*26 जनवरी को सम्मानित इंजीनियर ने हडपे जनता के 7 करोड़* मध्य प्रदेश के उर्जा मंत्री से सम्मान पाने वाले इंजीनियर ने ‘, शासन को लगा दिया 7 करोड़ का चूना

ग्वालियर मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक इंजीनियर को ऊर्जा मंत्री ने 26 जनवरी को सम्मानित किया था, उसी इंजीनियर ने शासन को 7 करोड़ रुपए का चूना लगा दिया है।

शिवपुरी: जिले के पीडब्ल्यूडी विभाग में 7 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। इस मामले में ग्वालियर संभाग आयुक्त मनोज खत्री ने बड़ी कार्रवाई की है। लोक निर्माण विभाग खण्ड क्रमांक-1 कार्यपालन यंत्री धर्मेन्द्र सिंह यादव को निलंबित कर दिया है।
शिवपुरी पीडब्ल्यूडी क्रमांक-1 के ईई धर्मेंद्र यादव को बीते 26 जनवरी को शिवपुरी जिले के प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अच्छे कार्य के लिए सम्मानित किया था। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि जिन्होंने करोड़ों रुपए का घोटाला किया, जिन पर एफआईआर दर्ज हुई उन्हें 26 जनवरी पर किस आधार पर सम्मानित किया गया था। लोगों का कहना है कि इस सम्मान का प्रस्ताव भेजने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होना चाहिए।

दरअसल, 7 करोड़ 15 लाख 911 रुपए के गबन में धर्मेंद्र यादव की भूमिका सामने आई है। इस घोटाले के आरोपियों पर शिवपुरी में एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। यादव का मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय शिवपुरी रहेगा। निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

कलेक्टर ने कमिश्नर को भेजा था प्रतिवेदन

शिवपुरी कलेक्टर रविंद्र चौधरी ने जांच प्रतिवेदन संभागायुक्त को भेजा था। इस प्रतिवेदन में बताया कि कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग खण्ड क्रमांक 1 धर्मेन्द्र यादव ने वर्ष 2018-19 से 2022-23 तक 7 करोड़ 15 लाख 75 हजार 911 रुपए पांच खातों में हस्तांतरित किए। कार्यपालन यंत्री, संभागीय लेखाधिकारी, सहायक वर्ग 3 एवं आउटसोर्सिंग कंपनियों के ऑपरेटर के साथ चार अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आई।

7 करोड़ की राशि दूसरे खातों में ट्रांसफर की

डिप्टी कलेक्टर अनुपम शर्मा ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया है कि 7 करोड़ रुपए के गबन में आरोपी बनाए गए सभी आरोपियों ने साल 2018 से लेकर 2023 के बीच शासकीय खजाने को चपत लगाकर आर्थिक हानि पहुंचाई है। कार्यपालन यंत्रियों पर यह आरोप है कि उन्होंने अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन सही से नहीं किया और उनकी लापरवाही व संलिप्तता के कारण शासन को 7 करोड़ का नुकसान हुआ है।

News: शिवपुरी के पीडब्ल्यूडी विभाग में 7 करोड़ रुपये का वेतन घोटाला उजागर हुआ है. ट्रेजरी ऑफिसर और ट्रेजरी अकाउंटेंट ने 15 लोगों पर शहर के थाना कोतवाली में मुकदमा दर्ज करने के लिए शिकायत दर्ज कराई है. इस पर पुलिस ने संज्ञान लेकर सरकारी राशि का गबन करने का मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है. इस मामले में शिवपुरी जिले के वर्तमान पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री समेत 4 पूर्व कार्यपालन यंत्रियों को आरोपी बनाया गया है.

7 करोड़ रुपये का यह वेतन घोटाला 2018 से 2023 के बीच में अंजाम दिया गया था. अब इसकी एक-एक कर परतें खुलती जा रही है. बताया गया है कि आरोपियों ने पासवर्ड लीक कर इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया था, जिसका सनसनी खींच खुलासा आयुक्त कोष और लेखाकोष भोपाल ने हाल ही में किया है.

कौन-कौन आया कार्रवाई की जद में

 पुलिस में शिकायत के बाद इस पूरे घोटाले में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें वर्तमान में पदस्थ पीडब्ल्यूडी विभाग के मुख्य कार्यपालन यंत्री धर्मेंद्र यादव, इसके साथ पूर्व में कार्यपालन यंत्री के पद पर पदस्थ रहे चार कार्यपालन यंत्री जिनमें ओम हरि शर्मा. जीबी मिश्रा. बीएस गुर्जर और हरिओम अग्रवाल आरोपी बनाए गए हैं. गौरतलब है कि वर्तमान में पदस्थ धर्मेंद्र यादव को छोड़कर सभी मुख्य कार्यपालन यंत्री सेवानिवृत्त हो चुके हैं. 

संभागीय लेखा अधिकारी को भी बनाया आरोपी

 इस मामले में संभागीय लेखा अधिकारी सहित 15 लोगों पर गाज गिरी है. पुलिस ने इस मामले में संभागीय लेखा अधिकारी HK मीना, संजय शर्मा, वैभव गुप्ता और विभाग के बाबू दयाराम शिवहरे और प्रेमनारायण नामदेव के साथ आउटसोर्स कर्मचारी गौरव श्रीवास्तव, सौरभ श्रीवास्तव, शाहरुख खान और नसीम खान पर भी केस दर्ज किए हैं. वहीं, 7 करोड़ रुपये के इस वेतन घोटाले में धूलजी एवं सरिता देवी समाज सुधार समिति भी आरोपियों में शामिल हैं, जिन के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है.

2018 से 2023 के बीच हुआ था यह गड़बड़ झाला

2018 से 2023 के बीच इस वेतन घोटाले को अंजाम दिया गया था. बताया जाता है कि इस मामले की जांच कर रहे डिप्टी कलेक्टर अनुपम शर्मा ने जब एक-एक परत खोली तो मामला सामने आया. जांच में यह बात सामने आई है कि इस घोटाले को लॉगिन आईडी पासवर्ड लीक करके अंजाम दिया गया था. विभागीय जांच में सामने आया है कि मुख्य कार्यपालन यंत्रियों ने अपने आईडी और पासवर्ड गैर जिम्मेदार लोगों को दिए और इस वजह से इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया जा सका. देखते ही देखते सरकारी राशि का इतना बड़ा गबन को अंजाम दिया गया. इस घोटाले को आयुक्त कोष और लेखा कोष भोपाल ने उजागर किया है. 

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *