ट्रंप ने भारत पर लगाया 10% और टैरिफ, पाकिस्तान-बांग्लादेश पर भी एक्शन

अमेरिका ने फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से जुड़े उत्पादों के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए भारत से आयात होने वाले सामान पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. यह फैसला अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने सेक्शन 301 के तहत की गई जांच के बाद लिया है. नई दरें शुक्रवार यानी आज से ही लागू होंगी.
USTR के मुताबिक, यह कार्रवाई उन देशों पर की जा रही है, जिन्होंने फोर्स्ड लेबर से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं या इस संबंध में नए नियम लागू किए हैं. भारत को 10 फीसदी वाले निचले टैरिफ स्लैब में रखा गया है, जबकि कुछ अन्य देशों पर 12.5 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद 60 व्यापारिक साझेदार देशों की समीक्षा की गई थी. शुरुआत में माना जा रहा था कि भारत पर 12.5 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है, लेकिन श्रम मानकों को लेकर दोनों देशों के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद भारत को 10 फीसदी वाले स्लैब में रखा गया.

वैश्विक सप्लाई चेन से फोर्स्ड लेबर को खत्म करने पर जोर

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि दशकों से सिर्फ अपील करने के बावजूद वैश्विक सप्लाई चेन से फोर्स्ड लेबर खत्म नहीं हो सकी है. उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय से जबरन श्रम से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लागू करता रहा है और अब वह चाहता है कि उसके व्यापारिक साझेदार भी इसी तरह के प्रभावी कदम उठाएं.

पाकिस्तान-बांग्लादेश पर भी 10% टैरिफ

भारत के अलावा अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, कनाडा, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास, इंडोनेशिया, जॉर्डन, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और ब्रिटेन को भी 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ वाले समूह में रखा गया है. वहीं, अन्य कई देशों पर 12.5 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा.

भारत ने फोर्स्ड लेबर से जुड़े उत्पादों की पहचान और निगरानी बढ़ाई

सूत्रों के मुताबिक, पहले 12.5 फीसदी टैरिफ की आशंका को देखते हुए भारत ने फोर्स्ड लेबर से जुड़े उत्पादों की पहचान और निगरानी के लिए दिशानिर्देश भी तैयार किए थे, ताकि अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके. हालांकि, स्टील, एल्युमिनियम जैसे उत्पाद, जिन पर पहले से अलग सेक्टोरल टैरिफ लागू हैं, इस नए फैसले से प्रभावित नहीं होंगे. कुछ ऊर्जा उत्पाद, उर्वरक और USMCA के तहत होने वाला व्यापार भी अतिरिक्त शुल्क से बाहर रखा गया है.

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