महाराष्ट्र में अब 15 जून तक बढ़ा लॉकडाउन, जानें CM उद्धव ठाकरे के संबोधन की बड़ी बातें

मुंबई
महाराष्ट्र में कोरोना संकट के बीच रविवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्य की जनता को संबोधित किया। सीएम उद्धव ठाकरे ने राज्य में जारी लॉकडाउन को 15 दिनों के लिए बढ़ाने का ऐलान किया। सीएम ने कहा कि राज्य में अब 15 जून तक लॉकडाउन रहेगा। जिलों के केस टैली के आधार पर कुछ छूट और प्रतिबंध लागू होंगे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि हम बस यही कोशिश कर रहे हैं कि हमारा राज्य सुरक्षित रहे। कड़क लॉकडाउन नहीं बल्कि इस बार कड़क नियम किए गए हैं। सीएम ने कहा कि महाराष्ट्र में अभी भी कई जिले ऐसे हैं, जहां नियम हल्के किए गए और वहां केसेस बढ़ने लगे। शहर से ज्यादा गांवों में ऐसी स्थिति देखने को मिली।

रविवार देर शाम अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि मैं आप सब से 1 महीने बाद मिल रहा हूं। पिछली बार 1 मई यानी महाराष्ट्र दिवस पर मिला था। एक महीने में क्या-क्या हुआ और आगे क्या करना है ये बताना मेरा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो मैं आप सबको शुभकामना देना चाहता हूं कि आप लोग सभी नियमों का पालन कर रहे हैं।

केंद्र सरकार से जल्द और मदद मिलने की उम्मीद
उद्धव ठाकरे ने कहा कि 8-10 दिनों पहले आए तूफान की बात करेंगे। कई सालों बाद ऐसा तूफान देखने को मिला है। पिछले साल भी हमारे यहां तूफान आया था। एक तो कोरोना ऊपर से तूफान। दोनों संभालना मुश्किल है पर सभी ने अपना काम जिम्मेदारी से किया। उद्धव ठाकरे ने कहा कि मेरी हाल ही में प्रधानमंत्री से बात हुई। इस तरह की घटनाओं की सहयता राशि में बदलाव होने चाहिए। NDRF को अधिक मदद मिलनी चाहिए। लोगों को नुकसान की भरपाई जल्द देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है केंद्र सरकार जरूर और जल्द मदद करेगी।

55 लाख फ्री शिव भोजन थाली बांटी
सीएम ने कहा कि कोरोना में जो हमने घोषणा की उसमें हमने अनाज, शिवभोजन थालियां और ऐसी तमाम योजनाओं के तहत लोगो की मदद की है। 55 लाख फ्री शिव भोजन थाली बांटी। फेरीवालों और घरेलू काम करने वाले लोगो की मदद की। समुद्री किनारों के घर भूकंप से निपटने लायक बनने चाहिए। हमारी योजनाओं से 850 करोड़ लाभार्थियों को लाभ मिला है।

छूट कम करने पर बढ़ रहे कोरोना केस
उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोग लगातार सवाल पूछ रहे हैं। कोरोना के केसेस कम हुए तो क्या लॉकडाउन हटेगा? हम बस यही कोशिश कर रहे हैं कि हमारा राज्य सुरक्षित रहे। कड़क लॉकडाउन बल्कि कड़क नियम इस बार किए गए हैं। सीएम ने कहा कि महाराष्ट्र में अभी भी कई जिले ऐसे हैं, जहां नियम हल्के किए गए और वहां केसेस बढ़ने लगे। शहर से ज्यादा गांवों में ऐसी स्थिति देखने को मिली।

