मोहम्मद यूनुस का म्यांमार प्लान, रखाइन में अराकान आर्मी से मिलाया हाथ, रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस भेजने की शुरू हुई तैयारी

ढाका: बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने पड़ोसी म्यांमार की अस्थिरता का फायदा उठाना शुरू कर दिया है। अंतरिम सरकार ने म्यांमार के विद्रोही गुट अराकान आर्मी से हाथ मिला लिया है। अराकान आर्मी को हाल के दिनों में तेजी से सफलता हासिल की है और इसने म्यांमार के रखाइन प्रांत पर लगभग कब्जा कर लिया है। इसके साथ ही इसका बांग्लादेश से लगने वाली सीमा पर भी नियंत्रण हो गया है। मोहम्मद यूनुस का प्रशासन इसका फायदा रोहिंग्या संकट का हल करने के लिए उठाना चाहता है।

रोहिंग्या मुद्दे पर मुख्य सलाहकार के उच्च प्रतिनिधि खलीलुर रहमान ने कहा कि देश की सीमा की रक्षा और रोहिंग्या प्रत्यावर्तन के लिए अराकान आर्मी के साथ संपर्क बनाए हुए है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘जिस दिन अराकान आर्मी ने हमारी सीमा पर अपना झंडा फहराया, मुझे तुरंत अहसास हुआ कि यह एक नई दुनिया है। आपको उनसे डील करना होगा।’

गृहयुद्ध की चपेट में म्यांमार

फरवरी 2021 में एक सैन्य तख्तापलट के बाद लोकतांत्रिक सरकार को हटाने के बाद से म्यांमार गृहयुद्ध की चपेट में है। नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट और दर्जनों जाती समूह सैन्य नेतृत्व वाले जुंटा शासन से लड़ रहे हैं। इसमें रखाइन प्रांत में अराकान आर्मी को बड़ी सफलता मिली है। रखाइन राज्य में स्वायत्तता की मांग करने वाली अराकान आर्मी का प्रांत के 90 प्रतिशत इलाके पर नियंत्रण है, जिसमें बांग्लादेश के साथ लगने वाली 271 किलोमीटर लंबी पूरी सीमा है। इसी रास्ते से दस लाख से ज्यादा रोहिंग्या रखाइन राज्य से भागकर बांग्लादेश चले गए हैं।

म्यांमार में बदल रहे समीकरण

रहमान ने आगे कहा, ‘एक नया पड़ोसी उभर रहा है और बांग्लादेश उनके साथ दोस्ताना व्यवहार करना चाहता है, न कि उन पर हावी होना चाहता है। यह भारत के साथ हमारी सीमा के अलावा एकमात्र जमीनी सीमा है। उनसे संपर्क करना हमारे राष्ट्रीय हित में भी है। हम विश्वास बनाने, भरोसा बनाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं और लंबे समय तक मैत्रीपूर्ण संबंधों की नींव रख सकते हैं।’

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