उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में गंगा एक्सप्रेसवे धंसने का मामला एक बार फिर सामने आया है. गंगा एक्सप्रेसवे पर लगातार हो रही बारिश के बाद कई फिट का गड्ढा हो गया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वहीं गड्ढे को छिपाने के लिए एक्सप्रेसवे पर तारकोल और सड़क के रंग का कपड़ा बिछा दिया गया है. गड्ढे के चलते मेरठ से प्रयागराज जाने वाली लेन बंद हो गई है. वहीं आनन-फानन रिपेयरिंग में कार्यदाई संस्था जुट गई है. बता दें कि 36 हजार करोड़ से अधिक लागत से बनाया गया है 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे. दही थानाक्षेत्र के बशीरत गंज गांव में किमी संख्या 423.6 के पास का मामला है.
5 दिन से रुक-रुककर बारिश हो रही है
प्राप्त जानकारी के मुताबिक उन्नाव में बसीरतगंज टोल प्लाजा के पास किलोमीटर-423.6 पर करीब 7 फीट गहरा गड्ढा हो गया. ये गड्ढा प्रयागराज की तरफ जाने वाली लेन पर रेस्ट एरिया के पास हुआ है. दरअसल, उन्नाव में लगातार 5 दिन से रुक-रुक कर बारिश हो रही है. इस मानसून सीजन में गंगा एक्सप्रेसवे दो बार धंस चुका है. इससे पहले 17 अगस्त को किलोमीटर संख्या 421 पर भी सड़क धंस गई थी.
14 दिन बार फिर धंसी सड़क
दही थाना क्षेत्र के सोनिक गांव के पास 200 मीचर तक सड़क के किनारे की मिट्टी बह गई थी, जिसके चलते सड़क बह गई थी. इसकी दो दिन तक मरम्मत चली. वहीं अब 14 दिन बाद दूसरी बार सड़क धंस गई. सोमवार की देर रात को बारिश के दौरान सोनिक के पास ही पहले वाली जगह से करीब ढाई किलोमीटर आगे बसीरतगंज टोल प्लाजा के पास सड़क धंस गई. इस बार करीब 7 फीट गहरा और 5 फीट चौड़ा गड्डा हुआ है. इस गहरे गड्ढे के चलते एक्सप्रेस-वे से गुजरने वाले वाहनों के लिए खतरा पैदा हो गया था.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी और महंगी परियोजना में सड़क का इस तरह धंसना गंभीर मामला है. यदि समय रहते क्षतिग्रस्त हिस्से की जानकारी सामने नहीं आती, तो तेज रफ्तार वाहनों के लिए यह बड़ा ख़तरा बन सकता था.
एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गति अधिक होने के कारण सड़क पर अचानक बने गड्ढे से हादसे की आशंका बनी रहती है.
फिलहाल कार्यदायी संस्था की ओर से क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराई जा रही है. सड़क किस वजह से धंसी, इसके पीछे मिट्टी के बैठने, जल निकासी अथवा निर्माण से जुड़ी कोई तकनीकी खामी है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा. मामले में जिम्मेदार विभाग और कार्यदायी संस्था की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतज़ार है.
गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े बुनियादी ढांचे पर सड़क धंसने की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों और तकनीकी जांच की कितनी सख्ती से निगरानी की गई थी. अब देखना होगा कि जांच में सड़क धंसने की असली वजह क्या सामने आती है और क्या जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होती है।.पीडा के एई प्रमोद भरती ने बताया कि जो गढ्ढा हुआ था, वह सही हो गया है.