पश्चिम बंगाल, चेन्नई में निष्पक्ष चुनाव कराने ग्वालियर से SAF की 12 कंपनियां रवाना

ग्वालियर/ पश्चिम बंगाल और चेन्नई में निष्पक्ष विधानसभा चुनाव कराने की जिम्मेदार मध्य प्रदेश ग्वालियर के SAF जवानों के कंधों पर है। शुक्रवार को ग्वालियर से SAF की 12 कंपनियां वेस्ट बंगाल और चेन्नई के लिए रवाना हुई हैं। इनमें से 10 कंपनियां बंगाल और 2 कंपनियां चेन्नई जाएंगी। वेस्ट बंगाल में आठ चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। जिनमें पहला चरण 27 मार्च को है, जबकि चेन्नई में 1 ही चरण 6 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। यह फोर्स ग्वालियर स्टेशन से स्पेशल ट्रेनों के जरिए वेस्ट बंगाल व चेन्नई रवाना हुआ है।

पूरे देश में पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव को लेकर उत्साह चरम पर है। जिस तरह से वहां सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस और भाजपा में जंग छिड़ी हुई है उससे पूरे देश की नजर इसी विधानसभा चुनाव पर है। यहां 295 विधानसभा सीट हैं जिनमें 294 (एक नामांकित सीट छोड़कर) सीट पर चुनाव हो रहा है। पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में मतदान हो रहा है। पहला चरण 27 मार्च और आखिरी 29 अप्रैल को है। 2 मई को मतदान के नतीजे आने हैं। इसके साथ ही चेन्नई में 234 विधानसभा सीट के लिए एक ही चरण में मतदान होना है। 6 अप्रैल को वहां मतदान होगा। पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण चुनाव कराने के जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर है। इसलिए पूरे देश से 125 कंपनियां SAF, रिजर्व पुलिस व अन्य फोर्स की मांगी गई थीं।

स्पेशल ट्रेन से 10 कंपनियां वेस्ट बंगाल रवाना

शुक्रवार सुबह ग्वालियर रेलवे स्टेशन SAF की 10 कंपनियां स्पेशल ट्रेन से पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हुई हैं। वहां इन्हें 1 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान में ड्यूटी करना है। इसके साथ ही SAF की 2 कंपनियां स्पेशल ट्रेन से चेन्नई के लिए रवाना हुई हैं। वहां 6 अप्रैल को चुनाव कराए जाने हैं। पूरे एक महीने तक फोर्स वहीं रहेगा।

एक कंपनी में होते हैं 120 जवान व अफसर

वैसे तो एक कंपनी में 120 जवान व अफसर होते हैं। इनमें सूबेदार से लेकर ट्रेडमैन तक शामिल होते हैं। पर आमतौर पर जब टीम बाहर भेजी जाती है तो उसमें ट्रेडमैन जैसे कपड़े धोने वाले, खाना बनाने वाले, सफाई करने वाले आदि कर्मचारियों को नहीं भेजा जाता है। इस तरह से बाहर भेजे जाने वाली कंपनी में 75 से 80 जवान शामिल होते हैं।

ग्वालियर का यह ऑन डिमांड बाइक चोर, स्मैक का नशा कर चुराता है ग्राहक के पसंद की गाड़ी

ग्वालियर
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पुलिस ने एक ऐसे शातिर बाइक चोर को गिरफ्तार किया है जो खरीदने वालों की डिमांड के आधार पर वाहन चोरी करता था। पुलिस ने उसके कब्जे से 6 मोटरसाइकिल बरामद की है। फिलहाल पुलिस पकड़े गए चोर से सख्ती से पूछताछ कर रही है।

इंदरगंज थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि अलीजा बाग में एक संदिग्ध चोर खड़ा है। सूचना के आधार पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को देख कर खड़े युवक ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उसे धर दबोचा। पकड़े गए युवक से पूछताछ की गई तो उसने पुलिस के सामने जो कुछ कहा सब हैरान रह गए।

यह चोर वाहन की चोरी करने से पहले ग्राहक से उसकी च्वॉइस पूछता था। ग्राहक को जो बाइक या स्कूटी चाहिए होती, वह पहले उसकी तलाश करता था। फिर चोरी को अंजाम देने से पहले स्मैक की डोज लेता था। चोरी करने का उसका तरीका भी खास था। उसके पास एक पुरानी बाइक थी। उसी बाइक से वह चोरी करने जाता था। चोरी करने के बाद पुरानी बाइक वहीं छोड़ देता और चुराई हुई बाइक लेकर लौट आता था।

