ज्ञानवापी के 50% हिस्से का सर्वे:पहले दिन 4 तहखानों की वीडियोग्राफी हुई, दीवारों की बनावट भी देखी; कल ऊपर के कमरों का होगा सर्वे

वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में शनिवार को पहले दिन का सर्वे पूरा हो चुका है। सुबह 8 बजे शुरू हुआ सर्वे दोपहर 12 बजे तक यानी 4 घंटे चला। इस दौरान करीब 50% हिस्से का सर्वे हुआ। एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा के साथ वादी और प्रतिवादी पक्ष के 52 लोगों की टीम ने परिसर में 4 तहखानों के ताले खुलवाकर उसकी जांच की। टीम ने दीवारों की बनावट, खंभों की वीडियोग्राफी भी की। सर्वे का काम रविवार को फिर सुबह 8 बजे से होगा। कल ऊपर के कमरों का सर्वे होगा।

सर्वे के लिए परिसर के अंदर गई पूरी टीम के मोबाइल बाहर ही जमा करा लिए गए थे। टीम को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि सर्वे से जुड़ी कोई भी जानकारी बाहर नहीं आनी चाहिए। तहखानों की वीडियोग्राफी करके बाहर निकले फोटोग्राफर से जब मीडियाकर्मियों ने अंदर के बारे में पूछा तो उन्होंने कुछ भी बताने से साफ इंकार कर दिया।

500 मीटर तक पब्लिक-मीडिया सबकी एंट्री बंद
कोर्ट के सख्त आदेश को देखते हुए प्रशासन ने तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था की। ज्ञानवापी परिसर के चारों तरफ 500 मीटर तक पब्लिक और मीडिया की एंट्री बंद करा दी गई थी। सभी दुकानों को भी बंद करा दिया गया था। आसपास के घरों की छतों पर पुलिस जवान तैनात किए गए।

एक किलोमीटर के दायरे में करीब 1500 से ज्यादा पुलिस-पीएसी के जवान तैनात रहे हैं। खुद DM कौशलराज शर्मा और पुलिस कमिश्नर ए. सतीश गणेश पूरे सर्वे के दौरान मौके पर मौजूद रहे। कमिश्नर ने खुद परिसर के बाहर फोर्स के साथ पैदल मार्च किया।

शुरुआत में मुस्लिम पक्ष की ओर से तहखाने की चाबी नहीं देने की बात आई थी। लेकिन, पुलिस कमिश्नर ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की मौजूदगी में पूरे सद्भाव से सर्वे किया गया है।

वन विभाग की टीम मौजूद रही
ज्ञानवापी के सालों से बंद तहखानों में सर्वे करना था, इसलिए टीम बैटरी लाइट लेकर गई थी। इसके अलावा, ताला तोड़ने वाले, सफाईकर्मियों और वन विभाग की टीम को भी बुलाया गया था। सर्वे टीम को इस बात की आशंका थी कि तहखानों में जहरीले जीव मिल सकते हैं। सर्वे के दौरान ही एक तहखाने में सांप मिलने की चर्चा सामने आई। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई।

अंदर क्या मिला? किसी ने कुछ नहीं बताया
डीएम कौशल राज शर्मा ने कहा कि सर्वे के पहले दिन का काम शांतिपूर्वक सम्पन्न हुआ है। दोनों पक्षों ने पूरा सहयोग किया। कहीं किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई। ज्ञानवापी परिसर के 50% से ज्यादा हिस्से का सर्वे हुआ है। वहीं, परिसर की वीडियोग्राफी के लिए विशेष कैमरा और लाइट की व्यवस्था की गई। चप्पे-चप्पे की वीडियोग्राफी करवाई गई। लेकिन अंदर क्या मिला है? इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

DM ने हिंदू और मुस्लिम पक्ष के साथ की थी बैठक
सर्वे को लेकर वाराणसी DM कौशलराज शर्मा ने शुक्रवार को हिंदू और मुस्लिम, दोनों पक्षों के साथ बैठक की थी। उन्होंने सर्वे के दौरान दोनों पक्षों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। मुस्लिम पक्ष अंजुमन-ए-इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने कहा है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई फैसला नहीं आ जाता है, वह सर्वे में सहयोग करेंगे। दरअसल, कमेटी ने सर्वे रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की है, लेकिन चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने फाइल देखे बिना कोई फैसला देने से इनकार कर दिया था।

