MP में ताऊ ते का असर:भोपाल व ग्वालियर में गरज-चमक के साथ बारिश; सतना, सागर, दतिया, होशंगाबाद में लाखों क्विंटल गेहूं खरीदी केंद्रों पर भीगा टूटा 62 साल का रिकार्ड

ग्वालियर

ग्वालियर। टाक्टे तूफान गुजरात में कमजोर पड़कर कम दवाब के क्षेत्र में अागे बढ़ गया है। यह राजस्थान पहुंच गया है। इसके असर से शहर का मौसम भी बदल गया। सुबह से शहर में झमाझम बारिश हो रही है। सड़कों पर जल भराव हो गया। रुक-रुक हो रही बारिश से मौसम में ठंडक अा गई। मानसून सीजन में बरसते हैं, वैसी बारिश कर रहे हैं। दो दिन से जारी बारिश की वजह से 62 साल का रिकार्ड टूट सकता है। सन 1959 में मई के 31 दिन में 59.5 मिली मीटर बारिश हुई थी। मई के 31 दिन में होने वाली बारिश अाल टाइम रिकार्ड 1959 का था। इस साल मई के 19 दिनों में 60.2 मिमी बारिश हो चुकी है। बुधवार को 65 साल का रिकार्ड टूट गया। 2021 की मई भी रिकार्ड बारिश के लिए दर्ज हो गई।

टाक्टे तूफान कम दवाब के क्षेत्र में बदलकर उत्तर पूर्व की ओर बढ़ रहा है। इस सिस्टम को पर्याप्त नमी मिल रही है। जिससे राजस्थान, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के हिस्सों में अच्छी बारिश हो रही है। बीती रात से ही काली घटाएं छाई हुई थी। सुबह 6 बजे लोग वाक के लिए निकले तो झमाझम बारिश हो गई और लोगों ने भीगते हुए घूमने का अानंद लिया। मौसम में ठंडक रही। पंखे की हवा भी राहत दे रही थी। 15 मिली मीटर पानी बरस गया। न्यूनत तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुअा।

टाक्टे के बाद अब बंगाल की खाड़ी में कम दवाब का क्षेत्र विकसित हो रहा है। यह 23 मई के अासपास यह तूफान का रूप लेकर अागे बढ़ेगा। उड़ीसा तट से टकराता हुए झारंखंड की ओर बढ़ने के अासार हैं। यदि इस तूफान की दिशा झारखंड की ओर रहती है तो ग्वालियर-चंबल संभाग में फिर से बारिश के अासार बनेंगे।

– नौ तपा में जो भीषण गर्मी रहती है, उसका अहसास नहीं होगा। पश्चिमी विक्षोभ भी अा रहा है। बंगाल की खाड़ी में भी सक्रिय हो गई है। इससे बारिश व अांधी का दौर जारी रहेगा।

मध्यप्रदेश में भी तूफान ताऊ ते का असर दिख रहा है। ग्वालियर में दिनभर बादलों का डेरा रहा। तेज हवाएं चली। देरशाम में गरज-चमक के साथ बारिश को दौर शुरू हुआ। वहीं दूसरी ओर खरीदी केंद्रों पर खुले में रखा लाखों क्विंटल गेहूं भीग गया। सतना, सागर, दतिया, होशंगाबाद, गुना समेत कई जगहों पर खुले में खरीदी केंद्राें पर रखा लाखों क्विंटल गेहूं भीग गया। अकेले विंध्य के दो जिले सतना और रीवा में 120 करोड़ रुपए के गेहूं को नुकसान पहुंचा है। तीन दिन से प्रदेश के कई हिस्साें में रुक-रुक कर हो रही बारिश से खेतों में प्याज को भी नुकसान पहुंचा है। प्याज भीगने के कारण खराब होने लगी है।

किसानों की मेहनत पर पानी अफसरों की लापरवाही से फिरा है। गेहूं खरीदी के बाद केंद्रों से नागरिक आपूर्ति निगम के अफसरों ने गेहूं का उठवाया ही नहीं। परिवहन की व्यवस्था न होने के कारण गेहूं भीगा है, जबकि एक सप्ताह से सबको पता था कि तूफान की वजह से बारिश होने वाली है। इसके बाद भी अफसर सोए रहे।

सतना में भारी नुकसान के बाद टूटी नींद
सतना जिले के खरीदी केेंद्रोंं पर हजारों क्विंटल गेहूं भीगा है। किसान संगठनों के अनुमान के मुताबिक यह नुकसान 120 करोड़ का है। लगातार बारिश में भीग रहे गेहूं के बाद प्रशासन की नींद मंगलवार को टूटी। कलेक्टर अजय कटेसरिया ने अध्यक्षता करते हुए सभी एसडीएम, नान और संबंधित विभाग के ​अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि सबसे पहले बारिश के कारण खरीदा गया गेहूं सुरक्षित रखा जाए।

रीवा में इंतजार करते रहे किसान, गेहूं नहीं उठाया
यही हाल रीवा का भी है। यहां पर 15 दिन तक किसान खरीदी केंद्रों के बाहर गेहूं बेचने के लिए खड़ रहे। लेकिन उठाव नहीं होने के कारण गेहूं नहीं खरीदा गया। इसकी वजह से गेहूं भीग गया। यहां पर 30 करोड़ रुपए का नुकसान बताया जा रहा है।

दतिया: 3 दिन से खरीदी उठाव के लिए बंद फिर भी 2 लाख क्विंटल भीगा
खराब मौसम को देखते हुए दतिया के केंद्रों पर खरीदी बंद कर दी गई। इसकी वजह से टॉलियों की लंबी लाइन लग गई। लेकिन इसके बाद भी पहले से खरीदा गया गेहूं का उठावा नहीं किया गया। बारिश में 2 लाख क्विंटल गेहूं भीग गया। वहीं किसानों को अपना गेहूं बचाने के लिए परेशान होना पड़ा।

होशंगाबाद: 26 हजार क्विंटल से ज्यादा गेहूं खुले में रखा है
रविवार से हो रही बारिश के कारण कृषि मंडी में खुले में रखा अनाज भीग गया। जिले के 69 हजार 135 किसानों से 7 लाख 69 हजार 108 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी हुई। अभी 7 लाख 42 हजार 380 मीट्रिक टन गेहूं का ही परिवहन हुआ है। अभी 26 हजार 728 मीट्रिक टन गेहूं का परिवहन बाकी है।

सागर: खरीदी केंद्रों से नहीं हुआ उठाव
ताऊ ते चक्रवाती तूफान के असर से सागर जिले में वैशाख के माह में आषाढ़ की तरह बारिश हुई। मूसलाधार बारिश से पूरा जिला तरबतर हुआ। सोमवार शाम से शुरू हुई बारिश रुक-रुक कर मंगलवार सुबह तक जारी रही, लेकिन यहां भी गेहूं का उठाव नहीं हुआ। खरीदी केंद्रों पर कीचड़ हो गया है। गेहूं भीग गया है।

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