मंदिरों में खुल गईं दुकानें, दफ्तर… अल्पसंख्यकों पर भारत को ज्ञान दे रहे PAK में ऐसे हैं हिंदुओं के हालात

* पाकिस्तान में हजारों लड़कियों का धर्मांतरण हर साल

* बंटवारे के समय 428 मंदिर थे, अब सिर्फ 20 ही बचे

* हफ्तेभर पहले ही कराची में मूर्तियां तोड़ी गईं हैं

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान ने सवाल उठाया तो भारत ने भी उसे बुरी तरह लताड़ दिया. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि पाकिस्तान में हिंदुओं, सिखों, बौद्ध, ईसाइयों और दूसरे अल्पसंख्यक धर्मों के लोगों का उत्पीड़न दुनिया ने देखा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत में सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश करने की बजाय अपने यहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए.

भारत का ये बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस बयान पर आया, जिसमें उन्होंने पैगंबर पर टिप्पणी का मुद्दा उठाया था. शरीफ ने ट्विटर पर लिखा कि मोदी के नेतृत्व में धार्मिक स्वतंत्रता को कुचला जा रहा है और मुसलमानों को प्रताड़ित किया जा रहा है. दुनिया को ये देखना चाहिए और भारत को लताड़ लगानी चाहिए.

लेकिन, अल्पसंख्यकों के मसले को लेकर जो पाकिस्तान आज भारत को नसीहत दे रहा है, उसे खुद अपने यहां के अल्पसंख्यकों पर ध्यान देने की जरूरत है. पाकिस्तान में लगातार मंदिरों को निशाना बनाया जा रहा है. हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां तोड़ी जाती हैं. ज्यादातर मंदिरों को अब दुकान और दफ्तरों में बदल दिया गया है. हर साल हजारों लड़कियों का जबरन धर्मांतरण कराया जाता है. पाकिस्तान को इस पर भी ध्यान देना चाहिए.

कराची में मंदिर में घुसकर मूर्तियां तोड़ी गईं

हाल ही में कराची में श्री माता मंदिर को निशाना बनाया गया है. कराची में स्थित श्री माता मंदिर में कुछ कट्टरपंथियों ने घुसकर देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ दिया. ये मंदिर कराची में कोरंगी थाना क्षेत्र में ‘जे’ इलाके में स्थित है.

पाकिस्तान में मंदिर पर हुए हमले पर भारत ने विरोध जताया है. वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है. पाकिस्तान ने वादा किया है कि जो लोग भी इस कृत्य में शामिल हैं, उनपर कानून के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी.

इस घटना के बाद से वहां हिंदू डरे हुए हैं. कोरंगी इलाके में पुलिस भी बढ़ा दी गई है. इलाके में रहने वाले स्थानीय हिंदू संजीव ने पाकिस्तान के एक अखबार को बताया कि 6 से 8 लोग मोटरसाइकिल पर आए और मंदिर पर हमला कर दिया. उन्होंने कहा कि हमें नहीं पता कि ये हमला किसने और क्यों किया है? कोरंगी के SHO फारूक संजरानी ने इस बात की पुष्टि की है कि कुछ लोग मंदिर में घुसे और तोड़फोड़ करने के बाद वहां से चले गए.

पाकिस्तान में मंदिरों को निशाना बनाया जाता रहा है. पिछले साल अक्टूबर में कोटरी में सिंधु नदी के तट पर स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर को भी कुछ लोगों ने अपवित्र कर दिया था.

बदतर हो रही अल्पसंख्यकों की हालत

पाकिस्तान में हिंदू हों, सिख हों या कोई और अल्पसंख्यक समुदाय…सभी की हालत दयनीय है. पिछले साल अप्रैल में सेंटर फॉर डेमोक्रेसी, प्लूरलिज्म एंड ह्यूमन राइट्स (CDPHR) की रिपोर्ट आई थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ ‘गैर-नागरिक’ जैसा सलूक किया जाता है. उनको न वहां आवाज उठाने का हक है और न ही कोई कानूनी अधिकार.

इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया था कि पाकिस्तान में कठोर ईशनिंदा कानून है, जिसका काम अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना है. कुरान को अपमानित करने या इस्लाम और पैगंबर को बदनाम करने की झूठी अफवाहें फैलाई जाती हैं. इसके बाद ईशनिंदा कानून से अल्पसंख्यकों को डराया जाता है और धर्मांतरण के लिए मजबूर किया जाता है.