पिछली बार से अलग है इस बार का वायरस
सीएम ने कहा कि आंकड़ों की बात करें तो अभी तक हम नीचे नहीं आए हैं। कोरोना में महाराष्ट्र नंबर एक ही है। लेकिन एक राहत की बात है कि एक्टिव केसेस पहले से कम हैं। साथ ही ठीक होने वाली की भी संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि पिछली बार का वायरस और इस बार का वायरस अलग है। तीसरे लहर में कैसा होगा ये भी कह नहीं सकते। ऑक्सीजन, बेड सब बढ़ाए गए। जब ऐसे फोन आ रहे थे कि अस्पताल में कुछ ही घंटों का ऑक्सिजन बचा है तब बहुत मुश्किल समय था। लेकिन तब हमने पूरी तैयारी की और मरीजों के लिए ऑक्सिजन की व्यवस्था की।

जबरन नसबंदी, जुर्माना और जेल… मुस्लिम आबादी पर बर्बरता से लगाम लगा रहा है चीन

देश में मुस्लिम आबादी घटाने के लिए चाइनीज सरकार उइगर और दूसरे अल्पसंख्यकों समुदायों के जन्मदर को बर्बरतापूर्वक नियंत्रित कर रही है। एक तरफ मुस्लिम बच्चों को जन्म लेने से रोका जा रहा है, तो दूसरी तरफ देश में हान बहुसंख्यकों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। 

सरकारी आंकड़ों, राज्य के दस्तावेजों और निरोध केंद्र में पूर्व में रखे गए 30 लोगों, उनके परिवार के सदस्यों और निरोध केंद्र के पूर्व प्रबंधक के साक्षात्कारों पर आधारित एक पड़ताल के मुताबिक पहले कोई-कोई महिला जबरन गर्भनिरोध के बारे में बोलती थी, लेकिन यह चलन पहले के मुकाबले ज्यादा बड़े पैमाने पर और सुनियोजित तरीके से शुरू हो चुका है।

शिनजियांग के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र में पिछले चार साल से चलाए जा रहे अभियान को कुछ विशेषज्ञ एक तरह से ”जनसांख्यिकीय नरसंरहार” करार दे रहे हैं। साक्षात्कार और आंकड़े दिखाते हैं कि यह प्रांत अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को नियमित तौर पर गर्भावस्था जांच कराने को कहता है, उन्हें इंट्रायूटरिन डिवाइस (आयूडी) लगवाने के अलावा नसबंदी करवाने और लाखों महिलाओं को गर्भपात कराने के लिए भी मजबूर करता है।

देश भर में जहां आईयूडी के इस्तेमाल और नसबंदी में गिरावट आई है वहीं शिनजियांग में ये तेजी से बढ़ रहे हैं। जनसंख्या नियंत्रण के इन उपायों पर जोर बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेकर दिया जाता है। निरोध केंद्र में भेजे जाने को धमकी के साथ ही जन्म दर पर काबू करने में विफल रहने पर दी जाने वाली सजा का इसके लिए इस्तेमाल किया जाता है।

एजेंसी ने जांच में पाया कि ज्यादा बच्चे होना निरोध केंद्रों में लोगों को भेजे जाने का बड़ा कारण है जहां तीन या उससे ज्यादा बच्चों के मां-बाप को उनके परिवार से तब तक अलग रखा जाता है जब तक कि वे बड़ा जुर्माना नहीं भर देते। पुलिस छिपे हुए बच्चों की तलाश के लिए घरों पर छापे मारती है। डरे हुए मां-बाप को चेतावनी देती है कि दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने की वजह से जुर्माना नहीं देने पर उन्हें निरोध केंद्रों में भेज दिया जाएगा। सरकार कई महिलाओं को दूसरे या तीसरे बच्चे के जन्म के बाद आईयूडी लगवाने का आदेश देती है।

चीन में जन्मी काजख एक गरीब सब्जी वाले की पत्नी हैं। उनका तीसरा बच्चा पैदा हुआ तो सरकार ने आईयूडी लगाने का आदेश दिया। दो साल बाद जनवरी 2018 में सैन्य जैसी वर्दी में 4 अधिकारी उसके घर आए और उसे तीन दिन के भीतर करीब 2 लाख रुपए जुर्माना चुकाने का आदेश दिया। उसे चेतावनी दी गई कि यदि जुर्माना नहीं चुकाया तो उसे भी 2 से अधिक बच्चे पैदा करने की सजा भुगत रहे लाखों लोगों के साथ जेल में डाल दिया जाएगा।

