अखिलेश से हिसाब बराबर करने के लिए ‘ओवैसी मोड’ में आए इमरान मसूद! जानिए क्यों

उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस का गठबंधन है, 2024 में अखिलेश यादव और राहुल गांधी की केमिस्ट्री हिट रही थी. ऐसे में 2027 में सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ने का प्लान बनाया है, लेकिन सूबे की सियासत में ‘मुस्लिम वोटों का मसीहा’ कौन बनेगा, इसे लेकर शह-मात का खेल शुरू हो गया है.
पश्चिमी यूपी के कद्दावर नेता और सहारनपुर से कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने इन दिनों समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के खिलाफ उसी तरह से मोर्चा खोल रखा है, जैसे मुसलमानों के मुद्दे पर  AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी आक्रामक तेवर अख्तियार किए रहते हैं. 

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के 6 लोकसभा सांसद है, लेकिन सपा के खिलाफ आक्रामक रुख सिर्फ इमरान मसूद की अपना रखे हैं. सपा के समर्थन से इमरान मसूद 2024 में सांसद बने हैं. इसके बाद आखिर क्या वजह कि इमरान मसूद सपा के खिलाफ सख्त रुख और अखिलेश को मुस्लिम विरोधी कठघरे में खड़े करने में जुटे हैं? 

ओवैसी के नक्शेकदम पर इमरान मसूद

कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद इन दिनों असदुद्दीन ओवैसी की तरह ही अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. सपा के मुस्लिम विरोधी कठघरे में खड़े करने की कवायद में जुटे हैं. इसी मद्देनजर इमरान मसूद ने कहा कि यूपी में मुस्लिम के साथ हो रहे अन्याय पर उनकी (अखिलेश यादव) चुप्पी समझ से परे है. वे राम मंदिर की चंदा चोरी पर मुखर होकर बोलते हैं,लेकिन मुसलमानों पर हो रहे जल्म पर खामोश रहते हैं. 

अखिलेश यादव के कांग्रेस को गठबंधन धर्म का पालन करने की बात पर इमरान मसूद ने कहा कि मुझे समझ में नहीं आता, आप अपनी तैयारी करिए न, हम अपनी तैयारी कर रहे हैं. आप बहुत बड़े नेता हैं, आपके मुंह से यह बात अच्छी नहीं लगती. इमरान मसूद बार-बार सपा को निशाने पर पर ले रहे हैं और उनका तर्क रहा है कि सपा मुस्लिमों का वोट तो लेती है, लेकिन जब उन्हें प्रतिनिधित्व देने या उनके मुद्दों पर खुलकर बोलने की बात आती है तो अखिलेश यादव ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राह पकड़ लेते हैं. 
असदुद्दीन ओवैसी भी ठीक यही रणनीति अपना रहे हैं. वे उत्तर प्रदेश के हर मंच से नारा दे रहे हैं कि मुसलमानों, कब तक दरी बिछाओगे? अपना नेता खुद चुनो. ओवैसी सीधे अखिलेश यादव पर निशाना साधते हैं कि वे मुसलमानों के वोट को बंधुआ मजदूर की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं. ओवैसी के राह पर ही चल कर इमरान मसूद सपा को मुस्लिम मुद्दों पर घेरना शुरू कर दिया है. 

सपा के इतना खफा क्यों इमरान मसूद

इमरान मसूद आखिर सपा से इतना खफा क्यों है, जिसके चलते अखिलेश यादव के सियासी कठघरे में खड़े करने से जुटे हैं. अखिलेश यादव से नाराजगीकी वजह इमरान मसूद की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. वो यूपी के मुस्लिम नेता और चेहरा बनना चाहते हैं. इसीलिए मुसलमानों से जुड़े मुद्दों पर सख्त रुख अपना रखा है.

मुस्लिमों के मुद्दे पर अखिलेश और सपा की खामोशी से मुस्लिम समुदाय बेचैन है, जिसे इमरान मसूद उठाकर मुसलमानों के बीच अपनी सियासी पकड़ बनाना चाहते हैं. इस बहाने वो ये बताना चाहते हैं कि सपा का मुस्लिमों से कोई लेना-देना नहीं है, असल हमदर्द कांग्रेस है और वो हैं.  इमरान मसूद का सपा के खिलाफ मोर्चा खोलने का तरीका बेहद आक्रामक और जमीनी है. 
इमरान मसूद सीधे अखिलेश यादव की निर्णय क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं. वो खुलकर कह रहे हैं कि सपा ने मुस्लिमों को सिर्फ वोटबैंक समझा.ऐसे में अखिलेश यादव को ‘कमजोर और दिशाहीन’ नेता बताने में जुटे हैं ताकि मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी पकड़ को मजबूत कर सकें. 

अखिलेश से हिसाब बराबर करने का प्लान

इमरान मसूद अपने चाचा काजी रशीद मसूद की उंगली पकड़कर सियासत में आए. काजी रशीद मसूद सपा के दिग्गज नेता हुआ करते थे, लोकसभा के सांसद से लेकर केंद्र में मंत्री तक रहे. सपा ने काजी रशीद मसूद को उपराष्ट्रपति का चुनाव तक लड़वाया, लेकिन इमरान मसूद को सियासी तवज्जे कभी नहीं दी. मुलायम सिंह यादव से लेकर अखिलेश यादव तक ने सियासी अहमियत नहीं दी, जिसका दर्द इमरान मसूद के अंदर साफ है और वक्त बे वक्त झलकता भी है. 

