743 मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट में खुलासा:MP में ब्लैक फंगस के 73% मरीज ऐसे जिन्हें बिना स्टेराॅयड दिए संक्रमण हुआ; 38% को कभी कोराेना हुआ ही नहीं

ब्लैक फंगस के संक्रमण को लेकर अब तक एक थ्योरी चल रही है- वो ये कि यह संक्रमण उन मरीजों को हो रहा है, जिन्हें कोरोना संक्रमण के इलाज के दौरान स्टेरॉयड या उसकी थैरेपी दी गई हो। लेकिन, ये आधा सच ही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश की म्युकरमायकोसिस (ब्लैक फंगस) एनालिसिस रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में इस संक्रमण के अब तक जितने भी मरीज भर्ती हुए हैं, उनमें से करीब 73% (72.67%) ऐसे हैं, जिन्हें कोरोना संक्रमण के दौरान स्टेरॉयड थैरेपी या ऐसे कोई इंजेक्शन दिए ही नहीं गए।

NHM ने यह रिपोर्ट ब्लैक फंगस के 743 संक्रमितों की मेडिकल रिपोर्ट की पड़ताल के आधार पर बनाई है। इसके मुताबिक 38% संक्रमित ऐसे हैं, जिन्हें कभी कोरोना हुआ ही नहीं। लेकिन, ब्लैक फंगस हो गया।

44% मरीज 45 से 60 साल की उम्र के
रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में ब्लैक फंगस के 44.27% संक्रमित 45 से 60 साल की उम्र के हैं। 36.60% की उम्र 18 से 44 साल और 18.84% मरीज 60 साल से ज्यादा उम्र के हैं।

डायबिटीज, कमजोर इम्युनिटी वालों पर खतरा ज्यादा
रिपोर्ट के मुताबिक, इन 743 में से 60% मरीज ऐसे हैं, जिन्हें डायबिटीज, कमजोर इम्युनिटी, को-मोर्बिलिटी की शिकायत थी। को-मोर्बिलिटी यानी ऐसे मरीज, जिन्हें कैंसर, किडनी, हार्ट डिसीज आदि हों। इन 743 में से 459 में डायबिटीज, 284 मरीज कमजोर इम्युनिटी वाले थे। मतलब साफ है कि इस तरह के मरीजों में ब्लैक फंगस का खतरा ज्यादा है।

सिर्फ 203 को ही स्टेरॉयड थैरेपी दी गई

27% यानी 203 मरीजों को ही स्टेरॉयड थैरेपी देने के बाद संक्रमण हुआ।540 मरीजों को किसी तरह की थैरेपी नहीं दी गई, फिर भी संक्रमित हुए।75% मरीज ऐसे हैं, जिन्हें कोविड संक्रमण के इलाज के दौरान ऑक्सीजन नहीं लगी।183 मरीज ऐसे हैं, जिन्हें ब्लड में ऑक्सीजन लेवल कम होने पर O2 सपोर्ट दिया।

मई में तेजी से फैला
मई में यह सबसे तेजी से फैला। पड़ताल में यह बात नहीं आई कि स्टेरॉयड, ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखने के दौरान हुए क्लीनिकल मिसमैनेजमेंट के कारण ही यह संक्रमण फैला।

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