2015 से 2018 के बीच उइगर आबादी वाले होतन, काशगर जैसे इलाकों में जन्मदर में 60 पर्सेंट से अधिक की गिरावट आई है। जन्म नियंत्रण वाले कार्यक्रम से लोगों में आंतक का माहौल है।

Gardening Tips: इन 10 ट्रिक्स से घर के पौधों को कीड़े लगने से बचाएं और गार्डन को बनाएं हरा-भरा

अगर आप पौधों की शौक़ीन हैं, तो हरा -भरा गार्डन आप सभी को पसंद होगा। आमतौर पर पौधों के शौक़ीन लोग बाहर से पौधे लाकर अपने घरों में गार्डन या गमलों में लगाते हैं। हरियाली न सिर्फ देखने में अ च्छी लगती है बल्कि इससे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत से लाभ हैं। पौधे भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन छोड़ते हैं और शरीर को स्वस्थ बनाए रखते हैं। लेकिन कई बार पौधों की उचित देखभाल करने के बावजूद उनकी पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और उनकी जड़ें सूखने लगती हैं, जिसका एक मुख्य कारण पौधों में लगने वाले कीड़े हैं। 

कई बार पूरी जानकारी न होने की वजह से लोग पौधों की देखभाल सही तरीके से करते हैं, लेकिन पौधों में होने वाले कीड़े न सिर्फ पौधों बल्कि गार्डन या गमले की मिट्टी को भी नुकसान पहुंचाते हैं। आइए इस लेख में कुछ ऐसे तरीकों के बारे में जानें जिनसे पौधों को कीड़े लगने से बचाया जा सकता है और गार्डन को खूबसूरत बनाया जा सकता है। 

दालचीनी पाउडर का इस्तेमाल

यदि आपके गार्डन या गमले में छोटे पौधे हैं और उसमें कीड़े लग रहे हैं, तो उनमें दालचीनी का पाउडर छिड़कें। छोटे पौधों पर दालचीनी पाउडर का इस्तेमाल उन्हें कीड़ों से बचाने के साथ उनके विकास में भी मदद करता है। दालचीनी में कई तरह की एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल प्रॉपर्टीज़ होती हैं जो छोटे और नए पौधों को कीड़ों और बीमारियों से बचाते हैं। इस्सके इस्तेमाल से पौधों की मिट्टी भी कीट मुक्त होती है। 

अंडे के छिलके

मिट्टी में नमी की वजह से कई बार गमले या पौधों में छोटे आकार के  घोंघे या रेंगने वाले कीड़े हो जाते हैं, जो पौधों को पूरी तरह से नष्ट कर देते हैं। यदि आपके गार्डन में भी ऐसे कीड़े मौजूद हैं तो इसमें अंडे के छिलके का चूरा डालें। इसके लिए आप अंडे के छिलकों को अच्छी तरह से साफ़ करके उसका चूरा तैयार करें और मिट्टी में मिला दें। इससे गार्डन के रेंगने वाले कीड़े या घोंघे दूर रहते हैं।

हल्दी का इस्तेमाल

अगर आपके पौधों में या मिट्टी में कीड़े लग जाएं तब हल्दी का पाउडर मिट्टी में मिला देने से यह कीटनाशक की तरह काम करती है और कीड़े ख़त्म हो जाते हैं। इसके लिए यदि आप 10 किलो मिट्टी ले रही हैं तो उसमें 20 ग्राम हल्दी मिलाएं। फिर उस मिट्टी को सारे पौधों में मिला लें। पौधों की पत्तियों और जड़ों में हल्दी पानी का छिड़काव भी कीटनाशक की तरह काम करता है। 

