टीके का कारण मिली मुझे दूसरी जिंदगी… AIIMS के डॉक्टर बताया- कितनी असरदार है वैक्सीन

राजधानी दिल्ली में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में कुछ लोग बेहद गम्भीर बीमार हो रहे हैं। वहीं कोरोना के खिलाफ टीका लगवाने वाले लोगों में वायरस के हाई वायरलोड मिलने के बावजूद हल्के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इस बीच एम्स के जरीयाट्रिक मेडिसिन विभाग के डॉक्टर प्रसून चटर्जी कोवेक्सीन टीके की दोनों डोज लगने के बाद भी कोरोना संक्रमित हो गए। उन्होंने शनिवार को अपने ट्विटर अकॉउंट पर जानकारी देते हुए लिखा कि उन्हें टीके की दोनों खुराक लगी थीं और शरीर में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडी भी मौजूद थीं। इसके बावजूद भी वे कोरोना की चपेट में आ गए।

डॉक्टर प्रसुन्न ने बताया कि कोई भी कोरोना संक्रमण से इम्यून नहीं है। मास्क पहनना और सामाजिक दूरी का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। डॉक्टर ने बताया कि एंटीबॉडी होने की वजह से उन्हें हल्के लक्षण जैसे खांसी और बदन दर्द है। उन्होंने लोगों से टीका लगवाने की अपील की ताकि लोग संक्रमित भी सो जाएं तो वे गम्भीर रूप से बीमार न हों।

टीके ने बचा ली मेरी जान

दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान की प्रमुख डॉक्टर प्रज्ञा शुक्ला ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि कोरोना के टीके ने उनकी जिंदगी बचा ली। उन्होंने बताया कि टीका लगने के बाद जब उन्हें कोरोना का संक्रमण हुआ तो रेपिड एंटीजन जांच में नाक से सैम्पल लेते ही थोड़ी देर में नतीजा पॉजिटिव आ गया। इसका मतलब है कि वायरलोड बहुत ज्यादा था। डॉक्टर शुक्ला ने बताया कि इतना ज्यादा वायरलोड आपको गम्भीर रूप से संक्रमित कर सकता था लेकिन मुझे कोरोना का टीका लगा हुआ था तो शरीर ने तुरंत वायरस के संक्रमण के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता से जवाब दिया और उन्हें बेहद हल्के लक्षण दिखाई दिए। डॉक्टर प्रज्ञा शुक्ला ने 16 जनवरी को कोविशिल्ड के टीके की पहली खुराक ली थी और फिर 13 फरवरी को टीके की दूसरी खुराक ली। टीकाकरण पूरा होने के करीब 48 दिन बाद उन्हें कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। उन्होंने लिखा कि वायरलोड अधिक होने के बाद टीके ने उनकी जान बचा ली। डॉक्टर प्रज्ञा कोरोना काल में भी कैंसर के मरीजों की लगातार सेवा करती रही हैं। 

टीका लगा था इसलिए बेहद हल्के लक्षण आए

दिल्ली के राजा हरिश्चन्द्र अस्पताल में काम करने वाली नर्सिंग अधिकारी रंजना को  टीके की दोनों खुराक लगने के एक महीने बाद कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। उन्हें भी वायरलोड काफी ज्यादा था लेकिन टीकाकरण होने की वजह से उन्हें बेहद हल्के लक्षण दिखाई दिए। उन्हें अधिक वायरलोड होने के बावजूद हल्का बदन दर्द और थकान ही महसूस हुई। रंजना ने बताया कि कोई भी टीका उस बीमारी के संक्रमण की गम्भीरता को कम करता है। इसका मतलब यह नहीं है कि टीका लगवाने के बाद कोरोना का संक्रमण नहीं हो सकता। टीका संक्रमण से तो सुरक्षा देता है लेकिन अगर संक्रमण हो जाए तो यह गम्भीर बीमार होने से बचाता है। ऐसे में सभी लोगों को टीका लगवाना चाहिए और टीकाकरण के बाद भी पूरी तरह एहतियात बरतना चाहिए।

टीका लगवाने का मतलब यह नहीं है कि उस व्यक्ति को अब कोरोना संक्रमण नहीं होगा, कोरोना संक्रमण किसी को भी हो सकता है, ऐसे में लोग एहतियात बरतें। अगर आपने टीका लगवा रखा है तो आप गम्भीर रूप से बीमार नहीं होंगे।
“डॉक्टर प्रसून चटर्जी, एसोसिएट प्रोफेसर, जरियाट्रिक विभाग, एम्स”

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