पुलिस को अंदेशा है कि इस चोर से शहर में होने वाली कई और चोरियों के सुराग मिल सकते हैं। उस से पूछताछ कर पुलिस उसके साथियों का पता लगाने की कोशिश भी कर रही है।

टाटा-मिस्त्री विवाद:कोर्ट ने सुनाया टाटा के हक में फैसला, रतन टाटा ने कहा- फैसला टाटा ग्रुप के मूल्यों को सही साबित करता है

सुप्रीम कोर्ट ने टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा संस लिमिटेड और शापूरजी पलोनजी ग्रुप के सायरस मिस्त्री के मामले पर आज अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने NCLAT के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि मिस्त्री को टाटा संस को चेयरमैन पद से हटाना कानूनी तौर पर सही।

कोर्ट ने यह भी कहा कि शेयरों का मामला टाटा और SP ग्रुप दोनों मिलकर निपटाएं। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह फैसला सुनाया, जिसमें जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम भी शामिल रहे।

रतन टाटा ने किया फैसले का स्वागत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने फैसले का स्वागत करते हुए कोर्ट का धन्यवाद किया और कहा कि यह कोई जीत या हार का मामला नहीं। पोस्ट में उन्होंने लिखा यह मेरी ईमानदारी और ग्रुप के नैतिक आचरण पर लगातार हमलों के बाद, कोर्ट द्वारा टाटा संस की सभी अपीलों को बरकरार रखने का निर्णय उन मूल्यों और नैतिकता का सत्यापन है, जो हमेशा ग्रुप के मार्गदर्शक सिद्धांत रहे हैं। यह हमारी न्यायपालिका द्वारा प्रदर्शित निष्पक्षता और न्याय को दर्शाता है।

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा था फैसला
कोर्ट ने 17 दिसंबर को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था। दरअसल, टाटा संस ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के 18 दिसंबर, 2019 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें टाटा संस लिमिटेड के चेयरमैन के रूप में सायरस मिस्त्री की बहाली का आदेश दिया था। इस पर 10 जनवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। मिस्त्री टाटा सन्स के सबसे युवा चेयरमैन थे। मिस्त्री परिवार की टाटा सन्स में 18.4% की हिस्सेदारी है। वो टाटा ट्रस्ट के बाद टाटा संस में दूसरे बड़े शेयर होल्डर्स भी हैं।

NCLAT ने अपने दिसंबर 2019 के फैसले में कहा था कि 24 अक्टूबर 2016 को टाटा संस की बोर्ड बैठक में चेयरपर्सन के पद से साइयस मिस्त्री को हटाना गैर-कानूनी था। साथ ही यह भी निर्देश दिया था कि रतन टाटा को पहले से कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए, जिसमें टाटा संस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के बहुमत के फैसले या AGM में बहुमत की आवश्यकता होती है।

मिस्त्री को 4 साल में ही चेयरमैन पद से हटाया गया
सायरस मिस्त्री ने दिसंबर 2012 में टाटा संस के प्रेसिडेंट का संभाला था और 24 अक्टूबर 2016 को कंपनी के बोर्ड ऑफ डारेक्टर्स के बहुमत से पद से हटा दिया गया। इसके बाद 6 फरवरी 2017 को बुलाई गई एक बोर्ड बैठक (EGM) में शेयरहोल्डर्स ने मिस्त्री को टाटा संस के बोर्ड से हटाने के लिए वोट किया। तब एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला।

मामले को लेकर दो शापूरजी पल्लोनजी कंपनियों ने मिस्त्री को हटाने और अल्पसंख्यक शेयरधारकों के उत्पीड़न और कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल का रुख किया। ये दोनों कंपनियां टाटा संस में शेयरहोल्डर्स हैं। हालांकि जुलाई 2018 में NCLT ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसके खिलाफ पल्लोनजी कंपनियों ने अपील दायर की थी।

अपील में शापूरजी पलोनजी कंपनियों ने कहा कि NCLAT मिस्त्री को कुछ महत्वपूर्ण राहत देने में विफल रहा। इसलिए मिस्त्री कंपनियों को टाटा संस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर द्वारा गठित सभी समितियों में प्रतिनिधित्व का हकदार होना चाहिए।