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल

अगर आपके पौधों और फूलों पर सफेद कीड़े लग रहे हैं, जो मोम की तरह नज़र आते हैं, इन कीड़ों को मिली बग कहा जाता है। खासतौर पर गमले मे लगे गुड़हल , गुलदाऊदी , गुलाब आदि पर मिलीबग लगने की संभावना ज्यादा होती है। इनसे छुटकारा पाने के लिए  एक लीटर पानी में एक चुटकी बेकिंग सोडा, 1 चम्मच शैम्पू और 2-3 बूंदें नीम के तेल की मिलाकर अपने पौधों पर छिड़कें। कुछ ही दिनों में आपकी समस्या दूर हो जाएगी। कुछ सब्जियों जैसे टमाटर , बैंगन, सेम , भिंडी आदि पर भी ये जल्दी लगते हैं। जैसे ही किसी पौधे पर एक-दो कीड़े दिखाई दें तो तुरंत इस स्प्रे का इस्तेमाल करें। 

नीम की पत्तियों का पानी

अपने पौधों और पौधों की मिट्टी को कीड़ों, चीटियों और दूसरे बग्स से बचाए रखने के लिए हफ्ते में एक बार इनमें नीम की पत्तियों को उबाल कर ठंडा किया हुआ पानी डालें। इसके लिए कम से कम 250 ग्राम नीम की पत्तियां 3 लीटर पानी में खौला लें और उन्हें ठंडा करके स्प्रे तैयार करें। इसका इस्तेमाल नियमित रूप से पौधों पर करने से कीटों से मुक्ति मिलती है। 

लहसुन की कलियों का इस्तेमाल

अक्सर पौधों की पत्तियों में पत्‍ती खाने वाली इल्‍ली या कीड़े लग जाते हैं, जो पूरे पौधे को नुकसान पहुंचाते हैं। इनसे बचाव के लिए आप पौधों में लहसुन का इस्तेमाल कर सकती हैं इसके लिए आधा कप कटा या कुचला हुआ लहसुन लें और एक लीटर पानी में मिला कर 1 से  2 घंटे के लिए रख दें। इस पानी को  छान कर एक स्‍प्रे बॉटल में भर लें और पौधों पर स्‍प्रे करें। इसके इस्तेमाल से बहुत जल्द ही कीड़ों से पौधों को मुक्ति मिल जाएगी। 

नीम की पत्तियों का पाउडर

यदि आपके गमले या गार्डन की मिट्टी में दीमग या अन्य कीड़े लग गए हैं, जो मिट्टी और पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हों, तो उसके लिए नीम की पत्तियों को सुखाकर पाउडर तैयार करें और मिट्टी में मिक्स करें। ऐसा करने से दीमक और अन्य कीड़े नष्ट हो जाएंगे और मिट्टी भी ज्यादा उपजाऊ हो जाएगी। 

ओवर वॉटरिंग से बचें

सबसे बड़े कारकों में से एक जो घर के पौधों के लिए कीड़ों को आकर्षित करता है वह है मिट्टी में नमी की अधिकता। चूंकि ये कीट अपने अंडे नम मिट्टी के भीतर रखना पसंद करते हैं, इसलिए एक अधिक पानी वाला हाउसप्लांट जल्दी से ही कीड़ों के संक्रमण की मेजबानी करना शुरू कर सकता है। पौधों में जरूरत से ज्यादा पानी देना पौधों को नुक्सान पहुंचा सकता है पौधों को पानी तभी देना चाहिए जब मिट्टी स्पर्श से सूखी महसूस हो। 

सोप वॉटर का इस्तेमाल

यदि आपके पौधों पर कीट लग गए हैं, तो एक आसान, प्राकृतिक उपाय सोप वॉटर का इस्तेमाल है जो आपको कीटों को दूर करने में मदद कर सकता है। डिश डिटर्जेंट और नल के पानी का मिश्रण आपके हाउसप्लंट्स से स्पाइडर माइट और एफिड इन्फेक्शन को दूर करने में मदद कर सकता है। एक स्प्रे बोतल में 1 चौथाई पानी डालें और 2% प्रतिशत की वांछित सांद्रता तक पहुँचने के लिए डिटर्जेंट के 4 चम्मच डालें और प्रत्येक पौधे को एक अच्छा स्प्रे दें। यह मिश्रण सभी हाउसप्लांट कीटों की देखभाल नहीं करेगा, लेकिन यह आपके पौधों पर रहने वाले कुछ नरम शरीर वाले कीड़ों को सफलतापूर्वक हटाने में मदद करेगा।

पौधे खरीदते समय पौधों की जांच

कई बार जब हम पौधे खरीदते हैं, उस समय कीड़ों का सही निरीक्षण नहीं कर पाते हैं। जिससे कीड़े एक पौधे से घर में प्रवेश कर जाते हैं और दुसरे पौधों को भी नुक्सान पहुंचाने लगते हैं। हमेशा पौधों को घर में लाने से पहले इसकी पीली पत्तियों और गिरे हुए पौधों के अलावा, धब्बेदार या खराब पत्तियों, पत्तियों के नीचे के हिस्से और एक काले, चिपचिपे पदार्थ की उपस्थिति पर नज़र रखें। यदि एक संक्रमित पौधा घर के अंदर लाया जाता है, तो कीट जल्दी से अन्य स्वस्थ हाउसप्लांट में फैल सकते हैं। 

पश्चिम बंगाल से लौटे SC आयोग के चेयरमैन बोले- 3000 से ज्यादा शिकायतें आई, 672 परिवारों ने किया पलायन

चंडीगढ़ । पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम आने के बाद हुई हिंसा की राजनीतिक रूप से खासी चर्चा हुई। राजनीतिक हिंसा में दलित समुदाय को निशाना बनाया गया। गांव के गांव पलायन कर गए। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन विजय सांपला का कहना है कि 1947 के बाद शायद ही देश के किसी हिस्से में दलितों को निशाना बनाने की घटनाएं हुई हों।

हाल ही में पश्चिम बंगाल का दौरा करके लौटे सांपला ने कहा, आयोग के पास 3000 से ज्यादा शिकायतें आ चुकी है। गांव ही नहीं शहरी क्षेत्रों में भी दलितों को निशाना बनाया गया। सांपला ने कहा कि 672 से ज्यादा परिवार हिंसा के कारण पलायन कर गए। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ओएसडी ने खुद माना था कि 301 परिवार पलायन कर गए थे, जिसमें से 118 परिवारों को वापस लाया गया। बाकी के प्रयास चल रहे हैं।

सांपला ने कहा, बाली विधानसभा क्षेत्र में एक महिला ने शिकायत किया कि उसने जितनी बार पुलिस से शिकायत की, गुंडा तत्व उतनी बार आकर उनके घर को तोड़ देते थे। अंत में तो उसके घर का मलवा तक गायब कर दिया गया। आयोग के चेयरमैन ने हिंसा की मूल वजह पर चर्चा करते हुए कहा, दलित समुदाय एक राजनीतिक दल के साफ्ट टारगेट पर आ गया। यह वह वर्ग था जिसने एक पार्टी को वोट दिया, जिससे दूसरी राजनीतिक दल के लोगों ने उन्हें निशाना बनाया।

सांपला ने कहा कि शुरूआत राजनीतिक द्वेष से हुई, लेकिन धीरे-धीरे इस पर जातीय रंग चढ़ गया। चूंकि गुंडा तत्वों को सरकार की शह थी इसलिए पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। विजय सांपला ने बताया, पश्चिम बंगाल के दौरान पर जो मंजर देखने को मिले शायद आजाद भारत में कभी भी ऐसे मंजर नहीं देखने को मिले होंगे, क्योंकि लोग डर के मारे अपने घर से दूर अलग-अलग जगहों पर छुपे हुए थे।

