डोनाल्ड ट्रंप की शपथ के बाद क्वाड का चीन को सख्त संदेश, ड्रैगन का जवाब भी आया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शपथ के कुछ घंटों बाद ही क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की मीटिंग हुई। इस मीटिंग के बाद जो संयुक्त बयान जारी किया गया, वह चीन के लिए एक सख्त संदेश था। विदेश मंत्रियों के बयान में कहा गया कि कहीं भी यथास्थिति में कोई देश एकतरफा तौर पर बदलाव नहीं कर सकता और ऐसा किया गया तो स्वीकार नहीं किया। ऑस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका और भारत की सदस्यता वाले इस गुट का ट्रंप की शपथ के तुरंत बाद ऐसा बयान जारी करने के अपने मायने हैं। यह संदेश है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौर में चीन पर नरमी नहीं बरती जाएगी। खासतौर पर दक्षिण चीन सागर, ताइवान और जापान के साथ सीमा विवाद को लेकर सख्त रुख अपनाया जाएगा। चीन की विस्तारवादी नीतियों को लेकर ऑस्ट्र्लिया, अमेरिका, जापान और भारत समेत कई देश चिंतित रहे हैं।

यही नहीं चीन के विदेश मंत्री इवाया टाकेशी ने तो अपने बयान में साफ तौर पर साउथ और ईस्ट चाइना सी का जिक्र किया। संयुक्त बयान में कहा गया, ‘हम चार देश इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान किया जाए। आर्थिक अवसरों में समानता हो और शांति, स्थिरता एवं सुरक्षा के लिए प्रयास किए जाएं।’ भारत के लिहाज से क्वाड देशों की यह मीटिंग अमेरिका में होना अहम था। इसकी वजह रही कि एक तरफ विदेश मंत्री एस. जयशंकर शपथ समारोह में पहली ही कतार में दिखे तो वहीं क्वाड देशों की मीटिंग में चीन को निशाने पर रखा गया। इस तरह भारत का कद बढ़ता दिखा तो वहीं चीन के खिलाफ गोलबंदी भी मजबूत होती नजर आई।

दरअसल अमेरिका की ओर से साफ संकेत देने की कोशिश की गई है कि हम चीन की आक्रामकता से निपटने के लिए भारत और जापान जैसी शक्तियों को साथ लेकर चलेंगे। पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने पनामा नहर, टिकटॉक और टैक्स आदि को लेकर चीन को चेतावनी दी है। सालों से चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर की स्थिति बनी हुई है और डोनाल्ड ट्रंप की वापसी से इसमें इजाफा ही होने की उम्मीद है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तो साफ कहा कि क्वाड देशों की मीटिंग की टाइमिंग ही उसके महत्व को बताती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए क्वाड की जरूरत है।

इस बीच चीन की ओर से क्वाड के बयान पर जवाब भी आ गया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि साउथ चाइना सी को लेकर चीन का दावा पूरी तरह से सही और तार्किक है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। इसके अलावा उन्होंने क्वाड देशों की मीटिंग में चीन के जिक्र को भी गलत माना। बता दें कि पहले भी क्वाड देशों को लेकर चीन की आपत्ति रही है।

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