दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में से एक अमेरिका अब चीन की नई ताकत से बेचैन है। जमीन से लेकर आसमान तक, चीन की शक्ति में हो रहा इजाफा दुनियाभार में नई चुनौतियां खड़ी कर रहा है। हाल ही में अमेरिका के ब्रिगेडियर जनरल डग विकर्ट ने चीन की बढ़ती सैन्य ताकत को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि चीन के युद्धविमानों की संख्या और उनकी गुणवत्ता इतनी तेजी से बढ़ रही है कि आने वाले समय में यह अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है।
ब्रिगेडियर विकर्ट ने अपने बयान में बताया कि चीन की सेना, पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए), ने लड़ाकू विमानों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि की है। उन्होंने कहा कि 2027 तक चीन और अमेरिका के लड़ाकू विमानों का अनुपात 12:1 हो सकता है। विकर्ट ने इस स्थिति को अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बताया, खासकर पश्चिम प्रशांत महासागर में चीन की बढ़ती सैन्य तैनाती के संदर्भ में।
चीन के सैन्य दबदबे की यह रफ्तार सिर्फ लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। पीएलए ने समुद्री निगरानी के लिए 225 से अधिक बमवर्षक तैनात किए हैं। इसके अलावा, चीन ने हाल ही में अपना छठी पीढ़ी का युद्ध विमान ‘जे-36’ भी लॉन्च किया, जिसे दुनिया का सबसे उन्नत लड़ाकू विमान माना जा रहा है। इस विमान को रडार से बचने की क्षमता, टर्बोफैन इंजन और लंबी उड़ान क्षमता जैसी विशेषताओं से लैस किया गया है।
यह स्थिति भारत के लिए भी चिंताजनक हो सकती है। चीन की यह सैन्य ताकत केवल अमेरिका के लिए ही नहीं, बल्कि एशियाई देशों के लिए भी खतरा बन सकती है। चीन के साथ सीमा विवाद और आर्थिक प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा अपना देश अब चीन की इस बढ़ती ताकत से नई मुश्किलों में घिर सकता है।
अमेरिका इस चुनौती का सामना करने के लिए अपने अगली पीढ़ी के युद्ध विमान ‘B-21 राइडर’ और नई तकनीकों पर काम कर रहा है। लेकिन चीन के इस बढ़ते दबदबे से साफ है कि आने वाले सालों में वैश्विक राजनीति और सैन्य संतुलन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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