इमरान मसूद ने राजनीति में कदम रखा और 2006 में सहारनपुर नगर पालिका के चेयरमैन बने.इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनाव में इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी से टिकट मांगा, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया. ये वही समय था, जब इमरान मसूद के चाचा काजी रशीद मसूद खुद सहारनपुर लोकसभा सीट से सपा के सांसद थे और उनकी सियासी तूती बोला करती थी.
सपा ने जगदीश राणा को टिकट दिया तो इमरान मसूद ने सपा से बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ गए. काजी परिवार का राजनीतिक रसूख इमरान के काम आया और उन्होंने सपा उम्मीदवार को हराकर विधायक बने.  इसके बाद काजी परिवार में सियासी वर्चस्व की जंग छिड़ गई. 2012 में काजी रशीद मसूद ने सपा छोड़कर कांग्रेस का शामिल हो गए तो इमरान मसूद साइकिल पर सवार हो गए, लेकिन 2014 के चुनाव में काजी रशीद मसूद फिर से घर वापसी करने से इमरान का गेम खराब हो गया. 

अखिलेश ने इमरान को किया दरकिनार

इमरान मसूद को सपा के टिकट पर सहारनपुर लोकसभा सीट चुनाव लड़ना चाहते, लेकिन चाचा रशीद मसूद ने अपने बेटे शाजान मसूद को उम्मीदवार बनवा दिया. सपा के टिकट न मिलने पर इमरान मसूद कांग्रेस में शामिल होकर सहारनपुर सीट से चुनावी मैदान में उतर गए. इसके बाद इमरान कांग्रेस में रहे और चुनाव मैदान में उतरते रहे, लेकिन 2022 के चुनाव से पहले इमरान मसूद ने कांग्रेस छोड़कर सपा का दामन थाम लिया.

इमरान से साथ एक कांग्रेस के विधायक भी शामिल हुए, लेकिन अखिलेश यादव ने न ही उन्हें टिकट दिया और न ही उनके साथ आने वाले मसूद अख्तर को प्रत्याशी बनाया.  मसूद कांग्रेस छोड़कर सपा में आए थे, तब उन्हें उम्मीद थी कि पश्चिमी यूपी में उनकी मर्जी चलेगी, लेकिन अखिलेश ने उन्हें तरजीह नहीं दी. इसके चलते 2022 के चुनाव के बाद इमरान ने सपा छोड़कर बसपा में शामिल हो गए, लेकिन बहुत नगर निगम चुनाव के बाद मायावती ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. 
बसपा से निकाले जाने के बाद इमरान मसूद ने कांग्रेस में घर वापसी की. 2024 के लोकसभा चुनाव से सपा-कांग्रेस का गठबंधन था. सहारनपुर सीट कांग्रेस को सपा नहीं देना चाह रही थी. अखिलेश यादव ने साफ कहा था कि इमरान मसूद के सिवा किसी दूसरे प्रत्याशी को चुनाव लड़ाते हैं तो सहारनपुर छोड़ देंगे, लेकिन कांग्रेस ने इमरान मसूद के नाम पर अड़ी रही. प्रियंका गांधी के दखल के बाद अखिलेश यादव राजी हुए और इमरान मसूद सांसद बनने के कामयाब रहे. 

सहारनपुर से सांसद बनने के बाद बदला तेवर

इमरान मसूद को दिल में आज भी 2022 में सपा से उम्मीदवार न बनाए जाने का दर्द है, जिसे लेकर समय-समय पर कहते रहते हैं. आजतक से बात करते हुए कहा था कि अखिलेश यादव ने उन्हें सियासी तौर पर अपमानित करने का काम किया है. यही वजह है कि अब सपा के खिलाफ इमरान मसूद ने सहारनपुर जिले में ही नहीं बल्कि अखिलेश की मुस्लिम सियासत पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. 

अखिलेश यादव और सपा समर्थक हमेशा ओवैसी को भाजपा की ‘बी-टीम’ या ‘वोटकटवा’ कहते आए हैं.  इमरान मसूद पर भी सपा यही आरोप लगा रही है कि वो अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी को फायदा पहुंचाते हैं. ऐसे में इमरान मसूद ने जमीन पर यह साबित करने की कोशिश की कि वे वोटकटवा नहीं, बल्कि मुसलमानों के स्वाभिमान की लड़ाई लड़ रहे हैं. 
इमरानमसूद के तीखे बयानों और सपा विरोधी रुख ने जमीन पर यह संदेश दिया कि मुस्लिम समाज अब सपा का एकतरफा बंधक नहीं है. सपा के खिलाफ इमरान ने मोर्चा खोलकर सियासी हलचल मचा दी है. इमरान मसूद का ओवैसी जैसा तेवर अपनाना अखिलेश यादव के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि यदि यूपी का मुस्लिम मतदाता सपा के इस विकल्प की ओर आकर्षित हुआ, तो सपा का सत्ता में वापसी का सपना बेहद मुश्किल हो जाएगी. 

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