नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने के आरोपित प्रशांत पाराशर ने खुद को बताया राहुल गांधी समर्थक

इंदौर, जेएनएन। नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति के मामले में भोपाल से गिरफ्तार किए गए प्रशांत पाराशर के तार कांग्रेस से जुड़ रहे हैं। मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस द्वारा 30 अप्रैल को कोरोना पीड़ितों की मदद के लिए बनाई गई प्रदेश स्तरीय समिति में पाराशर को भोपाल संभाग का समन्वयक बनाया गया था। युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डा.विक्रांत भूरिया ने प्रशांत की नियुक्ति का आदेश जारी किया था। इससे 15 दिन पहले युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने ट्वीट कर प्रशांत को थैंक्यू कहा था। आरोपित प्रशांत ने फेसबुक पर अपना परिचय राहुल गांधी समर्थक के रूप में दिया है। नकली इंजेक्शन बेचने के आरोप में फंसने के बाद कांग्रेस उसे पदाधिकारी नहीं, बल्कि सामान्य कार्यकर्ता बताकर पल्ला झाड़ रही है।

मध्य प्रदेश के सागर जिले में बीना के रहने वाले प्रशांत पाराशर पर आरोप है कि उसने नकली इंजेक्शन के दलाल सुनील मिश्रा से 66 इंजेक्शन खरीदे थे। बाद में इनमें से ज्यादातर इंजेक्शनों को मुनाफा कमाकर ज्यादा दाम पर बेच दिया। प्रशांत का नाम नकली इंजेक्शन के मामले में सामने आने के बाद प्रदेश में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति भी गर्मा गई है।

श्रीनिवास ने प्रशांत को थैंक्यू कहते हुए किया था ट्वीट 

आरोप लग रहे हैं कि युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी से करीबी संपर्क होने के कारण ही प्रशांत को प्रदेश कमेटी में समन्वयक बनाया गया था। इसके सुबूत के तौर पर श्रीनिवास द्वारा किया ट्वीट और आरोपित द्वारा अपनी फेसबुक वाल पर डाली गई तमाम पोस्ट का हवाला दिया जा रहा है। दरअसल, 14 अप्रैल को श्रीनिवास ने प्रशांत को थैंक्यू कहते हुए ट्वीट किया था। इसके बाद 30 अप्रैल को उसे प्रदेश युवा कांग्रेस द्वारा बनाई गई प्रदेश स्तरीय समिति में समन्वयक बनाने का आदेश जारी कर दिया गया। तीन मई को युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डा.विक्रांत भूरिया भी प्रशांत को ट्विटर पर फालो करने लगे। प्रशांत की फेसबुक प्रोफाइल में उसने खुद को कांग्रेस आइटी सेल के पूर्व समन्वयक के साथ पूर्व उपाध्यक्ष प्रदेश युवा कांग्रेस भी लिखा है।

काम के चलते हुई थी नियुक्ति

डा.विक्रांत भूरिया ने कहा कि बीते वर्ष कोरोना काल में भी प्रशांत ने सेवा के कई कार्य किए थे। अपने स्तर पर कोरोना की दूसरी लहर के दौर में भी वह लोगों की मदद कर रहा था। पता चला था कि अपने स्तर पर उसने कई लोगों को आक्सीजन और इंजेक्शन उपलब्ध कराए। उसके सेवा कार्यो को देखते हुए उसे कमेटी में रखा गया। वह मौजूदा समय में किसी पद पर नहीं है सिर्फ एक सामान्य कार्यकर्ता है। जहां तक मुझे जानकारी लगी है कि वह नकली इंजेक्शन का सप्लायर नहीं है बल्कि उसे भी ठगों ने नकली इंजेक्शन बेच दिए। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। नकली इंजेक्शन के सौदागर पनपे ही इसलिए, क्योंकि सरकार न तो इंजेक्शन उपलब्ध करवा पा रही है और न ही आक्सीजन।

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