सचिन पायलट पर गहलोत के आक्रामक तेवर के पीछे क्या शशिकांत शर्मा हैं?

राजस्थान कांग्रेस में जब भी लगता है की सब कुछ अब ठीक ठाक चल रहा है तो पूर्व सीएम अशोक गहलोत बैक गियर लगा देते हैं. जैसे ही सचिन पायलट को लेकर खबर आती है कि वो राजस्थान की सियासत में लौट सकते है, तो गहलोत बहाना ढूंढ ढूंढ कर सचिन पायलट पर बोलना शुरू कर देते है..
राजनीति में आने के बाद से पहली बार बिना किसी पद के 75 साल के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजनीतिक जीवन जयपुर में काट रहे हैं.  अशोक गहलोत ने रविवार की दोपहर मीडिया को बुलाकर बिना किसी के पूछे ही खुद ही् कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनने को लेकर सफाई दिया. 
गहलोत ने पहली बार दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से रोकने के लिए षडयंत्र पूर्वक अचानक से मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को ऑब्जर्वर बनाकर भेजा गया था. INDIA ब्लॉक की बैठक से ठीक पहले कांग्रेस हाईकमान पर इस हमले को भी गहलोत की पार्टी में पूछ नहीं होने से जोड़ कर देखा जा रहा है.

गहलोत ढाई साल बाद आक्रामक क्यों

पिछले एक महीने में अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर सरकार गिराने की साजिश करने और बीजेपी से मिले होने को लेकर तीसरी बार हमला बोला है. माना जा रहा है कि सोशल मीडिया पर सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की खबरें चलते देख अशोक गहलोत ने पायलट पर हमला तेज कर दिए हैं.
गहलोत को लगता है कि सचिन पायलट अगर प्रदेश अध्यक्ष बन जाते हैं तो मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो जाएंगे. जिस ढंग से राहुल गांधी केरल से लेकर कर्नाटक तक फैसले ले रहे हैं कहीं पायलट को लेकर कोई फैसला न ले लें. इसी बेचैनी में गहलोत आक्रामक तेवर अपना रखा है. 

अशोक गहलोत रविवार को कंस्टिट्यूशन क्लब के पार्लर में हेयर कट और दूसरे सर्विस लेने आए थे, जहां से फोन कर एजेंसी और कुछ रिपोर्टर को बुलाया गया कि अशोक गहलोत बयान देना चाहते हैं और फिर बीजेपी के  बहाने पायलट पर जमकर निशाना साधा.

राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर बढ़ा गुस्सा

कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में मौजूदा सांसद नीरज डांगी को फिर से रिपीट करने का फ़ैसला किया. सांसद डांगी पहले गहलोत के करीबी थे. लेकिन बाद में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के ख़ास हो गए और सचिन पायलट से उनकी नजदीकी बढ़ गई. 
गहलोत गुट ने नीरज डांगी की उम्मीदवारी का जमकर विरोध किया. यहां तक की राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने पर बधाई तक नहीं दिया. अगले दिन पर्यावरण पर बोलने के लिए मीडिया को घर पर बुलाया और फिर बिना पूछे शुरू हो गए कि सचिन पायलट बीजेपी के धर्मेंद्र प्रधान से मिलकर सरकार गिरा रहे थे और इसके बदले कांग्रेस विधायकों ने करोड़ों लिए थे जो अबतक लौटाए नहीं है.

पुष्कर प्रशिक्षण शिविर में अनदेखी से थे खफा

अभी एक जून को कांग्रेस के ज़िलाध्यक्षों का प्रशिक्षण शिविर में आए थे, लेकिन अशोक गहलोत पर्याप्त इज़्ज़त नहीं मिलने की वजह से किशनगढ़ एयरपोर्ट से वापस जयपुर आ गए. इसके बाद राहुल गांधी के साथ राजस्थान के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में हिस्सा नहीं लिया.

राहुल गांधी ने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (जूली) के बेहतरीन तालमेल और कामकाज की खुले मंच से तारीफ की थी. राहुल ने उनकी इस सियायी जुगलबंदी को पूरे देश के लिए एक मॉडल बताया था. इस जोड़ी की तारीफ से राज्य में पार्टी की एकजुटता मजबूत हुई है.

गहलोत के पीछे शशिकांत शर्मा का दिमाग

अशोक गहलोत दिल्ली में संगठन महासचिव बने तो अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दफ़्तर में उन्हें सहयोग के तौर पर शशिकांत शर्मा नाम के व्यक्ति को काम करने के लिए दिया गया था. शशिकांत शर्मा अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के बाद जयपुर बस गए और फिर मुख्यमंत्री निवास में सब ताकतवर व्यक्ति बन गए थे.
शशिकांत शर्मा की वजह से अशोक गहलोत के पुराने वफ़ादार छोड़ कर चले गए मगर शशिकांत शर्मा का रसूख़ बढ़ता गया। गहलोत मुख्यमंत्री के पद से हेट तो शशिकांत शर्मा गहलोत के लिए दिल्ली में काम करने लगे लेकिन कुछ एक महीने से लगातार जयपुर में दिखाई दे रहे हैं.   माना जा रहा है की अशोक गहलोत के आक्रामक तेवरों के पीछा शशिकांत शर्मा ही हैं. अशोक गहलोत जब अपने बाल कटवाने कॉंस्टिट्यूशन क्लब आए थे. उसी समय अचानक मीडिया को कॉंस्टिट्यूशन क्लब बुलाया गया कि अशोक गहलोत महत्वपूर्ण बात करना चाहते हैं. इस दौरान अशोक गहलोत के साथ शशिकांत शर्मा भी मौजूद थे. अशोक गहलोत के बयान के बाद भी जब मीडिया में गहलोत का बयान कहीं नहीं चल रहा था तो शशिकांत शर्मा ने ही फोन करके  सभी मीडिया हाउस को चलाने के लिए कहना शुरू किया.

गहलोत कैसे अकेले पड़ते जा रहे हैं?

हालांकि, रोज- रोज सचिन पायलट पर हमला करने को लेकर अशोक गलत ख़ुद ही राजस्थान कांग्रेस पार्टी में अकेले पड़ गए हैं. इस मसले पर कांग्रेस पार्टी को कोई भी विधायक या नेता अशोक गहलोत के साथ खड़े हुए दिखाई नहीं दे रहे हैं. पार्टी को मानना है की कांग्रेस संकट के समय में है और इस तरह से राहुल गांधी के मिशन को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए.

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