शर्तों की स्थिति साफ होने पर ही अमेरिका से बातचीत…’, इस्लामाबाद महा-वार्ता पर ईरान की दो टूक

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं. उनका विमान पाकिस्तान की धरती पर लैंड कर चुका है और अब सबकी नजरें इस ऐतिहासिक शांति वार्ता पर टिकी हैं. तय कार्यक्रम के मुताबिक, जेडी वेंस सबसे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात करेंगे. जिसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति डील को लेकर बातचीत का मुख्य दौर शुरू होगा. 
बतादें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस मुलाकात की अहमियत को दुनिया के सामने रखते हुए इसे ‘मेक-ऑर-ब्रेक’ (करो या मरो) वाली स्थिति बताया है. उनके मुताबिक, यह वार्ता स्थायी युद्धविराम की दिशा में आखिरी और सबसे बड़ा मौका है. पूरे मिडिल ईस्ट की शांति इस बैठक के नतीजों पर टिकी है. पाकिस्तान इस महावार्ता की मेजबानी कर रहा है और उसकी कोशिश है कि लंबे समय से चल रहे इस तनाव का कोई पक्का समाधान निकले.
वहीं, आगे की बातचीत को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने सस्पेंस बरकरार रखा है. उन्होंने पिछली अमेरिकी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे लोग 47 साल से सिर्फ बातें ही कर रहे थे. उन्होंने दो टूक लहजे में कहा कि कल की मीटिंग ही यह तय करेगी कि आगे क्या होगा. ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि यह आखिरी मुलाकात होगी या आगे भी दौर चलेगा, बस इतना कहा कि ‘हमें देखना होगा कि कल क्या नतीजा निकलता है.’

जेडी वेंस और अराघची करेंगे नेतृत्व, जानें कौन-कौन हो रहा शामिल?

इस्लामाबाद में हो रही इस ऐतिहासिक शांति वार्ता में ईरान की ओर से 6 बड़े चेहरे शामिल हो रहे हैं. इस टीम का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं, जिनके साथ ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलिबाफ भी मौजूद हैं. इनके अलावा, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था की कमान संभालने वाले अली अकबर अहमदीन और अब्दोलनासेर हेम्मती भी वार्ता की मेज पर बैठेंगे. इसके अलावा, अनुभवी राजनयिक मजीद तख्त रवांची और सुरक्षा मामलों के जानकार मोहम्मद बागेर जोल्घाद्र भी वार्ता का हिस्सा बन सकते हैं.
वहीं, अमेरिका की ओर से 4 बेहद प्रभावशाली हस्तियां इस बैठक के लिए पाकिस्तान पहुंची हैं. इस हाई-प्रोफाइल टीम की अगुवाई खुद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं. उनके साथ डोनाल्ड ट्रंप के भरोसेमंद और उनके दामाद जारेड कुशनर भी शामिल हैं, जो पहले भी कई अहम समझौतों का हिस्सा रह चुके हैं. पश्चिम एशिया के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सैन्य रणनीतिकार वाइस एडमिरल ब्रैड कूपर भी ईरान के साथ होने वाली इस चर्चा में अमेरिका का पक्ष रखेंगे.
चूंकि पाकिस्तान इस ऐतिहासिक शांति वार्ता की मेजबानी और मध्यस्थता कर रहा है, इसलिए देश के कई शीर्ष अधिकारी इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं. इस महाबैठक को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ खुद होस्ट कर रहे हैं, जिनके साथ थल सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की मौजूदगी सुरक्षा और रणनीतिक लिहाज से बेहद खास है. इसके अलावा, विदेश मंत्री इशाक डार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोहम्मद असीम मलिक भी वार्ता की मेज पर मौजूद रहेंगे, ताकि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को सफल बनाया जा सके.

इजरायल का साथ दिया तो डील नामुमकिन, ईरान ने अमेरिका को चेताया

इस्लामाबाद वार्ता से ठीक पहले ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने अमेरिका को बेहद सख्त और सीधा संदेश भेजा है. ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर वे अमेरिका फर्स्ट के प्रतिनिधियों से बात कर रहे हैं, तो एक ऐसी डील मुमकिन है जो दोनों देशों और दुनिया के लिए फायदेमंद हो. लेकिन, अगर अमेरिका इजरायल फर्स्ट की सोच के साथ मेज पर आता है, तो कोई समझौता नहीं होगा. ईरान ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में वे पहले से कहीं ज्यादा मजबूती के साथ अपनी रक्षा जारी रखेंगे, जिसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना होगा. 

पहले हमारी शर्तें मानो, तभी अमेरिका से होगी बात, ईरान की दोटूक

इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता के बीच पेंच फंसता नजर आ रहा है. ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ बातचीत का समय तभी तय होगा, जब उनकी पूर्व शर्तों पर स्थिति साफ हो जाएगी. मेहर न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी डेलिगेशन अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है. अब पूरी बातचीत इस बात पर टिक गई है कि क्या अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ईरान की इन शर्तों को स्वीकार करता है या नहीं.   

शहबाज शरीफ से मिलेगा ईरानी प्रतिनिधिमंडल

ईरान की वार्ता टीम ने कल रात पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की थी और आज यह प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मिलेगा. ये मुलाकात दोपहर 1 बजे एक निर्धारित है

एक दिन चल सकती है वार्ता

‘तस्नीम’ समाचार एजेंसी के मुताबिक, इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत कई दिनों तक चलने वाली खबरें गलत हैं. ताजा जानकारी के मुताबिक अगर बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ती है, तो ये वार्ताएं एक दिन की ही होंगी. 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नहीं चलेगी मनमानी, ट्रंप की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त लहजे में आगाह किया है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से किसी भी तरह का टैक्स या टोल वसूलने की कोशिश न करे. ट्रंप ने दो टूक कहा कि ‘यह अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र है और हम वहां ऐसा कुछ भी नहीं होने देंगे.’ उन्होंने साफ कर दिया कि अमेरिका इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा और वहां मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है.

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