झारखंड में स्वाइन फीवर की दस्तक! जांच के लिए कोलकाता भेजे सैंपल, आज खलारी जाएगी टीम

रांची के कांके स्थित राज्य सरकार के सूअर फार्म में लगभग दो दर्जन से अधिक सूअर की मौत हो चुकी है। वहीं खलारी के कई गांवों में भी दर्जनों सूअर मर चुके हैं। राज्य के अन्य जिलों में भी सूअरों के मरने की सूचनाएं हैं। इसके बाद राज्य में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के फैलने का खतरा प्रबल हो गया है। इसको देखते हुए सैंपल कलेक्ट कर जांच के लिए कोलकाता भेजा गया है।

पशुपालन निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि विभाग इसको लेकर गंभीर है। टीम गठित कर रोग नियंत्रण एवं जांच की कार्रवाई की जा रही है। पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान के निदेशक डॉ विपिन मोहंता ने बताया कि बीते दिनों में सूअर फार्म कांके में 24 सूअर की मौत हुई है।

पशु वैज्ञानिकों के अनुसार मरने वाले सूअरों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के लक्षण पाए गए हैं। सैंपल कलेक्ट कर जांच के लिए कोलकाता भेजा गया है। बीएयू के सीनियर साइंटिस्ट डॉ एमके गुप्ता ने व्यक्तिगत स्तर से सैंपल जांच के लिए भोपाल भी भेजे हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही पुष्टि हो सकेगी कि सूअर के मरने का कारण क्या है।

आज खलारी जाएगी टीम

जिला पशुपालन पदाधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि खलारी में सूअरों की मौत होने की सूचना के बाद टीम गठित की गयी है। गुरुवार को टीम खलारी जाकर सैंपल एकत्र करेगी और इन्हें जांच के लिए कोलकाता भेजा जाएगा। जांच के बाद ही कारणों का पता चलेगा।

संक्रामक वायरल बीमारी है अफ्रीकी स्वाइन फीवर

डॉ मोहंता ने बताया कि अफ्रीकी स्वाइन फीवर काफी संक्रामक वायरल बीमारी है। यह घरेलू-जंगली सूअरों को प्रभावित करती है। इसमें मृत्यु दर ज्यादा है। यह रक्तस्रावी रोग है और इसमें सूअर में बुखार के साथ-साथ उल्टी व दस्त जैसे लक्षण दिखते हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि अभी तक सूअर से आदमी में इसके फैलने के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। लेकिन लोगों को इसका मांस नहीं खाना चाहिए।

लंग, लिवर और किडनी का लिया गया सैंपल

डॉ मोहंता ने कहा की फार्म में काफी मात्रा में सूअरों की हुई मौत के बाद विशेषज्ञों की 5 सदस्यीय टीम ने जांच की है। टीम में वेटनरी कॉलेज के सीनियर साइंटिस्ट डॉ एमके गुप्ता के साथ डॉ नूपुर, डॉ कोयल, डॉ लतिका एवं डॉ संजय शामिल थे। मृत सूअरों के लंग, किडनी, लिवर व ब्लड सैंपल लिए गए हैं। इसे कोलकाता भेजा गया है। वहीं, फार्म में अभी सूअर नहीं मर रहे। उपचार के बाद बीमारी नियंत्रण में है।

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