लखनऊ, विशेष संवाददाता समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बीच ‘डीएनए को लेकर छिड़े वाक युद्ध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव को नसीहत दी है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कहा है कि यद्यपि समाजवादी पार्टी से किसी आदर्श आचरण की अपेक्षा करना व्यर्थ है, किंतु सभ्य समाज उनके अशोभनीय एवं अभद्र वक्तव्यों को सहन नहीं कर सकता। मुख्यमंत्री ने कहा है कि समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को चाहिए कि वे अपने सोशल मीडिया हैंडल्स की भली-भांति समीक्षा करें तथा यह सुनिश्चित करें कि वहां प्रयुक्त भाषा मर्यादित, संयमित और गरिमापूर्ण हो
इससे पहले ब्रजेश पाठक ने फिर लंबी पोस्ट लिखी। उन्होंने लिखा कि अखिलेश यादव जी, आप डीएनए के सवाल पर बहुत भड़के हुए हैं। मैंने ये कह क्या दिया कि सपा के डीएनए में खराबी है, आप आपे से उसी तरह बाहर हो गए जैसे 10 साल पहले सत्ता से बाहर हो गए थे। डीएनए में खराबी से हमारा मतलब किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि आपकी पार्टी की राजनीतिक सोच से है। इसका मतलब ये है कि आपकी पार्टी की राजनीति की बुनियाद ही जातिवाद और तुष्टीकरण पर टिकी रही है और आज भी टिकी हुई है।’
पाठक ने आगे लिखा कि मैं आपकी पार्टी के डीएनए में खराबी के मसले को खुलकर समझाता हूं। आपकी पार्टी का जन्म ही मुस्लिम तुष्टीकरण के डीएनए के साथ हुआ है। आपकी सरकारों ने वर्ग विशेष को खुश करने के लिए अन्य की अनदेखी की है। आपने तो बतौर मुख्यमंत्री अपने सिग्नेचर से आतंकियों से जुड़े 14 केस एक साथ वापिस लिए हैं ताकि मुस्लिम तुष्टीकरण वाले डीएनए को खाद पानी मिलता रहे।’
‘आपकी पार्टी का डीएनए तो दलित विरोधी भी रहा है। आपकी पार्टी सत्ता के लिए समाज को बांटने में यकीन रखती है। आपके ट्विटर हैंडल चलाने वाले इतने नादान है कि उसने आपके जरिये ये कुबूल करवा लिया कि जेपी, लोहिया और राजनारायण जैसे नेताओं के समाजवाद को गंदी, पतित और कलुषित गालियों में तब्दील कर देने वाले ये लोग आपके अपने ही हैं। आपने खुद लिखित रूप में ये कुबूल कर लिया है कि आप पार्टी स्तर पर उन लोगों को समझाएंगे। अब भी कोई शक, कोई संदेह बचा क्या कि आपकी पार्टी का डीएनए ही खराब है?’
पाठक ने लिखा, ‘अखिलेश जी, अगर आप बदल सकते हैं तो खुद को बदलिए, अपनी पार्टी के डीएनए को बदलिए वर्ना आपको पार्टी का यही डीएनए परेशान करता रहेगा। अभी तो मैं कह रहा हूं, फिर आम व्यक्ति की जुबां से आपकी पार्टी के इस डीएनए का जिक्र फूटेगा। किस किस को गालियां देते फिरेंगे? सो अपना चेहरा साफ कीजिए, आईने से मत झगड़िए।’ उन्होंने अंत में एक शेर लिखा ’उम्र भर गालिब यही भूल करता रहा, धूल चेहरे पे थी आइना साफ करता रहा।’
वहीं, अखिलेश ने पलटवार करते हुए लिखा…उर्दू की शायरी करके जो भाजपाई लोग अपने ही दल में जिसका अप्रत्यक्ष विरोध कर रहे हैं, उन्हें बुरा लग गया तो आप पर राजनीतिक बुलडोजर चलते देर नहीं लगेगी। उनकी सियासी सेहत के लिए एक सलाह, उप रहें, चुप रहें।
![]()