स्‍वेज नहर में फंसे विशालकाय जहाज को चला रहे 25 भारतीय, जल्‍द खत्‍म नहीं होगा भीषण जाम

स्‍वेज नहर में फंसे विशालकाय कंटेनर शिप एवर गिवेन के निकलने के आसार दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रहे हैं। एवर गिवेन के रास्‍ता जाम करने से समुद्र में दोनों ही ओर लंबा जाम लग गया है। सैकड़ों की संख्‍या में जहाज और तेल टैंकर फंसे हुए हैं। इस बीच खबर मिली है कि एवर गिवेन जहाज को 25 भारतीय चला रहे हैं। तेज हवाओं के कारण के घूम गया और फंस गया है। सभी भारतीय चालक पूरी तरह से सुरक्षित बताए गए हैं। 193.3 किलोमीटर लंबी स्वेज नहर भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है। इसी रास्‍ते से दुनिया के करीब 30 फीसदी शिपिंग कंटेनर गुजरते हैं। पूरी दुनिया के 12 फीसदी सामानों की ढुलाई भी इसी नहर के जरिए होती है। आइए जानते हैं कि कौन हैं ये भारतीय चालक और दुनिया पर क्‍या हो रहा इस जाम का असर…

​कंटेनर शिप को चला रहा है भारतीय चालक दल

इस जहाज के मालिक जापान के रहने वाले शेइई किसेन कैशा हैं। उन्‍होंने कहा कि इस जहाज को चलाने वाला चालक दल भारत से आया है। उन्‍होंने कहा कि चालक दल के सभी सदस्‍य सुरक्षित हैं। इस जहाज पर मिस्र के दो विशेषज्ञ चालक भी पहुंचे हैं जो फंसे हुए जहाज को निकालने में मदद कर रहे हैं। एवर गिवेन जहाज एशिया और यूरोप के बीच में माल की ढुलाई करता है। मंगलवार को यह जहाज स्‍वेज नहर के संकरे रास्‍ते में फंस गया था। स्‍वेज नहर में फंसे जहाज को निकालने के लिए युद्धस्‍तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए क्रेन और खुदाई का सहारा लिया जा रहा है। जापानी मालिक ने एक लिखित बयान जारी करके पूरी घटना के लिए माफी मांगी है। उन्‍होंने कहा कि हम स्थिति को जल्‍द से जल्‍द ठीक करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। हम इस घटना से प्रभावित हुए सभी लोगों से माफी मांगते हैं। कोरोना संकट के बीच इस जाम से वैश्विक व्‍यापार को एक और बड़ा झटका लगा है। इसे पिछले कुछ सालों में सबसे भीषण जाम बताया जा रहा है।

स्‍वेज नहर में फंसे हैं दुनिया के 206 जहाज, लगा जाम

स्‍वेज नहर में एवर गिवेन जहाज के फंसने से कम से कम 206 जहाज फंस गए हैं। इनमें 16 तेल टैंकर शामिल हैं जिसमें से ज्‍यादातर चीन और भारत जा रहे थे। एवर गिवेन की गिनती दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर शिप में होती है। यह जहाज इस तरह से स्‍वेज नहर के रास्‍ते को रोक रखा है जैसे विशाल व्‍हेल मछली समुद्री तट पर आ गई हो। विशेषज्ञों का कहना है कि यह जहाज इस तरह से फंस गया है कि इसे निकालने में कई सप्‍ताह का समय लग सकता है। इस नहर का संचालन कर रहे अधिकारियों ने इसमें प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। करीब 400 मीटर लंबे इस दैत्‍याकार जहाज ने स्‍वेज नहर के दोनों तरफ के रास्‍तों को ब्‍लॉक कर दिया है। स्‍वेज नहर प्राधिकरण ने कहा है कि आठ 8 जहाज इसे निकालने में लगे हुए हैं। इस जहाज को निकालने में लगी नीदरलैंड की कंपनी बोस्‍कालिस के सीईओ पीटर बेरडोवक्‍सी ने कहा कि हम कह नहीं सकते हैं कि कितना समय लगेगा। इसमें कई हफ्ते लग सकते हैं। इस बीच भारत ने कहा है कि इस जाम से तेल की सप्‍लाइ में कोई बाधा नहीं आएगी।

