मोदी विरोध में जारी कांग्रेस के एक लेटर ने देशभर के जिलाध्यक्षों को कर दिया परेशान, आप भी जानें पूरी कहानी

नई दिल्ली, । कांग्रेस की उल्टी चाल, शवदाह गृहों में खाने का इंतजाम! मोदी विरोध में कांग्रेस ने तो लगता है कि उल्टी चाल ही चलने की कसम खा ली है। ज्यादातर बयान बगैर सोचे समझे दे दिए जाते हैं तो अब आदेश भी उसी तर्ज पर दिए जाने लगे हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी हाल ही में एक ऐसा ही आदेश जारी किया। देश भर की प्रदेश कांग्रेस कमेटियों के नाम जारी इस आदेश में कोरोना काल के दौरान जरूरतमंदों की मदद करने की हिदायत दी गई है। इसके एक प्वाइंट में अस्पतालों और शवदाह गृहों में भी भोजन बांटने को कहा गया है। दिलचस्प यह कि एआइसीसी के इसी आदेश को दिल्ली कांग्रेस ने हुबहू अपने जिलाध्यक्षों को जारी कर दिया। अब जिलाध्यक्ष परेशान हैं कि संक्रमण के इस दौर अस्पतालों में जाएं कैसे और शवदाह गृहों में खाना खिलाएं किसे! पहले से दुखी लोगों को खाना देने में भी शर्म आती है।

कांग्रेसियों का आप प्रेम

इसे कांग्रेसियों का अपनी पार्टी के प्रति बढ़ता मोहभंग कहें या फिर आम आदमी पार्टी के प्रति उमड़ता प्रेम.. अब कांग्रेस में रहते हुए भी बहुत से नेता आप का गुणगान करने लगे हैं। ऐसे नेताओं की फेहरिस्त तो खैर लगातार लंबी हो ही रही है जो कांग्रेस का हाथ छोड़ आप की झाड़ू थाम रहे हैं। बहुत से नेता ऐसे भी हैं जो पार्टी छोड़े बगैर ही आप का साथ दे रहे हैं। ताजा उदाहरण सुभाष नगर ब्लाक कांग्रेस के अध्यक्ष संजीव भराडा का है। आप सांसद संजय ¨सह ने सुभाष नगर के पार्षद सुरेंद्र सेतिया द्वारा प्रयागराज में अंतिम संस्कार के लिए लकडि़यों की व्यवस्था करने पर ट्विटर के जरिये उनका आभार जताया तो कांग्रेसी ब्लाक अध्यक्ष ने आप नेताओं का यशोगान करते हुए इस ट्वीट को रीट्वीट करना शुरू कर दिया। कांग्रेसियों के बीच यह मसला खासी चर्चा का विषय बना हुआ है। खूब चुटकी भी ली जा रही है।

चर्चा का विषय बना मुख्यमंत्री का उदाहरण

वैक्सीन और वैक्सीनेशन पर चल रहे सियासी संग्राम के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एक उदाहरण खासी चर्चा में है। दरअसल, बुधवार को डिजिटल पत्रकार वार्ता में केजरीवाल ने वैक्सीन प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को वैक्सीन खरीदने की हिदायत पर वह यहां तक कह गए कि अगर पाकिस्तान भारत पर हमला कर दे, क्या तब भी केंद्र सरकार राज्यों से अपने अपने टैंक खरीदने को कहेगी! उन्होंने कहा कि कोरोना संकट देशव्यापी संकट है, केंद्र और राज्य अलग-अलग नहीं बल्कि एकजुट होकर ही इससे निपट सकते हैं। विपक्षियों ने मुख्यमंत्री के इस उदाहरण को भी उनके पाकिस्तान प्रेम से जोड़कर देखना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि पूर्व में भी केजरीवाल पाकिस्तान में हुई सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांग चुके हैं। अब फिर उन्होंने ऐसी बात की दी जो पाकिस्तान में भी चर्चा का विषय बन जाएगी।

वायु प्रदूषण नहीं हुआ लाक

दिल्ली-एनसीआर में कोरोना की दूसरी लहर थामने में लाकडाउन कितना प्रभावी रहा, यह तो बहस का विषय है। लेकिन वायु प्रदूषण को काबू करने में यह इस बार पूरी तरह नाकाम रहा है। लाकडाउन के दौरान जितने भी दिन हवा साफ रही है, वह मौसम की मेहरबानी से रही है। पर्यावरणविद भी इस सच्चाई से इन्कार नहीं कर रहे। उनका कहना है कि इस बार कहने को तो लाकडाउन है, लेकिन सख्ती के अभाव में इसका असर कहीं नजर आ रहा। सड़कों पर ट्रैफिक तक काफी देखने को मिल रहा है। सियासी दांव-पेच का आलम यह है कि पिछले साल पूर्ण लाकडाउन था, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा लगाया गया होने के कारण कई राज्य सरकारें उसे कोरोना की रोकथाम में अप्रभावी बता रही थीं जबकि इस बार आधे अधूरे लाकडाउन में भी इसे कोरोना संक्रमण पर काबू पाने का बड़ा आधार बताया जा रहा है। समय-समय की बात है।

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