पिनाका, ब्रह्मोस, आकाश! दुनिया भारत से मांग रही जंग का साजो-सामान, लिस्ट में अमेरिका भी शामिल

हथियारों के निर्यात के मामले में भारत बीते दशकों के तमाम रिकॉर्ड ध्वस्त करने की ओर लगातार बढ़ रहा है. इसी साल अप्रैल के महीने में भारत ने फिलीपींस के साथ 375 मिलियन डॉलर की डील के तहत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की डिलीवरी दी थी. भारत के हथियारों के सबसे बड़े खरीददार के तौर पर आर्मेनिया लिस्ट में टॉप पर है.

रिपोर्ट के मुताबिक आर्मेनिया ने भारत को आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, पिनाका मल्टी लॉन्च रॉकेट सिस्टम और 155 एमएम की आर्टिलरी गन का बड़ा ऑर्डर दिया है. भारत के हथियारों के खरीददारों की टॉप थ्री लिस्ट में आर्मेनिया के साथ अमेरिका और फ्रांस भी शामिल हैं.

भारत के पास हथियारों की 2.6 बिलियन डॉलर की ऑर्डर बुक

अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया को भारत अपने हथियार निर्यात करने में अव्वल है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास सैन्य हथियारों के निर्यात के लिए 2.6 बिलियन डॉलर यानी करीब 21 हजार करोड़ का ऑर्डर हैं. भारत की सरकारी और निजी सेक्टर की कंपनियां करीब 100 देशों को अलग-अलग तरह के हथियार और उपकरण निर्यात कर रही हैं.

भारत के ‘ब्रह्मास्त्र’ से लेकर बख्तरबंद गाड़ियों तक की मांग

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को भारत का ब्रह्मास्त्र कहा जाता है. फिलीपींस समेत कई देश इस हथियार को पाने की लाइन में लगे हुए हैं. भारत की कोशिश है कि दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम, इंडोनेशिया और मिस्र समेंत कम से कम 10 देशों में इसके निर्यात को बढ़ावा मिले.

ब्रह्मोस मिसाइल से इतर भारत कई देशों को डोर्नियर-228 एयरक्राफ्ट, बुलेटप्रूफ जैकेट, नाइट विजन उपकरण, आर्टिलरी गन, रडार, आकाश मिसाइल,पिनाका रॉकेट और बख्तरबंद गाड़ियों का निर्यात कर रहा है. अमेरिका को भारत एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर के पंखों और अन्य हिस्सों का निर्यात करता है. वहीं, फ्रांस को भारत सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्यात करता है.

हथियारों के निर्यात में क्या है भारत का लक्ष्य?

2023-24 में भारत का सालाना डिफेंस प्रोडक्शन 1.2 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है. मोदी सरकार इसे बढ़ाकर 2028-29 तक 3 लाख करोड़ तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है. भारत में डिफेंस सेक्टर लगातार मजबूत हो रहा है. सरकारी डिफेंस कंपनियों के साथ ही भारत में निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनियां भी तेजी से बढ़ रही हैं. इन निजी क्षेत्रों की कंपनियों का निर्यात में 21 फीसदी हिस्सा है.

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