प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ ऐलान

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई है. राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार देने की मंजूरी दी है. हालांकि, उनके पास पहले से मौजूद मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी बनी रहेगी. यानी फिलहाल वह अपने मौजूदा कामकाज के साथ शिक्षा मंत्रालय का काम भी संभालेंगे.

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है. इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन लगातार चर्चा में था.
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 3 मई 2026 को हुई थी, जब NEET-UG परीक्षा के बाद पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आए. छात्रों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए. धीरे-धीरे यह मामला सोशल मीडिया से निकलकर बड़े छात्र आंदोलन में बदल गया. इसी बीच 15 मई को एक सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया. उन्होंने कुछ लोगों के लिए ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया था. बाद में उन्होंने साफ किया कि उनकी टिप्पणी आम युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि फर्जी डिग्री के सहारे पेशे में आने वाले लोगों के संदर्भ में थी.

सोनम वांगचुक के जुड़ने से बढ़ी चर्चा

28 जून 2026 को सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़े. उन्होंने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. उनका कहना था कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आनी चाहिए, पेपर लीक मामलों की जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए. लगातार अनशन के चलते उनकी तबीयत बिगड़ी. बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया. सरकार से बातचीत के बाद लिखित आश्वासन मिलने पर उन्होंने अपना अनशन खत्म कर दिया.
20 जुलाई 2026 को CJP ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रास्ते में रोक दिया. इस दौरान झड़प हुई और मामला फिर सुर्खियों में आ गया.इसके बाद विपक्ष ने भी NEET मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए. 22 जुलाई को राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया और जवाबदेही तय करने की मांग रखी.
आखिरकार 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया. इसके बाद राष्ट्रपति ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की मंजूरी दी. CJP ने भी इसके बाद अपना आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया.

प्रह्लाद जोशी के सामने क्या होंगी चुनौतियां?

अब प्रह्लाद जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का भरोसा बहाल करना है. परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने, धांधली रोकने और आंदोलनरत युवाओं को आश्वस्त करने का काम बेहद संवेदनशील है. देखना होगा कि वह इन उम्मीदों पर किस तरह खरे उतरते हैं.

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