क्‍या BJP ज्‍वाइन करेंगे कैलाश गहलोत? ये 3 कारण किस ओर कर रहे इशारा

दिल्‍ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने रविवार को अपने पद से इस्‍तीफा दिया तो हर कोई हैरान रह गया. दिल्‍ली सरकार में आतिशी के बाद नंबर-2 की हैसियत रखने वाले गहलोत इस तरह इस्‍तीफा देकर सरकार और आम आदमी पार्टी का साथ छोड़ देंगे, इसकी किसी को भी उम्‍मीद नहीं थी. ऐसे में अब यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर ऐसा क्‍या हुआ जो अचानक कैलाश गहलोत ने इतना बड़ा कदम उठा दिया. उन्‍होंने अपने पत्र में अरविंद केजरीवाल और पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए. ऐसे तीन कारण हैं जो यह संकेत देने हैं क‍ि कैलाश गहलोत आने वाले दिनों में बीजेपी ज्‍वाइन कर सकते हैं.

एलजी की पहली पसंद
जब पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल जेल में थे तब स्‍वतंत्रता दिवस परेड के दौरान झंडा कौन फहराएगा, इसे लेकर राजधानी में विवाद हो गया था. आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की तरफ से तब एलजी वीके सक्‍सेना को पत्र लिखकर आतिशी का नाम इस सरकारी काम के लिए सुझाया गया था. हालांकि केंद्र द्वारा नियुक्ति किए गए एलजी ने इस काम के लिए तत्‍कालीन सीएम केजरीवाल के सुझाव को नहीं बल्कि कैलाश गहलोत के नाम को चुना था. जिससे इस बात का संकेत मिलता है कि वो केंद्र सरकार और एलजी के प्रति सॉफ्ट रहे हैं.

बीजेपी के खिलाफ मुखर नहीं..
कैलाश गहलोत बीजेपी में जा सकते हैं, इसका एक कारण यह भी है कि वो उन्‍होंने कभी बीजेपी के खिलाफ कभी ज्‍यादा आक्रामक रुख अख्तियार नहीं किया है. अरविंद केजरीवाल जब जेल में थे, तब भी आतिशी से लेकर संजय सिंह व अन्‍य मंत्री केंद्र और बीजेपी के प्रति हमलावर रहे लेकिन कैलाश गहलोत के मुंह से इसपर कुछ भी नहीं निकला. जिससे यह संकेत मिलता है कि बीजेपी नेताओं से उनके अच्‍छे संबंध रहे हैं.

शराब घोटाला..
तीसरे और अहम कारण के रूप में दिल्‍ली का शराब घोटाला भी है. जब दिल्‍ली शराब नीति बनाई गई थी तब उस कोर टीम का हिस्‍सा कैलाश गहलोत भी थे. सीबीआई और ईडी ने अबतक उनके खिलाफ इस मामले में कोई एक्‍शन नहीं लिया है. हालांकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भविष्‍य में जांच एजेंसियां उन्‍हें अपने रडार पर ना लें. लंबे वक्‍त से बीजेपी के खिलाफ चुप्‍पी, इसी ओर इशारा करती है कि वो अपने खिलाफ किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से बचना चाहते हों.

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