कोरोना कर्फ्यू की निगरानी:शहर में 876 कैमरे, बड़ी स्क्रीन को देखने के लिए 24 घंटे कर्मचारी तैनात फिर भी कंटेनमेंट जोन और बाजार की निगरानी नहीं

कोरोना कर्फ्यू का पालन कराने के लिए शहर के मुख्य मार्गों और बाजारों सहित कंटेनमेंट जोन में 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं और शहर में लगे 876 कैमरे शोपीस बने हुए हैं। पुलिस कंट्रोल रूम और स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर पर लगी बड़ी स्क्रीन से इन कैमरों के जरिए शहर की सीधी निगरानी की जा सकती है, लेकिन कंट्रोल रूम में तैनात स्टाफ नियम तोड़ने वालों के ई-चालान तक नहीं बना रहा है।

बड़ी वारदात होने पर भी इन कैमरों की मदद कम ही मिल पाती है। ट्रैफिक नियम ताेड़ने पर चालान मैदानी अमला ही बनाता है। उधर स्मार्ट सिटी का आईटीएमएस (इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) भी बंद है। दरअसल, पिछले साल कंटेनमेंट जोन और बाजारों की निगरानी कैमरों के जरिए कराई गई थी। इसका फायदा भी मिला था। कई कंटेनमेंट जोन में तो पुलिसकर्मियों को तैनात करने की ही जरूरत नहीं पड़ी थी।

सर्विलांस स्टाफ का इस्तेमाल हो तो नियम टूटने से रोके जा सकेंगे

पुलिस कंट्रोल रूम: शहर में पुलिस के 576 सीसीटीवी कैमरे 125 पॉइंट पर लगे हैं। कंट्रोल रूम के सर्विलांस रूम में बड़ी स्क्रीन पर पूरा शहर इन कैमरों के जरिये दिखता है। यहां से उन इलाकों पर निगरानी की जा सकती है, जहां संक्रमित अधिक हैं। यहां से बिना मास्क के निकलने वाले, सोशल डिस्टेंसिंग तोड़ने वाले या दुकान खोलने वालों के फोटो खींचकर ई-चालान की कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा जहां भीड़ लगे, वहां की जानकारी तत्काल संबंधित थाने को दी जा सकती है, लेकिन इसे लेकर कोई प्लानिंग नहीं की गई है।
सर्विलांस रूम में स्टाफ तो है, लेकिन इस तरह कार्रवाई नहीं की जा रही है। जबकि अभी आसानी से निगरानी की जा सकती है, क्योंकि सड़कों पर ट्रैफिक बहुत कम है।
10 चौराहों पर आईटीएमएस: शहर के 26 पॉइंट पर 300 कैमरों के साथ आईटीएमएस शुरू हो चुका है। यहां यातायात नियम तोड़ने वाले वाहनों को सिस्टम खुद पहचान कर ई-चालान जनरेट करता है। शहर में दिन रात लोग बेवजह बाहर निकल रहे हैं, सिग्नल तोड़ रहे हैं। लेकिन ई-चालान बंद होने से लोग बिना डरे घूम रहे हैं।

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