अब अफ्रीका का चक्‍कर काटकर आ रहे हैं जहाज

इस बीच जाम से बचने के लिए कई देशों के जहाज अब अफ्रीका का चक्‍कर लगाते हुए जा और आ रहे हैं। इससे सामानों के आने में एक सप्‍ताह का समय बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि मंगलवार सुबह स्वेज पोर्ट के उत्तर में नहर को पार करने के दौरान कंट्रोल खोने से 400 मीटर लंबा और 59 मीटर चौड़ा कंटेनर शिप फंस गया। इस शिप के फंसने से लाल सागर और भूमध्य सागर के किनारों पर बड़ी संख्या में जहाजों का जाम लगा हुआ है। कंटेनर शिप एवर गिवेन चीन से माल लादने के बाद नीदरलैंड के पोर्ट रॉटरडैम के लिए जा रहा था। इस दौरान उसने हिंद महासागर से यूरोप में जाने के लिए स्वेज नहर का रास्ता अपनाया। जो मंगलवार की सुबह स्थानीय समयानुसार लगभग 07:40 पर स्वेज पोर्ट के उत्तर में फंस गया। इस जहाज को 2018 में बनाया गया था, जिसे ताइवानी ट्रांसपोर्ट कंपनी एवरग्रीन मरीन संचालित करती है। हालांकि इसके मालिक जापानी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एवर गिवेन के भारतीय चालक दल ने बताया कि स्वेज नहर को पार करते समय आए हवा के एक तेज बवंडर के कारण उनका शिप घूम गया। बाद में जब उसे सीधा करने का प्रयास किया गया तो वह नहर की चौड़ाई में घूमकर पूरे ट्रैफिक को ही बंद कर दिया। इस जहाज के पीछे एक और मालवाहक जहाज द मेर्सक डेनवर फंसा हुआ है।

पहली बार पीएम मोदी को लेकर विदेशी सरजमीं पर उड़ा VVIP विमान ‘एयर इंडिया वन’, जानें इसकी खासियत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना काल की शुरुआत के बाद आज पहली बार विदेश यात्रा पर निकले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर आज यानी शुक्रवार को बांग्लादेश पहुंचे, जहां वह दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से कई कार्यक्रमों में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा इसलिए भी खास है, क्योंकि भारत का नया वीवीआईपी विमान ‘एयर इंडिया वन’ पहली बार विदेश यात्रा पर निकला है। पीएम मोदी जिस वीवीआईपी विमान से बांग्लादेश गए हैं, यह वही विमान है, जिसे अमेरिका से मंगवाया गया है और इसमें भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री यात्रा करेंगे। 

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की यात्रा के लिए विशेष रूप से निर्मित पहला बी777 विमान एक अक्टूबर को अमेरिका से भारत आया था।  विमान को जुलाई में ही विमान निर्माता कंपनी बोइंग द्वारा एअर इंडिया को सौंपा जाना था, लेकिन दो बार इसमें देरी हुई। पहली बार कोविड-19 महामारी के कारण देरी हुई, फिर तकनीकी कारणों से इसमें कुछ हफ्तों की देरी हुई। ये दोनों विमान 2018 में कुछ महीनों के लिए एअर इंडिया के वाणिज्यिक बेड़े का हिस्सा थे, जिन्हें फिर वीवीआईपी यात्रा के लिए इसे विशेष रूप से पुनर्निमित करने के लिए अमेरिका के डलास भेज दिया गया।

अधिकारियों की मानें तो दोनों विमानों की खरीद और इनके पुनर्निर्माण की कुल लागत लगभग 8,400 करोड़ रुपये आंकी गई है। बी777 विमानों में अत्याधुनिक मिसाइल रोधी प्रणाली है, जिसे लार्ज एयरक्राफ्ट इन्फ्रारेड काउंटरमेजर्स और सेल्फ-प्रोटेक्शन सूट्स (एसपीएस) कहा जाता है। पहले बताया गया था कि वीवीआईपी की यात्रा के दौरान दोनों बी777 विमानों को एअर इंडिया के पायलट नहीं, बल्कि भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के पायलट उड़ाएंगे। हालांकि, आज कौन उड़ा रहा था, इसकी सूचना नहीं आई है।

