ICMR की नई गाइडलाइन:प्लाज्मा थैरेपी कोरोना मरीजों पर कारगर नहीं, नेशनल टास्क फोर्स ने इसे क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल से हटाया

कोरोना मरीजों को दी जा रही प्लाज्मा थैरेपी को क्लिनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल से हटा दिया गया है। AIIMS और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की नेशनल टास्क फोर्स और हेल्थ मिनिस्ट्री की जॉइंट मॉनिटरिंग ग्रुप ने शनिवार को इसका ऐलान करते हुए रिवाइज्ड क्लिनिकल गाइडेंस जारी की है।

ICMR ने माना कि दुनियाभर में मरीजों के इलाज के आंकड़े प्लाज्मा थैरेपी के कारगर होने को साबित नहीं करते। खास बात यह है कि सितंबर 2020 में ICMR ने अपनी स्टडी में कहा था कि प्लाज्मा थैरेपी कोरोना के इलाज में मददगार नहीं है। इसके बावजूद, उन्हें इसे भारत के क्लिनिकल प्रोटोकॉल से हटाने का फैसला लेने में 8 महीने लग गए।

पहले से हो रहा था विरोध

देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के साथ प्लाज्मा डोनर की मांग में भी तेजी आई है। यहां तक ​​​​कि एक्सपर्ट्स भी कोरोना मरीजों के लिए प्लाज्मा थैरेपी की इफेक्टिवनेस पर चिंता जताते रहे हैं। पहले भी मेडिकल प्रोफेशनल्स ने प्लाज्मा थैरेपी को अप्रचलित करार दिया था।

क्या है प्लाज्मा थैरेपी?
कॉन्वल्सेंट प्लाज्मा थैरेपी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें इन्फेक्शन से रिकवर हुए व्यक्ति के शरीर से खून लिया जाता है। खून का पीला तरल हिस्सा निकाला जाता है। इसे इन्फेक्टेड मरीज के शरीर में चढ़ाया जाता है। थ्योरी कहती है कि जिस व्यक्ति ने इन्फेक्शन से मुकाबला किया है उसके शरीर में एंटीबॉडी बने होंगे। यह एंटीबॉडी खून के साथ जाकर इन्फेक्टेड व्यक्ति के इम्यून सिस्टम को मजबूती देंगे। इससे इन्फेक्टेड व्यक्ति के गंभीर लक्षण कमजोर होते हैं और मरीज की जान बच जाती है।

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