मानसून:सिर्फ पिछले साल निसर्ग तूफान के कारण 14 जून को पहुंचा था, इस बार समय पर आने की उम्मीद

अब मानसून के सेट होने की तारीखों पर बदलाव करने पर चल रहा विचार

मध्यप्रदेश में बीते 11 साल से एक सप्ताह से भी देरी से मानसून आ रहा है। मानसून 13 साल में सिर्फ दो बार ही समय पर प्रदेश में प्रवेश कर पाया है। इनमें से भी पिछले साल 14 जून को बारिश की इंट्री मध्यप्रदेश में जरूर हुई थी, लेकिन यह निसर्ग तूफान के कारण हुई थी। हालांकि इस बार मौसम विभाग प्रदेश में समय पर मानसून आने की बात कह रहा है।

वर्ष 2008 में आखरी बार मानसून 14 जून को आया था। इसके बाद से प्रदेश में बारिश तय समय पर नहीं हो सकी है, जबकि मध्य प्रदेश में मौसम विभाग के अनुसार 13 से 14 जून से बारिश होना बताया जाता है। गत 10 साल से देरी से आ रहे मानसून के कारण मौसम विभाग भी इसके सेट होने की तारीखों के बदलाव करने पर विचार कर रहा है। हालांकि मौसम विभाग ने अभी भी प्रदेश में मानसून आने की तारीख 13 और 14 जून को ही रखी है।

20 जून के बाद ही आ रहा
मौसम वैज्ञानिक पीके शाह ने बताया कि बीते 10 साल से देखा जा रहा है कि मानसून समय पर मध्यप्रदेश में नहीं पहुंच रहा है। हालांकि मौसम विभाग की गणना के अनुसार तारीख में एक सप्ताह कम ज्यादा लेकर चला जाता है। इस दौरान अगर मानसून आ जाता है, तो उसे समय पर ही आना माना जाता है। प्रदेश में मानसून 13 और 14 जून के बीच सक्रिय होना माना जाता है। मौसम विभाग द्वारा मानसून आने की अधिकारिक घोषणा की जाती है। साहा ने बताया कि बीते कुछ वर्षों से देखा गया है कि मानसून 20 जून के बाद ही प्रदेश में सक्रिय हो रहा है। हालांकि नई तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है।

करीब 1 सप्ताह देरी से आने लगा है मानसून

मानसून की पहली बारिश केरल में शुरू होती है, जिसका समय 1 जून निर्धारित किया गया है। बीते कुछ सालों से केरल में भी मानसून तय समय पर नहीं पहुंच रहा। ऐसे में प्रदेश के मानसून पर इसका असर पड़ रहा है और यह करीब 1 सप्ताह देरी से मध्यप्रदेश में प्रवेश करने लगा है।

सिर्फ बारिश होना ही मानसून का आना नहीं है
वैज्ञानिक पीके साहा ने बताया कि सिर्फ बारिश होना ही मानसून का आना नहीं माना जाता है। कई बार बारिश लोकल सिस्टम बनने के कारण भी होती है। लगातार नमी आते रहने के कारण जब यह पूरे प्रदेश में सक्रिय हो जाता है तभी मानसून आना माना जाता है।

लगातार देरी से आ रहा मानसून
मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2008 से लेकर पिछले साल 2020 तक मानसून सिर्फ दो बार समय पर आया, जबकि शेष वर्षों में यह 20 जून के बाद ही सक्रिय हुआ। वर्ष 2012, 13 और 14 में यह जुलाई में आया। वर्ष 2008 और 2020 को छोड़ दिया जाए तो सिर्फ वर्ष 2010 में ही 20 जून से पहले 17 जून को मध्यप्रदेश में प्रवेश किया था।

MP में 13 साल में सिर्फ 2 बार मानसून समय पर आया, सबसे ज्यादा बारिश 2016 में हुई थी

वर्षमानसून पहुंचाकुल बारिश मिमी200814 जून606200928 जून862201017 जून598201122 जून123120124 जुलाई1192201311 जुलाई132120147 जुलाई759201522 जून1165201620 जून1432201726 जून730201828 जून807201929 जून1192202014 जून991

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