वहीं, अमेरिका की 2021 की रिलिजियस फ्रीडम की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थित बदतर होती जा रही है. टारगेट किलिंग्स, ईशनिंदा के मामले, जबरन धर्मांतरण और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाने वाली बातें बढ़ गईं हैं.

हर साल हजार लड़कियों का जबरन धर्मांतरण

पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की लड़कियों का अपहरण किया जाना, उनके साथ बलात्कार करना, बाद में शादी करके जबरन उनका धर्म बदलवा देना, ये सब आम है. अमेरिका की रिलिजियस फ्रीडम की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यहां हर साल एक हजार से ज्यादा लड़कियों का जबरन शादी के बाद धर्मांतरण करवा दिया जाता है.

जबरन शादी और फिर जबरन धर्मांतरण की ये घटनाएं हिंदू और ईसाई लड़कियों में सबसे ज्यादा होती हैं. इन धर्मों की नाबालिग लड़कियों को पहले किडनैप किया जाता है, उनसे बलात्कार किया जाता है और बाद में उनकी उम्र से तीन-चार गुना बड़े व्यक्ति से शादी करवा दी जाती है और धर्मांतरण कर दिया जाता है.

अमेरिका की रिपोर्ट में ऐसी ही एक ईसाई लड़की का केस भी बताया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, 14 साल की मायरा शहबाज का बंदूक की नोक पर अपहरण किया गया था. वो ईसाई थी. उसने पुलिस को बताया था कि उसे ड्रग दिया गया था, उसके साथ बलात्कार किया गया और एक कागजात पर जबरन दस्तखत करवाए गए. उसे किडनैप करने वाले ने कहा कि वो 19 साल की थी और उसने अपनी मर्जी से शादी के बाद धर्म बदला है. कोर्ट ने मायरा को किडनैपर्स के पास जाने का आदेश दिया था.

बंटवारे के समय 428 मंदिर थे, 408 में दफ्तर-दुकान खुल गई

2014 में ऑल पाकिस्तान हिंदू राइट्स मूवमेंट ने एक सर्वे किया था. इस सर्वे में दावा किया गया था कि बंटवारे के समय पाकिस्तान में 428 मंदिर थे, लेकिन 1990 के दशक के बाद इनमें से 408 मंदिरों में खिलौने की दुकानें, रेस्टोरेंट, होटल्स, दफ्तर, सरकारी स्कूल या मदरसे खुल गए.

इस सर्वे में ये भी सामने आया था कि अल्पसंख्यकों की पूजा स्थल वाली 1.35 लाख एकड़ जमीन को पाकिस्तान सरकार ने इवैक्युई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड को लीज पर दे दिया. इस ट्रस्ट का काम है विस्थापितों की जमीन पर कब्जा करना. सर्वे में दावा किया गया था कि ये जमीन 40 लाख हिंदुओं की है.

सर्वे के मुताबिक, पाकिस्तान में काली बाड़ी मंदिर था, जिसे डेरा इस्माइल खान नाम के शख्स ने खरीद लिया और वहां ताज महल होटल बना दिया. इतना ही नहीं, डेरा इस्माइल खान ने ट्रस्ट की मदद से एक श्मशान घाट पर भी कब्जा कर लिया.

इसी तरह खैबर-पख्तूनख्वाह के बन्नू जिले में हिंदू मंदिर था, वहां अब मिठाई की दुकान है. कोहाट में शिव मंदिर था, जो अब सरकारी स्कूल में बदल गया है. पेशावर में एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को अब सरकारी गर्ल्स स्कूल बना दिया गया है. एबटाबाद में एक गुरुद्वारे में अब कपड़े की दुकान चलती है.

2019 में पाकिस्तान की सरकार ने भी 400 मंदिरों में तोड़फोड़ या कब्जा होने की बात मानी थी. सरकार ने वादा किया था कि 400 मंदिरों को दोबारा रिस्टोर किया जाएगा और उन पर फिर से हिंदुओं को हक दिया जाएगा.

पाकिस्तान में कितनी है अल्पसंख्यक आबादी?

बंटवारे के बाद 1951 में जब जनगणना हुई तो सामने आया कि पाकिस्तान में 97 लाख से ज्यादा हिंदू और साढ़े पांच लाख के आसपास ईसाई थे. उस समय सिखों की आबादी का आंकड़ा नहीं था.

पाकिस्तान में आखिरी बार 2017 में जनगणना हुई थी. इसके मुताबिक, यहां की आबादी 20.76 करोड़ है, जिसमें 20 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम हैं. करीब 36 लाख हिंदू हैं और उनमें से भी 95 फीसदी सिंध प्रांत में रहते हैं. 26 लाख ईसाई हैं.

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