कोरोना काल में जूडा का सेवाकाल:जूनियर डॉक्टरों ने एक महीने में की 15 हजार लोगों की मदद, 127 के लिए प्लाज्मा की भी व्यवस्था की

प्रदेश के मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने अस्पताल में मरीजों की सेवा करने के साथ ही उनके परिजनों की भी मदद के लिए नई व्यवस्था की। अप्रैल में जब बेड, दवा, ऑक्सीजन को लेकर लोग परेशान थे, तब जूनियर डॉक्टरों ने हेल्पलाइन शुरू कर उनकी मदद की। 19 अप्रैल से शुरू इस हेल्पलाइन के माध्यम से 15 हजार से ज्यादा लोगों की मदद कर चुके हैं।

इसमें मरीज के लिए पोर्टल पर देखकर अस्पताल में बेड खाली होने की जानकारी देना, रेमडेसिविर जैसी दवा को लेकर भ्रम दूर करना, अस्पताल में आने वाले परिजनों को मरीजों का हालचाल बताया। साथ ही, होम आइसोलेशन वाले मरीजों को कंसल्टेशन उपलब्ध कराना शामिल है। इसके लिए जूनियर डॉक्टरों ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की टीम बनाई। उनके नंबर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिए। इसके बाद मुहिम में लगातार दूसरे डॉक्टर भी जुड़ते गए।

गांधी मेडिकल कॉलेज के जूडा की यूजी विंग के अध्यक्ष आकाश सोनी ने बताया कि अप्रैल में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ा तो अस्पतालाें में मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड नहीं मिल रहे थे। उसी समय, प्रदेश भर के जूनियर डॉक्टरों अपने-अपने स्तर पर मरीजों और उनके परिजनों की मदद के लिए आगे आए। हमने जेडीए एमपी यूजी विंग की हेल्पलाइन शुरू की। इसमें डॉक्टरों व कुछ मेडिकल स्टूडेंट्स की टीम बनाकर उनके नंबर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिए। इस टीम के अलावा भी कई लोग जुड़े गए।

ऐसे करती थी टीम काम

अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण के तेजी से बढ़ने पर अस्पतालों में बेड खत्म हो गए। कई लोग लोग बेड के लिए भटक रहे थे। ऐसे लोगों ने टीम से संपर्क किया तो उनको पोर्टल देखकर और अस्पताल से संपर्क कर खाली बेड की जानकारी उपलब्ध कराई गई।ऑक्सीजन सिलेंडर और रेमडेसिविर इंजेक्शन की किल्लत के भी टीम के पास फोन आए। टीम ने उनको अस्पताल में इंजेक्शन प्राप्त करने की प्रक्रिया के संबंध ऑक्सीजन सिलेंडर रिफिल होने वाले स्थानों के संबंध में समय पर जानकारी उपलब्ध कराई।होम आइसोलेशन वाले कई मरीजों ने फोन किया। जिनको सीनियर से टेली कंसल्टेशन उपलब्ध कराया गया।प्लाज्मा के लिए भटकने वाले लोगों के लिए टीम ने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत फोन के माध्यम से प्लाज्मा देने वाले लोगों से संपर्क किया। इसके बाद उनको जरूरतमंद परिवारों से मिलाया।

इन्होंने निभाई अहम भूमिका

भोपाल के डॉ. हरीश पाठक, डॉ. सचेत सक्सेना, डॉ. अरविंद मीणा, डॉ. रानसिंह तनवर के साथ जीएमसी भोपाल के अनिकेत पमेचा, आदित्य अग्रवाल, शैलेन्द्र यदुवंशी, खुशी सलगिया। एमजीएमएमसी इंदौर के वीर सिंह मालवीय, आदेश सिंंह बघेल। जीआरएमसी ग्वालियर- विकास गुर्जर, श्रेया देवड़ा। रीवा मेडिकल कॉलेज के क्षितिज गुप्ता, अनिकेत पांडे। सागर मेडिकल कॉलेज के चंद्र प्रताप सिंह, सुरेन्द्र बिसनोई। जीएमसी विदेशा के सुशरीत पांडे। मेडिकल कॉलेज शिवपुरी की सृष्टि दुबे। मेडिकल कॉलेज शहडोल के आयुष रोशन। मेडिकल कॉलेज खंडवा के आर्यन रावत। मेडिकल कॉलेज रतलाम की स्वरांशी कौशिक। मेडिकल कॉलेज दतिया के उज्जवल। साथ ही आकाश सोनी, रामराज कंसना, अजयदीप गुर्जर, सदीप कुमार।

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