सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के बाद तीन मुद्दों पर अपना अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया है। इन मुद्दों कोर्ट द्वारा वक्फ घोषित संपत्तियों को डिनोटिफाइ करना, वक्फ-बाय-यूजर या वक्फ बाय डीड शामिल है।
फैसला सुरक्षित रखने से पहले CJI बीआर गवई और जस्टिस अगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने लगातार तीन दिनों तक वक्फ कानून का विरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल, राजीव धवन, अभिषेक सिंघवी और सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनीं।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि वक्फ के दर्जे को लेकर एक बार जांच शुरू हो जाए तो रिपोर्ट आने तक वक्फ का दर्जा खत्म हो जाता है।
देश में 200 साल से भी पुराने बहुत से कब्रिस्तान हैं। 200 साल बाद सरकार कहेगी कि यह मेरी जमीन है और इस तरह कब्रिस्तान की जमीन छीनी जा सकती है?
इस पर CJI ने कहा, तो जमीन का रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं कराया गया। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा, उन्होंने (मुस्लिम समुदाय) रजिस्ट्रेशन इसलिए नहीं कराया क्योंकि यह राज्य की जिम्मेदारी थी, अब वे कहते हैं कि चूंकि उन्होंने पंजीकरण नहीं कराया, इसलिए यह समुदाय की गलती है। यदि आपके पास शक्ति है तो आप खुद की गलती का लाभ नहीं उठा सकते।
एक दिन पहले 21 मई (बुधवार) की सुनवाई में केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा था कि सरकारी जमीन पर किसी का कोई हक नहीं हो सकता, चाहे वो ‘वक्फ बाय यूजर’ के आधार पर ही क्यों न हो।
सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया था,
“वक्फ एक इस्लामी अवधारणा है, इस पर कोई विवाद नहीं है, लेकिन वक्फ इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। जब तक यह साबित न हो जाए, बाकी तर्क विफल हो जाते हैं।”
आज की सुनवाई की बड़ी बातें…
केंद्र ने क्या दलील दी…
• SG तुषार मेहता ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। मान लीजिए कि मैं जमीन बेचता हूं और पता चलता है कि जमीन की लेन-देन में ST समुदाय के व्यक्ति के साथ धोखा हुआ है। तो जमीन वापस दी जा सकती है लेकिन वक्फ कहता है कि दान दी गई जमीन को वापस नहीं लिया जा सकता।
• SG मेहता ने कहा JPC का कहना है कि अनुसूचित क्षेत्रों के ST समुदाय के लोग इस्लाम का उस तरह से पालन नहीं करते हैं, जितना बाकी जगह होता है क्योंकि उनकी एक अलग सांस्कृतिक पहचान है। इस पर जस्टिस मसीह ने कहा कि आप यह कैसे कह सकते हैं, इस्लाम धर्म हर जगह एक जैसा ही रहता है। हालांकि सांस्कृतिक प्रथाएं अलग-अलग हो सकती हैं।
याचिकाकर्ता ने क्या कहा…
• याचिकाकर्ता की तरफ से पेश दूसरे सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि, वही कानून कभी वक्फ को जमीन दे देता है कभी छीन लेता है। कानून भगवान नहीं बन सकता। कोई भी नियम या कानून वक्फ बॉय यूजर नहीं बनाता है, बल्कि इसे सिर्फ मान्यता देता है।
सुप्रीम कोर्ट में 5 याचिकाओं पर सुनवाई हो रही
वक्फ (संशोधन) कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट 5 मुख्य याचिकाओं पर ही सुनवाई कर रहा है। इसमें AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी की याचिका शामिल है। CJI बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच सुनवाई कर रही है। केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता और याचिकाकर्ताओं की तरफ से कपिल सिब्बल पैरवी कर रहे हैं।
पिछले दो दिनों की लगातार सुनवाई में क्या-क्या हुआ, पढ़िए-
20 मई: कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से कहा- राहत के लिए मजबूत दलीलें लाइए 20 की सुनवाई में बेंच ने कहा था कि मुस्लिम पक्ष को अंतरिम राहत पाने के लिए मामले को मजबूत और दलीलों को स्पष्ट करना चाहिए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कोई संपत्ति ASI (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के संरक्षण में है तो वह वक्फ संपत्ति नहीं हो सकती।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुल तीन मुद्दे हैं, जिन पर रोक लगाने की मांग की गई है और उस पर मैंने जवाब दाखिल कर दिया है। इन मुद्दों पर सुनवाई को सीमित किया जाए। याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सिर्फ तीन मुद्दे नहीं हैं। पूरे वक्फ पर अतिक्रमण का मुद्दा है। सरकार तय नहीं कर सकती कि कौन से मुद्दे उठाए जाएं।
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