भले ही पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में मध्यस्थता कर रहा है, इस्लामाबाद में 10 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच सुलह को लेकर बैठक होने वाली है. लेकिन इस समझौते के पीछे पाकिस्तान का अपना फायदा है, कंगाली में लगातार अमेरिका आर्थिक मदद कर रहा है, वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ से भी उधार दिला रहा है, फिर जो अमेरिका कहेगा उसे मानना पाकिस्तान मजबूरी ही नहीं, जरूरत भी है. वहीं ईरान से पाकिस्तान को लगातार कच्चा तेल मिल रहा है और वो भी उधारी पर. यानी अगर दोनों देशों के बीच सुलह हो जाती है, तो पाकिस्तान की दाल-रोटी चलती रहेगी.
इस बीच कुछ लोग भारत की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहे हैं, कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में पाकिस्तान से ज्यादा भारत की भूमिका होनी चाहिए थी. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत वैश्विक कूटनीति में पिछड़ रहा है? इस सवाल का जवाब एक सर्वे में सामने आया है, भारत अब वो देश नहीं है, जो पाकिस्तान की तरह अमेरिका से भीख मांगे. भारत आज विश्वशक्ति बनने की राह पर है, और ये बात अमेरिका समेत दुनिया जानती है.
सर्वे में भारत को लेकर बड़ा दावा
दरअसल ‘World of Statistics’ के एक ऑनलाइन सर्वे में सवाल पूछा गया कि ‘दुनिया की व्यवस्था (World Order) किसके हाथ में होनी चाहिए?’ इस सवाल पर दिलचस्प नतीजे सामने आए हैं. 19 हजार के अधिक लोगों ने वोट किए, जिसमें अमेरिका को सबसे ज्यादा 28.6% समर्थन मिला, जबकि चीन 27.2% और यूरोपियन यूनियन को 25.1% के साथ करीबी मुकाबले में रहे. इस सर्वे में अपनी दावेदारी से भारत ने सबको चौंकाया है, भारत को कुल 19% वोट मिले, जो कि भले ही अमेरिका और चीन से थोड़ा कम है, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश कहीं अधिक बड़ा है, भारत एक उभरती हुई वैश्विक ताकत के रूप में तेजी से अपनी जगह बना रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सर्वे सिर्फ लोकप्रियता का आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों का संकेत है. पिछले एक दशक में भारत ने जिस तरह अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, उसने उसे विश्व मंच पर एक भरोसेमंद और स्थिर शक्ति के रूप में स्थापित किया है. भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और जी-20 जैसे मंचों पर उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है.
भारत अब आर्थिक तौर पर मजबूत
भारत की ताकत सिर्फ आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है. डिजिटल इन्फ्रा, स्टार्टअप इकोसिस्टम, मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदमों ने उसे वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है. इसके साथ ही, भारत की विदेश नीति भी संतुलित और रणनीतिक रही है, चाहे वह अमेरिका के साथ साझेदारी हो या रूस और मध्य-पूर्व देशों के साथ संबंध. अमेरिका ने लगातार टैरिफ को लेकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन भारत ने कभी अपने हितों से समझौता नहीं किया.
पाकिस्तान की आर्थिक सेहत जगजाहिर
वहीं, इसलिए फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान मध्यस्थता की कोशिशों को लेकर चर्चा में है. लेकिन वैश्विक शक्ति संतुलन में भारत के मुकाबले अब पाकिस्तान कहीं नजर नहीं आता है. क्योंकि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में स्थायी ताकत बनने के लिए मजबूत आर्थिक आधार, तकनीकी क्षमता और वैश्विक भरोसा जरूरी होता है, जो फिलहाल भारत के पक्ष में अधिक दिखाई देता है, पाकिस्तान की चरमराई अर्थव्यवस्था दुनिया के सामने दिखती है.
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है. 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य, बढ़ती युवा आबादी और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी उसे एक नई ऊंचाई पर ले जा सकती है. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल गवर्नेंस जैसे वैश्विक मुद्दों पर भारत की सक्रिय भागीदारी उसे एक जिम्मेदार वैश्विक नेता के रूप में स्थापित कर रही है.
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