कार्रवाई के संबंध में पूछे जाने पर सांपला ने कहा, पश्चिम बंगाल सरकार से एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्यवाही क्या होगी, उस पर विचार किया जाएगा। पंजाब को लेकर विजय सांपला ने कहा कि राज्य में जब से दलित मुख्यमंत्री की बात सामने आई है तब से दलित उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ती जा रही है। आज आयोग के पास रोजाना 2 से 3 केस आ रहे है। इसमें कुछेक विभागीय कामकाज को लेकर है तो बाकी दलित उत्पीड़न को लेकर है। पंजाब में भी दलितों को दबाने की पुरजोर कोशिश हो रही है। निश्चित रूप से इसके पीछे भी राजनीतिक ही कारण है।

यूपी में कोरोना कर्फ्यू में ढील, 20 जिलों को छोड़ अन्य जगह शाम सात बजे तक खुलेंगी दुकानें, जारी रहेगा वीकेंड लॉकडाउन

उत्तर प्रदेश अनलॉक की ओर बढ़ गया। योगी सरकार की नई गाइडलाइन के अनुसार 1 जून से यूपी के 20 जिलों को छोड़कर सभी जनपदों में सुबह 7 से शाम 7  बजे तक कोरोना कर्फ्यू में कुछ शर्तों के साथ ढील दी जाएगी। शनिवार-रविवार साप्ताहिक बंदी के साथ नाइट कर्फ्यू जारी रहेगा। 600 से अधिक कोरोना केस वाले जिलों को फिलहाल अभी कोई छूट नहीं दी जाएगी।

जारी गाइडलाइन में कहा गया है कि कोरोना के अभियान से जुड़े फ्रंटलाइन सरकारी विभागों में पूर्ण उपस्थिति रहेगी एवं शेष सरकारी कार्यालय अधिकतम 50% उपस्थिति के साथ खुलेंगे और उसमें 50% कर्मी ही रहेंगे। निजी कंपनियों के कार्यालय भी मास्क की अनिवार्यता के साथ खोले जा सकेंगे। औद्योगिक संस्थान खुले रहेंगे।सब्जी मंडी पूर्व की भांति खुली रहेंगी प्रत्येक सब्जी मंडल स्थल में कोविड-19 की स्थापना की अनिवार्यता होगी। स्कूल कॉलेज तथा शिक्षा संस्थान शिक्षण कार्य हेतु बंद रहेंगे। 

सरकार की गाइडलाइन में है कि रेस्टोरेंट्स होम डिलीवरी की केवल अनुमति होगी। सेंट जॉन को छोड़कर शेष स्थानों में धर्म स्थलों के अंदर एक बार में एक स्थल पर 5 से अधिक श्रद्धालु ना हो। अंडे मांस और मछली की दुकानों को पर्याप्त साफ-सफाई तथा सैनिटाइजेशन का ध्यान रखते हुए बंद स्थान अथवा ढके हुए खोलने की अनुमति होगी। समस्त प्रदेश में गेहूं क्रय केंद्र एवं राशन की दुकानें खुली रहेंगी। कोचिंग संस्थान सिनेमा जिम स्विमिंग पूल क्लब एवं शॉपिंग मॉल पूर्णता बंद रहेंगे।

इन जिलों में कोई छूट नहीं

मेरठ, लखनऊ, सहारनपुर, वाराणसी, गाजियाबाद, गोरखपुर, मुजफ्फरनगर, बरेली, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, झांसी, प्रयागराज, लखीमपुर, खीरी सोनभद्र, जौनपुर, बागपत, मुरादाबाद, गाजीपुर, बिजनौर और देवरिया में फिलहाल कोई छूट नहीं।

बुद्धिजीवियों-शिक्षाविदों की एक समिति ने बंगाल में चुनाव परिणाम के बाद हुई हिंसा की रिपोर्ट गृह राज्यमंत्री को सौंपी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम के बाद जारी हिंसा पर आज एक रिपोर्ट गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी को सौंपी गई. ये रिपोर्ट बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों के ग्रुप ने 2021 में बंगाल में खेला नाम से सौंपी है.विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद राज्य में काफ़ी बड़े पैमाने पर हिंसा हुई जिसके बाद केन्द्र सरकार ने हिंसा के कारणों और तथ्यों की जानकारी के लिये ये ग्रुप बनाया गया था.

इससे पहले राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी थी.टीम की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल में जमकर हिंसा की गई. कई लोगों की हत्या की गई. क्रूड बम से हमले किये गये. इसमें महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया. उनके साथ क्रूर तरीक़ों से रेप किया गया.

पैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिंसा में सबसे ज़्यादा गरीब अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग प्रभावित हुए.इस ग्रुप ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय करने की सिफ़ारिश की. केन्द्रीय एजेंसियों से लेकर सभी आयोगों और सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग भी की है.

इस टीम में सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट मोनिका अरोड़ा, दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफ़ेसर सोनाली चितालकर और डॉ श्रुति मिश्रा, उद्यमी मोनिका अग्रवाल, जीजीएस आईपीयू की प्रोफ़ेसर प्रो. विजिता सिंह शामिल थीं.

MP में आज भी बारिश के आसार:भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर समेत सभी संभागों के जिलों में बारिश की संभावना; दो दिन बाद मौसम होगा साफ

मध्यप्रदेश में नौतपा में लगातार तीन दिन से बारिश का सिलसिला जारी है। रविवार को भोपाल प्रदेश के कई हिस्सों में झमाझम बारिश हुई है। मौसम विभाग ने सोमवार को भी प्रदेश के कई संभागों के जिलों में बारिश की संभावना जताई है। मौसम वैज्ञानिक पीके शाह ने बताया कि पंजाब से नॉर्थ वेस्ट एमपी तक और ईस्ट यूपी से विदर्भ तक दो ट्रफ लाइन बनी हुई है। वहीं, अरब सागर में ऊपरी हवाओं का चक्रवात बना हुआ है। इससे प्रदेश में नमी आ रही है। इसी वजह से बारिश हो रही है।

पीके शाह ने कहा कि सोमवार शाम को भी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, शहडोल, होशंगाबाद, सागर, उज्जैन संभाग के जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि दो दिन बाद मौसम साफ होने की उम्मीद है, लेकिन बादल छाने और बूंदाबांदी की गतिविधियां अब प्री-मानसून समेत अन्य कारणों से चलते रहेगी।

भोपाल शहर में 55 एमएम बारिश

मौसम विभाग ने पिछले 24 घंटे में कई शहरों में बारिश दर्ज की। इसमें भोपाल शहर में 55.1 एमएम, होशंगाबाद में 39.4 एमएम, बैतूल 11.2 एमएम, सागर 16.2 एमएम, रायसेन 8.6 एमएम, भोपाल 30.4 एमएम, खंडवा 4.0 एमएम, खरगोन 3.0 एमएम, सिवनी 1.4 एमएम, इंदौर 0.2 एमएम, टीकमगढ़ 1.0 एमएम, दतिया 8.8 एमएम और जबलपुर में बूंदाबांदी दर्ज की गई।

न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज

रविवार शाम को बारिश के कारण कई शहरो में न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। भोपाल में अधिकतम तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस, इंदौर में अधिकतम तापमान 39.0 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24.0 डिग्री सेल्सियस, ग्वालियर में अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25.7 डिग्री सेल्सियस, जबलपुर में अधिकतम तापमान 39.1 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

ENT स्पेशलिस्ट फैमिली:भोपाल में ब्लैक फंगस के अब तक 200 से ज्यादा ऑपरेशन हुए, करीब 120 इन्हीं ने किए

ब्लैक फंगस के भोपाल में 400 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। 200 से ज्यादा की अब तक सर्जरी की जा चुकी है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इनमें से 120 से ज्यादा सर्जरी ऐसी हैं, जिन्हें तीन डॉक्टरों ने की हैं। ये तीनों ही ईएनटी स्पेशलिस्ट हैं। यह परिवार है डॉ. कीर्ति और उनके पति डॉ. यशवीर जेके का, जो हमीदिया अस्पताल में ईएनटी स्पेशलिस्ट हैं। डॉ. कीर्ति की मां राजबाला सिंह भदौरिया बंसल अस्पताल में हैं। शहर में 80 ईएनटी सर्जन हैं, लेकिन यह एक मात्र परिवार है जिसमें तीन ईएनटी स्पेशलिस्ट हैं। ब्लैक फंगस की 50 से ज्यादा सर्जरी डॉ. राजबाला की टीम ने की हैं।

जब मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई, तब मैं ऑपरेशन कर रही थी, रिपोर्ट निगेटिव आते ही काम पर लौट आई
डॉ. कीर्ति की कोरोना रिपोर्ट 6 जून को दोपहर में पॉजीटिव आई थी। तब वे ब्लैक फंगस के मरीज का ऑपरेशन ही कर रही थीं। ड्यूटी छोड़कर होम आइसोलेट हो गईं। वे बताती हैं कि 20 मई को होम आइसोलेशन पीरियड पूरा होने के बाद जांच कराई। 21 मई को 9 बजे रिपोर्ट निगेटिव आई तो दोपहर 12 बजे मैंने अस्पताल पहुंचकर ओटी में मोर्चा संभाल लिया था। सास-ससुर और बेटा, बेटी भी पॉजिटिव थे। ऐसे में घर के नौकरों को छुट्‌टी पर भेज दिया था। पिछले एक महीने से दोहरी जिम्मेदारी निभा रही हूं। अब बात उनकी मां की। डॉ. राजबाला सिंह बताती हैं कि वे अपनी टीम के साथ अब तक 54 ऑपरेशन कर चुकी हैं। इनमें 18 मरीज घर लौट चुके हैं।

ओटी के बाहर खाना खाया, रात 12 बजे तक किए ऑपरेशन
डॉ. यशवीर हमीदिया के ईएनटी डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वे अपनी टीम के साथ लगातार ऑपरेशन कर रहे हैं। कई बार उन्हें सुबह से रात 12 बजे तक ऑपरेशन करने पड़े। इस दौरान ओटी के बाहर ही खाना खाया। वे अब तक 50 से ज्यादा ऑपरेशन कर चुके हैं।

प्रदेश में कोविड बेड के लिए नए रेट घोषित:सामान्य बेड अब 5000 रुपए तो आईसीयू वेंटिलेटर 17 हजार में

निजी अस्पतालों की लगातार मिल रही शिकायतों और अनाप-शनाप बिल वसूली को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी श्रेणियों के कोविड बेड के रेट तय कर दिए हैं। इसे सोमवार से लागू कर दिया गया है। नई व्यवस्था में यह भी साफ कर दिया गया कि सार्थक पोर्टल पर जिस अस्पताल ने जो रेट लिखे हैं, वह नई दर से कम हैं तो अस्पताल उसे बढ़ा नहीं पाएंगे। यदि नई दर से रेट अधिक हैं तो उन्हें इसे घटाना पड़ेगा।

नई दरें प्रतिदिन के हिसाब से

जनरल वार्ड व आइसोलेशन 5000 रु.
एचडीयू व आइसोलेशन 7500 रु.
आईसीयू (बिना वेंटीलेशन)
व आइसोलेशन 10000 रु.
आईसीयू (वेंटीलेशन के
साथ) व आइसोलेशन 17000 रु.
इस रेट में ये शामिल : बेड चार्ज, नर्सिंग चार्ज, इन-हाउस कंसलटेशन-ड्यूटी डॉक्टर चार्जेज, मरीज का खाना, राइलेस ट्यूब इंसर्सन, यूरिनरी ट्रेक्ट कैथेटराइजेशन, पीपीई किट, कंज्यूमेबल्स, ऑक्सीजन, नेबुलाइजेशन और फिजियोथैरेपी।