पूरे देश में नीट यूजी पेपर लीक को लेकर विवाद चल रहा है। छात्र और विपक्षी दल देश भर में प्रदर्शन कर रहे हैं। पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र ने अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए कठोर कानून लागू कर दिया है। नीट, यूजीसी-नेट परीक्षाओं को लेकर विवाद के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 अधिसूचित कर दिया, जिसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कदाचार और अनियमितताओं पर अंकुश लगाना है।
इस अधिनियम के तहत अपराधियों के लिए अधिकतम 10 साल की जेल की सजा और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लगभग चार महीने पहले अधिनियम को मंजूरी दी थी, जिसके बाद कार्मिक मंत्रालय ने शुक्रवार रात एक अधिसूचना जारी की, जिसमें कहा गया कि कानून के प्रावधान 21 जून से लागू हो जाएंगे। यूजीसी-नेट, 2024 परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने को लेकर जारी विवाद के बीच यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की जांच के लिए बृहस्पतिवार को मामला दर्ज किया था। विपक्षी दलों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया है, जिसके परिणाम एनटीए ने चार जून को घोषित किए थे। अधिसूचना में कहा गया है, “लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार 21 जून, 2024 को उक्त अधिनियम लागू करती है।”
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने 6 जुलाई से शुरू होने वाली नीट-यूजी काउंसलिंग प्रक्रिया को स्थगित करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया और कहा कि यह ऐसी प्रक्रिया नहीं है, जिसे जब चाहे शुरू एवं जब चाहे बंद कर दिया जाए। इसके साथ ही मुद्दे पर राजनीतिक विवाद जारी रहा। नीट और यूजीसी-नेट के संचालन में खामियों को लेकर आलोचना झेल रही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) रविवार को 1,563 अभ्यर्थियों के लिए मेडिकल प्रवेश परीक्षा दोबारा आयोजित करने की तैयारी कर रही हैं। इन अभ्यर्थियों को छह केंद्रों पर समय के नुकसान के चलते कृपांक प्रदान किए गए थे। इस बीच, कांग्रेस ने संबंधित परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन किए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
शिक्षा मंत्रालय के पैनल में इन 7 सदस्यों को मिली जगह
नीट यूजी मामले को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने जिस पैनल का गठन किया है उसमें इन 7 सदस्यों को जगह मिली है। ये समिति परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने, सुचारू और निष्पक्ष संचालन के लिए काम करेगी। यह समिति सरकार को 2 महीने में रिपोर्ट देगी।
1. डॉ. के. राधाकृष्णन (इसरो पूर्व अध्यक्ष और आईआईटी कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष) 2. डॉ. रणदीप गुलेरिया (एम्स दिल्ली के पूर्व निदेशक) 3. प्रो. बी जे राव (केंद्रीय विश्वविद्यालय हैदराबाद के कुलपति) 4. प्रो. राममूर्ति के (प्रोफेसर एमेरिटस, सिविल इंजीनियरिंग विभाग,आईआईटी मद्रास) 5. पंकज बंसल (सह-संस्थापक, पीपल स्ट्रॉन्ग और बोर्ड सदस्य- कर्मयोगी भारत) 6. प्रो. आदित्य मित्तल (डीन स्टूडेंट अफेयर्स, आईआईटी दिल्ली) 7. गोविंद जायसवाल (संयुक्त सचिव, शिक्षा मंत्रालय)
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