कावेरी मुद्दा, NEET और डिलिमिटेशन… अमित शाह के साथ मीटिंग में साउथ के CMs ने उठाए कई मुद्दे

तमिलनाडु में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद (Southern Zonal Council) की मीटिंग में डीलिमिटेशन, दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, NEET परीक्षा, कावेरी जल बंटवारे और राज्यों को ज्यादा वित्तीय स्वायत्तता देने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे. बैठक में दक्षिणी राज्यों ने नदी जल प्रबंधन, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, तटीय सुरक्षा, नशीले पदार्थों की तस्करी और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने डीलिमिटेशन के बाद दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम नहीं होने देने के लिए केंद्र से कानूनी गारंटी की मांग की. उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण, मानव विकास और आर्थिक विकास के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है. ऐसे में राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने की सफलता की सजा उन्हें संसद में कम प्रतिनिधित्व के रूप में नहीं मिलनी चाहिए.
विजय ने कहा कि 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों के आवंटन पर लगी रोक की अवधि समाप्त होने की ओर है. अगर भविष्य में जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होता है तो दक्षिणी राज्यों की संसद में सामूहिक आवाज कमजोर होने का खतरा है. उन्होंने केंद्र से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि किसी राज्य की संसदीय हिस्सेदारी के प्रतिशत में कमी न हो.

तमिलनाडु ने NEET से मांगी छूट

विजय ने तमिलनाडु को NEET से छूट देने की मांग भी दोहराई. उन्होंने प्रस्ताव दिया कि राज्य कोटे के तहत MBBS, BDS और AYUSH पाठ्यक्रमों में दाखिला 12वीं के अंकों के आधार पर किया जाए. उनका तर्क था कि NEET ग्रामीण और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को नुकसान पहुंचाती है.
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी परिसीमन को बैठक का प्रमुख मुद्दा बनाया. उन्होंने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से दक्षिण के संसदीय प्रतिनिधित्व की सुरक्षा के लिए औपचारिक प्रस्ताव पारित करने की मांग की. शिवकुमार ने अगले 25 वर्षों तक 1971 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाए रखने और लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या बरकरार रखने का सुझाव दिया.
शिवकुमार ने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या स्थिरीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को सफलतापूर्वक लागू किया है, इसलिए उनकी इस सफलता से उनकी राजनीतिक आवाज कमजोर नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि दक्षिण की आर्थिक ताकत के अनुरूप उसकी राजनीतिक आवाज भी होनी चाहिए. उन्होंने महिलाओं के लिए आरक्षण भी मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के भीतर लागू करने की वकालत की.

कर्नाटक ने मांगा टैक्स में ज्यादा हिस्सा

कर्नाटक ने केंद्र से अपना टैक्स शेयर 3.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत करने की मांग की. शिवकुमार के मुताबिक 15वें वित्त आयोग के तहत हिस्सेदारी घटने से राज्य को छह वर्षों में करीब 65 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. उन्होंने 5,495 करोड़ रुपये के विशेष अनुदान और 6,000 करोड़ रुपये के राज्य-विशिष्ट अनुदान जारी करने की मांग भी की.

कावेरी विवाद के बीच शिवकुमार ने मेकदातु बांध परियोजना के लिए तमिलनाडु से सहयोग मांगा. उन्होंने दावा किया कि परियोजना का पानी तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों के लिए भी फायदेमंद होगा.

मुल्लापेरियार पर केरल का प्रस्ताव

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा उठाया. केरल ने प्रस्ताव दिया कि अगर तमिलनाडु नए बांध के निर्माण पर सहमत होता है तो उससे तमिलनाडु को पूरा पानी सुनिश्चित किया जाएगा. केरल ने परियोजना का खर्च उठाने की पेशकश भी की.
केरल ने स्वास्थ्य योजनाओं के वित्तपोषण का मुद्दा भी उठाया. राज्य के मुताबिक पिछले पॉलिसी वर्ष में उसने आयुष्मान भारत PM-JAY से जुड़ी योजना पर करीब 1,493 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण से लगभग 151 करोड़ रुपये मिले. इसके अलावा केरल ने तटीय कटाव से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और तटीय सुरक्षा के लिए आपदा राहत एवं शमन कोष के इस्तेमाल की अनुमति मांगी.

नायडू बोले- 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है दक्षिण

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि दक्षिणी राज्य मिलकर भारत की GDP में करीब 31 प्रतिशत योगदान देते हैं और 2047 तक दक्षिण भारत में 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता है.
नायडू ने गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ो परियोजना के जरिए 500 TMC से ज्यादा पानी डायवर्ट करने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि इससे तमिलनाडु की पानी की जरूरत का दीर्घकालिक समाधान निकल सकता है. इसके लिए आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच समन्वय की जरूरत होगी. उन्होंने गंगा और कावेरी को जोड़ने की दीर्घकालिक राष्ट्रीय योजना पर भी जोर दिया.

इसके साथ नायडू ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को जोड़ने वाले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा. उन्होंने अमरावती, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाले इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट सिस्टम के साथ दक्षिणी राज्यों के लिए साझा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और ड्राई पोर्ट विकसित करने की भी वकालत की.
बैठक में तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने भी दक्षिणी राज्यों के बीच साझा प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय विकास के लिए बेहतर तालमेल पर जोर दिया. कुल मिलाकर बैठक में दक्षिणी राज्यों की ओर से यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि देश की अर्थव्यवस्था में उनके बड़े योगदान के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व, वित्तीय हिस्सेदारी, बुनियादी ढांचे में केंद्रीय सहयोग और राष्ट्रीय नीति निर्माण में उनकी भूमिका भी मजबूत होनी चाहिए.