महाकुंभ में 5 फरवरी को ही स्नान क्यों करेंगे पीएम मोदी? जानें इसके पीछे की वजह

5 फरवरी का दिन माघ मास की गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि है जो धार्मिक दृष्टि से काफी शुभ और पवित्र माना जाता है. इस दिन तप, ध्यान और साधना करने के लिए विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और इस दिन को विशेष रूप से पूजा और अनुष्ठान के लिए माना गया है.

कुंभ मेला में स्नान करना न केवल शारीरिक शुद्धता के लिए महत्वपूर्ण होता है बल्कि ये आत्मिक शुद्धता और पुण्य की प्राप्ति के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है. माघ मास की अष्टमी तिथि पर कुंभ स्नान का विशेष महत्व होता है.

पीएम मोदी का इस दिन कुंभ स्नान के लिए आना बहुत ही खास है क्योंकि ये तिथि धार्मिक दृष्टि से बहुत ही अहम मानी जाती है. मोदी जी ने अपनी यात्रा के लिए इस दिन को चुना है जो कि उनके धार्मिक आस्था और कुंभ मेले के प्रति सम्मान को दर्शाता है.

माघ मास की अष्टमी तिथि के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है. इस दिन विशेष रूप से तर्पण, ध्यान और साधना का महत्व है. जिन लोगों ने पितरों के नाम से जल, तिल, अक्षत और फल-फूल अर्पित किए उनके पितरों की सद्गति होती है और स्वयं को मोक्ष प्राप्ति होती है.

पीएम का इस दिन कुंभ स्नान के लिए आना उनकी सोच और धार्मिक भावनाओं के प्रति सम्मान को दिखाता है. ये फैसला ये दिखाता है कि वे अपने सभी कामों में गहरी सोच और धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हैं जो उन्हें एक स्मार्ट पीएम के रूप में पहचान दिलाता है.

प्रधानमंत्री की इस यात्रा से न केवल धार्मिक महत्व बढ़ेगा बल्कि कुंभ मेले को सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से भी ज्यादा महत्व मिलेगा. उनकी ये यात्रा उत्तर भारत के लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनेगी और इसका प्रभाव दीर्घकालिक रूप से कुंभ मेले की प्रतिष्ठा पर पड़ेगा.

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