गाली-गलौज वाली पोस्ट में अल्लाह का जिक्र कर घिर गए ट्रंप, मुस्लिम उलेमा ने जमकर सुनाया!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईस्टर संडे के दिन भी ईरान पर अपनी उग्र टिप्पणियां जारी रखीं. उन्होंने ईरान पर मौखिक हमला करते हुए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जो चुभने वाले थे. इस पोस्ट के लिए ट्रंप की तीखी आलोचना हो रही है. 
हालांकि रिपब्लिकन राष्ट्रपति ट्रंप अपनी बड़बोले टिप्पणियों और खरी-खरी बातों के लिए पहले से ही जाने जाते हैं, लेकिन उनके ‘ट्रुथ सोशल’ नेटवर्क पर की गई इस पोस्ट ने लोगों को चौंका दिया. खासकर एक ईसाई त्योहार के मौके पर. 

ट्रंप ने क्या लिखा

इस पोस्ट में ट्रंप होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की मांग करते हुए तीखे-तीखे शब्द लिखे. इस पोस्ट में ईरान को धमकियां दी गईं और गालियों वाले शब्द इस्तेमाल किए गए. 
ट्रंप ने लिखा, “Open the F****n Strait, you crazy b******s, or you’ll be living in Hell– JUST WATCH!” 
इसके बाद ट्रंप ने लिखा- “Praise be to Allah

किस मुस्लिम संगठन ने की आलोचना
रॉयटर्स ने लिखा है कि अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस काउंसिल (CAIR) ने ट्रंप की भाषा की तीखी निंदा करते हुए एक बयान में कहा कि “इस्लाम का मजाक उड़ाना और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करने की उनकी धमकियां” लापरवाही भरी और खतरनाक थीं. 
CAIR ने कहा कि हिंसक धमकियों वाले इस पोस्ट में Praise be to Allah वाक्य का लापरवाही से इस्तेमाल करना, मजहबी भाषा को हथियार बनाने की इच्छा को दर्शाता है, और साथ ही मुसलमानों तथा उनकी मान्यताओं के प्रति तिरस्कार भी दिखाता है. 
इस संगठन ने अमेरिकी सांसदों से आग्रह किया कि वे चुपचाप बैठे न रहें, जबकि राष्ट्रपति “खुले तौर पर युद्ध अपराध करने का वादा कर रहे हैं,” संगठन ने कहा कि युद्ध और शांति के मामलों में अपने अधिकार को फिर से स्थापित करना कांग्रेस का कर्तव्य है.
संगठन ने कहा, “ये बयान यूं ही नहीं दिए गए हैं. ये मुस्लिम-विरोधी बयानबाजी और नीतियों के एक लंबे सिलसिले का हिस्सा हैं, जिन्होंने देश और विदेश में मुसलमानों को अमानवीय बना दिया है.”
अमेरिका में  भी तीखी प्रतिक्रिया
साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने कनेक्टिकट के डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने कहा कि  ट्रंप का रवैया “पूरी तरह से, एकदम बेलाग” था. 
क्रिस मर्फी ईरान में युद्ध का विरोध करते हैं. मर्फी ने कहा, “अगर मैं ट्रंप की कैबिनेट में होता, तो मैं ईस्टर का दिन संवैधानिक वकीलों को 25वें संशोधन के बारे में फोन करने में बिताता,” यह उस प्रावधान का ज़िक्र करते हुए कहा गया जिसके तहत अगर राष्ट्रपति अपना काम करने में असमर्थ हों, तो सत्ता हस्तांतरण का प्रावधान है. 
वर्जीनिया के सीनेटर टिम केन, जो भी एक डेमोक्रेट हैं, ने कहा कि यह पहली बार नहीं था कि 79 साल के ट्रंप ने फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला शुरू करने के बाद से इतनी तीखी भाषा का इस्तेमाल किया हो

केन ने NBC के ‘मीट द प्रेस’ कार्यक्रम में कहा, “उन्हें बमबारी करके पाषाण युग में वापस भेज देना, उन्हें गालियां देना.”
“यह सब शर्मनाक और बचकाना है; लोग यहां ऐसे दिखावा कर रहे हैं जैसे वे बहुत बड़े और मज़बूत हों, जबकि इस युद्ध में प्रशासन की तरफ से हमें असल में जो दिखाई दे रहा है, उसमें योजना का अभाव और किसी स्पष्ट तर्क की कमी दिखती है ”

कट्टर समर्थक रहीं सीनेटर ने सवाल पूछा 

पूर्व कांग्रेस सदस्य मार्जोरी टेलर ग्रीन जो कभी ट्रंप की कट्टर समर्थक थीं, लेकिन अब उनकी मुखर आलोचक हैं. उन्होंने उनके संदेश की कड़ी निंदा की, खासकर ईस्टर रविवार के मौके पर. 
ग्रीन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, “उनके प्रशासन में जो भी खुद को ईसाई होने का दावा करता है, उसे घुटनों के बल बैठकर भगवान से माफी मांगनी चाहिए, राष्ट्रपति की पूजा करनी बंद कर देना चाहिए और ट्रंप के इस पागलपन में दखल देना चाहिए.”
ग्रीन ने लिखा, “हमारे राष्ट्रपति ईसाई नहीं हैं, और उनके शब्दों और कार्यों का ईसाइयों द्वारा समर्थन नहीं किया जाना चाहिए.” ग्रीन विदेशों में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करती हैं. 

क्या कहेंगे अरब देश

इस जंग में ट्रंप को अरब के मुस्लिम देशों का सपोर्ट मिल रहा है, अब देखना होगा कि ट्रंप के इस पोस्ट में वे कैसी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. इसके अलावा इस पोस्ट पर पाकिस्तान का भी रुख देखना होगा. पाकिस्तान में इस हमले के शुरुआत में अमेरिका के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया हुई थी. इस दौरान प्रदर्शन में 30 से ज्यादा पाकिस्तानी मारे गए थे.  

पिछले दो दिनों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान को कई कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है. ट्रंप ने ईरान ने को कहा कि “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलो, वरना  दोजख झेलना पड़ेगा. ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान को चेतावनी दी कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला तो अमेरिका कड़े सैन्य हमले करेगा. ट्रंप ने उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के पावर प्लांट, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है. ट्रंप ने इसके इसके लिए पावर प्लांट डे और ब्रिज डे जैसे शब्दों का प्रयोग किया. ट्रंप ने ईरान को लगभग 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया कि या तो समझौता करे और होर्मुज खोले, नहीं तो सैन्य कार्रवाई तेज होगी. 

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