1991 से अब तक ज्ञानवापी का पूरा मामला समझिए…

आजादी से पहले से अब तक ज्ञानवापी पर विवाद कई बार सुर्खियों में रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि ज्ञानवापी परिसर काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर का हिस्सा है। इसको लेकर कई बार मुकदमे हुए। लेकिन वह किसी रिजल्ट तक नहीं पहुंचे हैं। 1991 में पहली बार यह विवाद राष्ट्रीय सुर्खियों में आया।
तब वाराणसी के पंडित सोमनाथ व्यास समेत 3 ने कोर्ट में केस दायर किया। इसमें इन्होंने ज्ञानवापी को काशी विश्वनाथ परिसर का ही हिस्सा होने की बात कही। याचिका में कोर्ट से अपील की गई थी कि ज्ञानवापी में दर्शन, पूजन और सनातनी धर्म के अन्य कार्यों को नियमित करने की अनुमति दी जाए।
इस मामले में कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सर्वे करने के आदेश दिए। हालांकि, वाराणसी कोर्ट के इस आदेश पर मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट पहुंच गया। हाईकोर्ट ने सर्वे पर स्टे लगा दिया। तब से यह केस फ्लोर में नहीं आया।
2021 में 5 महिलाओं ने ज्ञानवापी पर दाखिल की याचिका

दिल्ली की रहने वाली राखी सिंह और बनारस की रहने वाली लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक की ओर ने वाराणसी की सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में 18 अगस्त 2021 में एक याचिका दाखिल की।
इसमें कहा गया कि ज्ञानवापी परिसर में हिंदू देवी-देवताओं का स्थान है। ऐसे में ज्ञानवापी परिसर में मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही परिसर स्थित अन्य देवी-देवताओं की सुरक्षा के लिए सर्वे कराकर स्थिति स्पष्ट करने की बात भी याचिका में कही गई।
मां शृंगार गौरी का मंदिर ज्ञानवापी के पिछले हिस्से में है। 1992 से पहले यहां नियमित दर्शन-पूजन होता था। लेकिन, बाद में सुरक्षा व अन्य कारणों के बंद होता चला गया। अभी साल में एक दिन चैत्र नवरात्र पर शृंगार गौरी के दर्शन-पूजन की अनुमित होती है।

मुस्लिम पक्ष को शृंगार गौरी के दर्शन-पूजन में आपत्ति नहीं है। उनका विरोध पूरे परिसर का सर्वे और वीडियोग्राफी कराए जाने पर हैं। इसी बात का विरोध वाराणसी कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक कर रहे हैं।

कोर्ट ने इस याचिका पर सर्वे का आदेश दिया

5 महिलाओं की याचिका पर करीब आठ महीने तक सुनवाई और दलीलें चलतीं रहीं। 26 अप्रैल को कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर का सर्वे कराने का आदेश दिया। इसके लिए, कोर्ट ने ही एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किए। सर्वे टीम 6-7 मई को सर्वे के लिए पहुंची तो वहां हंगामा और विरोध हुआ।
इसके बाद दोनों पक्ष फिर कोर्ट गए। मुस्लिम पक्ष ने एडवोकेट कमिश्नर को बदलने की मांग की। हिंदू पक्ष ने तहखानों समेत पूरे परिसर की वीडियोग्राफी की मांग की। दोनों ने तीन दिन तक फिर से दोनों पक्षों को सुना। इसके बाद कोर्ट ने 12 मई को फाइनल फैसला सुनाया था।
12 मई को कोर्ट के आदेश की 5 बड़ी बातें

सर्वे के दौरान वादी, प्रतिवादी, एडवोकेट, एडवोकेट कमिश्नर, उनके सहायक और सिर्फ सर्वे से संबंधित लोग ही होंगे। ज्ञानवापी परिसर में और कोई नहीं होगा।
कमिश्नर कहीं भी फोटोग्राफी के लिए स्वतंत्र होंगे। चप्पे-चप्पे की वीडियोग्राफी की जाएगी।
जिला प्रशासन ताले को खुलवाकर या ताले को तुड़वाकर भी सर्वे कराएगा। DGP और चीफ सेक्रेटरी मॉनिटरिंग करें।
सर्वे पूरा कराने की जिम्मेदारी DM, पुलिस कमिश्नर की व्यक्तिगत तौर पर होगी।
जिला प्रशासन कोई भी बहाना बनाकर सर्वे की कार्रवाई को टालने का प्रयास नहीं करेगा।

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