मुझे ढाई साल से सिर्फ असहयोग और उपेक्षा ही मिली…’, कैलाश विजयवर्गीय के कथित पत्र से MP की सियासत में हड़कंप; कांग्रेस हमलावर

मध्य प्रदेश में बीजेपी एक ‘लेटर’ विवाद में घिर गई. राज्य के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने यह कथित पत्र मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा है. इस पत्र के कुछ हिस्से वायरल हो गए, जिनमें ‘असहयोग और ‘उपेक्षा’ का जिक्र था. विपक्षी कांग्रेस ने दावा किया कि यह पत्र सत्ताधारी पार्टी के भीतर बढ़ते आंतरिक कलह का सबूत है.
एक न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया गया कि एक हिंदी दैनिक में छपी रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर विजयवर्गीय ने पत्रकारों से कहा, ”मुझे नहीं पता कि आपको इस पत्र के बारे में कहां से पता चला. आपको अखबार वालों से पूछना चाहिए कि यह कहां से आया और यह सच है या झूठ.”
राज्य कांग्रेस इकाई ने सोशल मीडिया पर हिंदी दैनिक में छपी एक रिपोर्ट की क्लिपिंग शेयर की, जिसमें कथित पत्र के कुछ हिस्से थे और सत्ताधारी बीजेपी पर निशाना साधा गया.

उनके नाम से जारी इस कथित पत्र में विजयवर्गीय ने आरोप लगाया है कि विकास कार्यों में उनके गृह जिले इंदौर की अनदेखी की गई है और पिछले ढाई वर्षों में उन्हें केवल असहयोग, उपेक्षा और विरोध का सामना करना पड़ा है.
उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि अगर शहर से जुड़े विकास के मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो वह सार्वजनिक मंच पर इंदौर के लोगों की आवाज उठाएंगे.

कैलाश ने मुख्यमंत्री को क्या-क्या लिखा?

रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री यादव को 20 जून को लिखे गए कथित पत्र में विजयवर्गीय ने इंदौर के मास्टर प्लान में देरी, उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में इंदौर के नाम को कमतर करने और अन्य विकास प्रोजेक्ट जैसे मुद्दे उठाए.
उन्होंने कथित तौर पर लिखा, “राज्य के मुखिया और मेरे गृह जिले के प्रभारी मंत्री के तौर पर मुझे आपसे सहयोग की उम्मीद थी. हालांकि, पिछले ढाई वर्षों में मुझे केवल असहयोग, उपेक्षा और विरोध ही मिला है.”
कथित पत्र में आगे कहा गया है, “मेरे विभाग में तबादले मेरी जानकारी के बिना किए जा रहे हैं. इंदौर के विकास को गति देने की बात तो दूर, उसे उसका उचित हक भी नहीं मिल रहा है. अगर इन मुद्दों का समाधान नहीं हुआ, तो मैं सार्वजनिक मंच पर इंदौर के लोगों की आवाज उठाने के लिए मजबूर हो जाऊंगा.”

‘गुरु गुड़ रह गए, चेले शक्कर बन गए’

बीजेपी के इस वरिष्ठ नेता के पास शहरी विकास और आवास तथा संसदीय कार्य विभाग का प्रभार है. विपक्षी कांग्रेस ने उस कथित चिट्ठी को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा और हिंदी की कहावत का जिक्र किया: “गुरु गुड़ रह गए, चेले शक्कर बन गए!”  
विरोधी पार्टी ने कहा, “आखिरकार मंत्री विजयवर्गीय को इंदौर के विकास की अनदेखी के बारे में मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखनी पड़ी. सत्ता और दबदबे की इस लड़ाई में जनता पिस रही है.”
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार और कांग्रेस के कई नेताओं ने इस कथित चिट्ठी को बीजेपी के अंदर गुटबाजी का सबूत बताया है. उन्होंने दावा किया कि राज्य की जनता बीजेपी नेताओं की आपसी लड़ाई का खामियाजा भुगत रही है.

जीतू पटवारी का तीखा हमला

एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि यह चिट्ठी बीजेपी सरकार के अंदरूनी कलह का ‘सार्वजनिक सबूत’ है और उन्होंने मुख्यमंत्री यादव से इस पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की अपील की.
पटवारी ने कहा, “अगर राज्य सरकार के सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में से एक कैलाश विजयवर्गीय को यह लिखना पड़े कि उन्हें पिछले दो सालों से सिर्फ असहयोग, उपेक्षा और विरोध का सामना करना पड़ा है, तो यह मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े करता है.”
उन्होंने कहा कि यह चिट्ठी सरकार के भीतर तालमेल की कमी को दिखाती है और आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री यादव का अपने मंत्रियों और प्रशासन पर कोई नियंत्रण नहीं है.
पटवारी ने कहा कि मंत्री द्वारा उठाए गए सवालों ने बीजेपी सरकार के विकास के दावों की सच्चाई उजागर कर दी है.
इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह दुखद घटना प्रशासनिक लापरवाही और सरकार की संवेदनहीनता का नतीजा थी.

कांग्रेस ने उठाए कुछ तीखे सवाल

पटवारी ने पूछा, “विजयवर्गीय न तो अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं और न ही सरकार की हर विफलता के लिए मुख्यमंत्री को दोष दे सकते हैं. आप इंदौर से जन-प्रतिनिधि हैं और वरिष्ठ मंत्री भी हैं. इंदौर की जनता के प्रति आपकी भी बराबर की जिम्मेदारी है. अगर सरकार में आपकी बात नहीं सुनी जा रही थी, तो आप पिछले दो सालों से चुप क्यों रहे?”
उन्होंने सवाल किया कि क्या विजयवर्गीय ने कैबिनेट की बैठकों में अपनी परेशानियां उठाई थीं? उनका इशारा था कि अगर उन्हें लगता था कि सरकार उन्हें नजरअंदाज कर रही है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए था.
उन्होंने आरोप लगाया, “यह चिट्ठी मुख्यमंत्री यादव के नेतृत्व को लेकर बीजेपी के भीतर बढ़ती नाराजगी और पनपते अंदरूनी कलह का सार्वजनिक सबूत है. सरकार के भीतर भरोसे का संकट और गहरा गया है.”

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