अमेरिकी हमले के बाद पहली बार ईरानी राष्‍ट्रपति से म‍िले पीएम मोदी, खाड़ी में फिर शुरू हुए हमले, बढ़ा तनाव

बिश्‍केक: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की शिखर बैठक में हिस्‍सा लेने के लिए किर्गिस्तान पहुंचे पीएम मोदी ने ईरान के राष्‍ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ मुलाकात की है। इस दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्‍बास अराघची भी मौजूद थे। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार पीएम मोदी और ईरानी राष्‍ट्रपति के बीच मुलाकात हुई है। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब ईरान और अमेरिका के बीच फिर से जंग शुरू हो गई है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर जोरदार हमले किए हैं। माना जा रहा है कि इसमें होर्मुज नाकेबंदी, चाबहार पोर्ट और कार्गो जहाजों पर हो रहे हमले प्रमुखता से उठे हैं।

इससे पहले ईरानी राष्‍ट्रपति और पीएम मोदी के बीच अक्‍टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्‍स सम्‍मेलन में मुलाकात हुई थी। ईरान युद्ध होने के बाद पीएम मोदी और पेजेश्कियान के बीच अब तक कई बार बातचीत हो चुकी है। इस दौरान तनाव को घटाने, नागरिकों की रक्षा, होर्मुज स्‍ट्रेट में जहाजों की स्‍वतंत्र आवाजाही, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बातचीत हुई थी। पीएम मोदी और पेजेश्कियान के बीच बातचीत की अभी पूरी डिटेल सामने नहीं आई है।

ईरानी राष्‍ट्रपति ने अमेरिका को द‍िया संदेश

पीएम मोदी से मुलाकात से ठीक पहले ईरानी राष्‍ट्रपति ने अमेरिका को शांति का संदेश दिया है। अमेरिकी हमलों के बाद उन्‍होंने कहा कि ईरान जंग नहीं चाहता है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा से भारत को मध्य एशिया के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने का मौका मिलेगा। विशेषज्ञों ने रविवार को यह उम्मीद जताई। उन्होंने क्षेत्र के साथ संपर्क बेहतर करने और स्वास्थ्य देखभाल तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देने का आह्वान किया।मोदी 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए सोमवार और मंगलवार को बिश्केक में होंगे। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान इसके पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। बिश्केक स्थित स्वतंत्र अनुसंधान संस्थान ‘क्रॉसरोड्स सेंट्रल एशिया’ के सह-संस्थापक और कार्यकारी निदेशक शायरबेक जुराएव ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब मध्य एशिया पर लोगों का ज्यादा ध्यान है; क्षेत्र के देशों के आपसी संबंध बेहतर हो रहे हैं और बाहरी साझेदार परिवहन संपर्क और खनिज संसाधनों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।