना बिलाल और शवई नाला, मुजफ्फराबाद (JeM, LeT): घुसपैठ के लिए इस्तेमाल.
• मार्कज अहले हदीस, बरनाला (LeT): लॉजिस्टिक्स हब.
• महमूना जिया, सियालकोट (JeM): हथियार प्रशिक्षण.
• मार्कज रहील शाहिद, कोटली (JeM): आतंकी प्रशिक्षण.
• सर्जल फैसिलिटी, तहरा कलां (JeM): घुसपैठ का केंद्र.
इन हमलों में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए, जिनमें LeT के अबू अकाशा और JeM के मोहम्मद यूसुफ अजहर जैसे बड़े नाम शामिल थे.
किन हथियारों का इस्तेमाल हुआ?
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेनाओं ने अत्याधुनिक और सटीक हथियारों का उपयोग किया. नौसेना ने सीधे हमले में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन उसकी तैनाती और हथियारों के प्रदर्शन ने दुश्मन को डराया. नीचे ऑपरेशन में इस्तेमाल हुए प्रमुख हथियारों की सूची है…
SCALP (Storm Shadow) क्रूज मिसाइल… यह हवा से जमीन पर मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइल है, जिसे भारतीय वायुसेना के राफेल जेट्स ने इस्तेमाल किया. इसकी रेंज 250 किमी है. यह स्टील्थ तकनीक के कारण रडार से बच सकती है. यह बंकरों और मजबूत ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम है.
SkyStriker लॉइटरिंग म्यूनिशन्स (कामिकाज़ ड्रोन)… यह भारत-इजराइल निर्मित ड्रोन है, जो लक्ष्य के ऊपर मंडराता है और सही समय पर हमला करता है. यह 10 किग्रा विस्फोटक ले जा सकता है. आतंकी ठिकानों को नष्ट करने में प्रभावी है. इसका इस्तेमाल PoK और पंजाब के ठिकानों पर किया गया.
IAI Harop ड्रोन… यह इजराइल निर्मित लॉइटरिंग म्यूनिशन है, जो 200 किमी की रेंज और 9 घंटे तक मंडराने की क्षमता रखता है. यह रडार और हवाई रक्षा प्रणालियों को नष्ट करने में सक्षम है. ऑपरेशन में इसका उपयोग पाकिस्तान की हवाई रक्षा को कमजोर करने के लिए किया गया.
आकाश मिसाइल सिस्टम… यह DRDO द्वारा विकसित स्वदेशी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है. इसका इस्तेमाल पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों को रोकने के लिए किया गया. यह ड्रोन हमलों को नाकाम करने में प्रभावी है.
L/70 और शिल्का गन… L/70 एक उन्नत तोप है, जिसमें रडार और ऑटो-ट्रैकिंग सिस्टम हैं. शिल्का (रूसी मूल की) में चार 23 मिमी गन हैं, जो 20 किमी तक लक्ष्य भेद सकती हैं. इनका इस्तेमाल पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराने के लिए किया गया.
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