कोरोना वायरस का नया वेरिएंट कितना खतरनाक? AIIMS के पूर्व डायरेक्टर डॉ. गुलेरिया ने बताया

कोरोना वायरस (Covid19) ने एक बार फिर से दस्तक दे दी है. कोविड-19 को शुरू हुए अब पांच साल हो चुके हैं, लेकिन वायरस खत्म नहीं हुआ है. यह हर साल नया रूप लेकर लौटता है. कभी डेल्टा, कभी ओमिक्रॉन और अब NB.1.8.1 और LF.7 जैसे नए वेरिएंट. नए वेरिएंट JN.1 ने कई राज्यों में पैर पसार लिए हैं. महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक कोविड-19 के तमाम मामले देखें जा रहे हैं. तमिलनाडु और केरल में भी कोरोना के केस मिले हैं. 

दिल्ली AIIMS के पूर्व डॉयरेक्टर रणदीप गुलेरिया से कोरोना को लेकर खास बातचीत में कहा, “कोरोना वायरस का नया वेरिएंट जेएन.1 आया है. ये वेरिएंट अगस्त 2023 में रिपोर्ट किया गया था लेकिन यह अब सारी दुनिया में सबसे ज्यादा है.” 
उन्होंने आगे बताया कि इस वेरिएंट में कुछ म्यूटेशन है, जिस वजह से ये ज्यादा इन्फेक्शन करता है. इसमें जुकाम, नजला, बुखार, खांसी, खरास होती है. जिन लोगों को हार्ट की समस्या है, डायबिटीज है या ऐसी दवाइयों पर हैं, जिससे इम्युनिटी कम हो जाती है, उनको ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है. 

क्या पहले से लगी वैक्सीन काम करेगी?

रणदीप गुलेरिया ने बताया कि अभी तक जो डेटा सामने आया है, उसमें यह देखा गया है कि कुछ प्रोटेक्शन है. कुछ प्रोटेक्शन इसलिए भी है क्योंकि अगर हम यह कहें कि कोविड  आने के बाद कई वेरिएंट आए, अल्फा, बीटा, गामा और अब ये आया है, जो ओमिक्रॉन का ही एक वेरिएंट है.

उन्होंने आगे कहा कि ओमिक्रॉन से सबको इन्फेक्शन हुआ था. हमारे अंदर इम्यूनिटी है लेकिन वेरिएंट खुद में बदलाव करते हैं, इस वजह से इन्फेक्शन बीच-बीच में बढ़ जाता है. 
डॉयरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा, “हमें यह देखना होगा कि यह वेरिएंट आगे जाकर को सीरियस रुख तो नहीं ले सकता है. बुजुर्ग और इम्युनिटी की कमी से जूझ रहे लोगों को सावधान होने की जरूरत है.  बेहतर यही है कि लोग पुराना प्रोटोकॉल अपनाएं.”

क्या कोविड वैक्सीन बदली है?

Yale की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड वैक्सीन हर साल अपडेट हो रही है. ठीक वैसे ही जैसे फ्लू की वैक्सीन हर साल नए वेरिएंट्स के मुताबिक बदली जाती है.
• 2020-21: पहली बार mRNA वैक्सीन (फाइजर और मोडेर्ना) आई, जो मूल वुहान वायरस को टार्गेट करती थी.
• 2022: वैक्सीन को बाइवेलेंट रूप में अपडेट किया गया. मूल वायरस + ओमिक्रॉन BA.4/BA.5 वेरिएंट
• 2023: मोनोवेलेंट वैक्सीन आई. सिर्फ ओमिक्रॉन XBB के लिए.
• 2024-2025: लेटेस्ट वैक्सीन KP.2 वेरिएंट को ध्यान में रखकर तैयार की गई है.
येल यूनिवर्सिटी की संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. स्कॉट रॉबर्ट्स के अनुसार, हर नई वैक्सीन वायरस के बदले वेरिएंट से लड़ने के लिए डिजाइन की गई है. यह गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती और मौत को रोकने में कारगर है.

क्या नई वैक्सीन पुराने वैरिएंट्स पर भी असर करती है?

जी हां, वैक्सीन पूरी तरह संक्रमण को रोक नहीं सकती, लेकिन गंभीर लक्षणों और लॉन्ग कोविड के खतरे को काफी हद तक कम करती है. येल मेडिसिन के अनुसार, वैक्सीनेशन के बाद अगर संक्रमण होता भी है तो लक्षण हल्के होते हैं और रिकवरी तेज होती है.

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