बंगाल में पीएम मोदी ने करीमुल हक को गले लगाया, ‘ऐम्बुलेंस दादा’ बोले- जब ममता बनर्जी से मिलने गया तो ‘दुत्कारा’ गया

पश्चिम बंगाल (Bengal Chunav ki Khabar) के जलपाईगुड़ी के रहने वाले और समाजसेवा की वजह से पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित करीमुल हक उर्फ ‘ऐम्बुलेंस दादा’ (Karimul Hak alias ambulance dada) की जिंदगी ढेरों किस्सों से भरी हुई है। ‘रुपयों वाला मकान’ हो या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee Karimul Haque) से जब वे भेंट करने पहुंचे और उन्हें ‘दुत्कार’ दिया गया, हर किस्से को वो बहुत तसल्ली से बताते हैं।

करीमुल हक उर्फ ऐम्बुलेंस दादा से यह जानने की कोशिश की कि बंगाल चुनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात के बाद कहीं ममता बनर्जी उनसे (करीमुल हक) नाराज तो नहीं हो जाएंगी। इसको लेकर करीमुल हक ने तफ्सील से जवाब दिया है।

दीदी ने अच्छा काम किया तो क्यों…’
करीमुल ने कहा, ‘ममता बनर्जी ‘दीदी’ के लिए तो यह खुश होने वाली बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारे देश के इस वक्त संरक्षक हैं। ममता बंगाल की इस वक्त मां हैं। मैं उनकी गोद में खेलता हूं। ममता बनर्जी ने कभी मुझसे मुलाकात नहीं की है। अगर वह मुझे बुलाएंगी तो मैं जरूर जाऊंगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे बुलाया तो मैं उनके पास पहुंच गया। नेता लोग जर्सी चेंज करते रहते हैं। टीएमसी के कई लोगों ने जर्सी चेंज कर ली। दीदी ने बंगाल में काम किया तो उनका आदमी क्यों उनकी पार्टी छोड़कर चले जाते हैं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करने गया। मैंने बीजेपी से तो बात नहीं की। आजतक किसी प्रधानमंत्री ने इस तरह गरीब आदमी को गले नहीं लगाया। मैं पीएम मोदी को प्रणाम करता हूं। मैं डस्टबिन का आदमी हूं। मैं अगर कुछ मांगूंगा तो देश के लिए मांग करूंगा कि बंगाल में एम्स बना दीजिए।’

…जब ममता से मिलने पहुंचे ‘ऐम्बुलेंस दादा

पद्मश्री विजेता करीमुल हक उर्फ ऐम्बुलेंस दादा कहते हैं, ‘मैं ममता बनर्जी दीदी के पास मुलाकात करने गया। मुझे उनसे नहीं मिलने नहीं दिया गया। मैं इस बात से नाराज हो गया। हम लोग गंदे आदमी हैं, हम लोग डस्टबिन के आदमी हैं, शायद इस वजह से हमें दीदी से मिलने नहीं दिया गया। मैं वहां पहुंचा तो मैंने कहा कि मुझे दीदी से मिलना है। मुझे मिलने नहीं दिया गया। मुझसे पूछा गया कि क्या चाहिए तो मैंने जवाब दिया कि क्या चाहिए आपको। हमने कहा कि हमें कुछ नहीं चाहिए, बस मैं यह कहने आया हूं कि कोरोना चल रहा है लेकिन डॉक्टर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। आपको देखना चाहिए कि डॉक्टर क्यों अस्पताल में नहीं रहते हैं। पता कीजिए कि किससे गलती हो रही है। मुझे वहां जाने नहीं दिया गया। इस बात से मुझे बहुत दुख पहुंचा। मैं तो बस जानकारी देने पहुंचा था। दीदी इस बात को नहीं जानती हैं। उनके लोगों ने मुझे दीदी से मिलने नहीं दिया।’

करीमुल हक (एम्बुलेंस दादा) कहते हैं, ‘मैं कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं। मैं बहुत साधारण व्यक्ति हूं। मैं अपने बच्चों से कहता हूं कि हिंदू बनेगा ना मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है इंसान बनेगा। नेता-मंत्री को मैं कहता हूं कि राजनीति कीजिए, कुर्सी के लिए खून-खराबा मत कीजिए। मैं मुसलमान होकर भी मैं दुर्गापूजा में शामिल होता हूं।’

करीमुल को पीएम मोदी ने गले लगाया
सोनारपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कार्यकर्ता जुल्फिकार को गले लगाया तो टीएमसी समेत एआईएमआईएम खेमे में भी टेंशन पैदा हो गई। एनबीटी ऑनलाइन की ख़बर के साथ ही हर राजनीतिक दल में इसकी चर्चा भी शुरू हुई। फिर बागडोगरा में पीएम मोदी ने पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित करीमुल हक उर्फ ऐम्बुलेंस दादा को गले लगा लिया। इसको लेकर भी बंगाल के सियासी दलों में विश्लेषण शुरू हो गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *