बदनावर में जिस औद्योगिक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है, अब उसे सड़क का मजबूत आधार मिलने जा रहा है। प्रदेश के एकमात्र पीएम मेगा टेक्सटाइल पार्क, तेजी से विकसित हो रहे बदनावर के औद्योगिक क्षेत्र और नजदीकी पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को बेहतर बाजार और परिवहन नेटवर्क से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के रुप में उज्जैन-बदनावर-टिमरवानी फोरलेन सामने आ रहा है।
3839.42 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला ये मार्ग सिर्फ यात्रा का समय कम नहीं करेगा, बल्कि बदनावर के बदलते औद्योगिक भूगोल को भी नई दिशा दे सकता है। बदनावर-थांदला-टिमरवानी 80.45 किमी लंबा एनएच-752 डी कारिडोर उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के टिमरवानी इंटरचेंज से जोड़ेगा। इससे इंदौर, देवास और उज्जैन के साथ दिल्ली-एनसीआर तक माल और यात्री यातायात की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
बता दें कि केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 10 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की मौजूदगी में इसकी घोषणा की थी। फिलहाल परियोजना के लिए मुआवजा वितरण की प्रक्रिया चल रही है।
दिल्ली पहुंचने की दूरी नहीं, घटेगा सफर का समय
वर्तमान में इस मार्ग के कई हिस्सों में वाहनों की गति 20 से 50 किमी प्रति घंटा तक रहती है। फोरलेन बनने के बाद 80 से 100 किमी प्रति घंटा तक गति संभव होने का अनुमान है। इससे यात्रा समय में करीब एक घंटे की कमी आ सकती है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद दिल्ली-एनसीआर से उज्जैन और मालवा तक पहुंच आसान होगी। गुजरात और महाराष्ट्र से उज्जैन आने वाले वाहनों के लिए टिमरवानी-बदनावर-उज्जैन मार्ग महत्वपूर्ण संपर्क कड़ी बन सकता है। अप्रैल 2028 में होने वाले सिंहस्थ के दौरान बढ़ने वाले यातायात को संभालने में भी ये कारिडोर उपयोगी रहेगा।
42 अंडरपास से गांवों और खेतों का रास्ता रहेगा खुला
फोरलेन में स्थानीय लोगों की आवाजाही और सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है। 80.45 किमी लंबे मार्ग पर 42 अंडरपास बनाए जाएंगे। इनमें 9 व्हीकुलर अंडरपास (वीयूपी), 29 लाइट व्हीकुलर अंडरपास (एलवीयूपी) और 4 स्माल व्हीकुलर अंडरपास (एसवीयूपी) शामिल हैं।
वीयूपी से ट्रक, बस और बड़े वाहन गुजर सकेंगे। एलवीयूपी में कार, जीप, पिकअप और ट्रैक्टर जैसे हल्के वाहन निकल सकेंगे। एसवीयूपी मुख्य रुप से गांवों और खेतों को जोड़ने वाले रास्तों के लिए होंगे, जहां छोटे वाहन, दोपहिया और कृषि वाहन सुरक्षित रुप से आवागमन कर सकेंगे। इससे तेज रफ्तार फोरलेन पर स्थानीय लोगों को सड़क पार करने का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा।
छह बड़े और 34 छोटे पुल होंगे
परियोजना में छह प्रमुख पुल और 34 छोटे पुल प्रस्तावित हैं। मार्ग का निर्माण इस तरह किया जाएगा कि यातायात निर्बाध रहे और वर्षा सहित अन्य परिस्थितियों में आवागमन प्रभावित न हो। हाईवे निर्माण के साथ सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के मानकों पर भी जोर दिया जाएगा।
24 महीने में पूरा करने का लक्ष्य
परियोजना को हाइब्रिड एन्युइटी मोड पर विकसित किया जा रहा है। निर्माण अवधि 24 महीने निर्धारित है, जबकि कुल रियायत अवधि 17 वर्ष होगी। निर्माण के बाद करीब 15 वर्ष तक सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी भी इसी व्यवस्था में शामिल है।
उद्योगों से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक सीधा नेटवर्क
बदनावर क्षेत्र में औद्योगिकीकरण तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश का एकमात्र पीएम मेगा टेक्सटाइल पार्क यहां स्थापित होने से आने वाले वर्षों में औद्योगिक गतिविधियों और माल परिवहन का दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। वहीं इंदौर-पीथमपुर का स्थापित औद्योगिक क्षेत्र और देवास-उज्जैन की औद्योगिक गतिविधियां भी इस व्यापक सड़क नेटवर्क से जुड़ेंगी।
बेहतर सड़क से कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही तेज हो सकती है। लॉजिस्टिक्स लागत घटने के साथ उद्योगों को बड़े बाजारों तक पहुंचने में समय भी कम लगेगा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधा जुड़ाव इस नेटवर्क को और महत्वपूर्ण बनाएगा।
निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद है
परियोजना से प्रभावित भूमि के मुआवजे की प्रक्रिया जारी है। मुआवजा और भूमि संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के साथ निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद है। -सुरेश नागर, तहसीलदार, बदनावर