अभेद सुरक्षा मुहैया कराएगा यह विमान
एयर इंडिया वन अग्रिम और सुरक्षित संचार प्रणाली से लैस है जो हवा में भी ऑडियो और वीडियो संचार फ़ंक्शन का लाभ (बिना हैक हैक या टैप किए) उठाने की अनुमति देता है।  माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के विमान एयरफोर्स वन की तरह ही एयर इंडिया विमान अत्याधुनिक तकनीक से लैस है और काफी सुरक्षित और अभेद है। इसमें दुश्मनों के अटैक का जवाबी हमला करने की भी क्षमता है। इस विमान में किसी आपात स्थिति से निपटने के सभी संसाधन मौजूद हैं।

और क्या हैं खासियत?
विमान की अन्य खासियत भी आपको हैरान कर देगी। बी777 विमानों में अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली हैं, जिन्हें लार्ज एयरक्राफ्ट इंफ्रारेड काउंटरमेजर्स (एलएआईआरसीएम) और सेल्फ प्रोटेक्शन सूट्स (एसपीएस) कहा जाता है। फरवरी में, अमेरिका ने भारत को यह दो रक्षा प्रणालियां 19 करोड़ डॉलर की कीमत पर बेचने की सहमति दी थी। दोनों विमानों में सुरक्षा के ऐसे उपकरण लगाए जा रहे हैं जो बड़े से बड़े हमले को नाकाम कर सकती है। यहां तक कि इस विमान पर मिसाइल अटैक का भी कोई असर नहीं होगा और यह काउंटर करने में भी सक्षम होगा। वर्तमान में, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति एअर इंडिया के बी747 विमानों से यात्रा करते हैं, जिनपर एअर इंडिया वन का चिह्न होता है।

मुख्तार अंसारी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, पंजाब से भेजा जाएगा उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के बाहुबली मुख्तार अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश में भेजने का आदेश दिया है। फिलहाल मुख्तार अंसारी पंजाब की जेल में बंद है और उत्तर प्रदेश सरकार आरोप लगाती रही है कि पंजाब की कांग्रेस सरकार में उसे संरक्षण दिया जा रहा है। इसी मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी और अब सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के हित में फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2 हफ्ते के अंदर मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश भेजने का निर्देश दिया है।

कौन है मुख्तार अंसारी?

लगातार 5 बार से विधायक, जेल के अंदर से चुनाव जीतता है। जनवरी 2019 से पंजाब की रोपड़ जेल में मुख्तार बंद है। यूपी में 30 FIR, 14 मुकदमे विचाराधीन, मुख्तार के ख़िलाफ़ कुल 40 से ज़्यादा केस। हत्या, फिरौती जैसे संगीन मामले दर्ज, पिछले 14 साल से जेल में बंद है मुख्तार। बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड में मुख्य आरोपी।

मुख्तार को ऐसे ले गई थी पंजाब पुलिस

पूर्वांचल के बाहुबली विधायक और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी पर उत्तर प्रदेश में कई मुकदमे दर्ज हैं। मऊ सदर सीट से विधायक अंसारी यूपी की एक जेल में बंद था और उसके केस का ट्रायल चल रहा था। इसी बीच पंजाब पुलिस ने जबरन वसूली और आपराधिक धमकी की शिकायत मिलने पर उसके खिलाफ प्रोडक्शन वारंट हासिल किया और उसे पंजाब ले गई। बता दें कि गैंगस्टर को लेकर यूपी और पंजाब सरकारों के बीच जंग छिड़ी हुई थी। मुख्तार ने पहले ही कहा है कि यूपी में मुझे जान का खतरा है।  

वहीं, आपको बता दें कि इससे पहले कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर जेल में बंद माफिया डॉन और बसपा विधायक मुख्तार अंसारी से अपनी जान को खतरा होने का दावा किया था। उन्होंने अपने लिए सुरक्षा की मांग की थी। अपने पत्र में, राय ने कहा था कि उन्होंने 6 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पहले ही सूचित कर दिया था कि वह प्रयागराज में सांसद/विधायक अदालत के सामने अपने भाई अवधेश राय की हत्या से संबंधित एक मामले में अंसारी के खिलाफ गवाह के रूप में उपस्थित होंगे।

उन्होंने कहा कि उनका सुरक्षा कवर वापस ले लिया गया और शस्त्र लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया है। पूर्व विधायक ने कहा था, मुख्यमंत्री ने मेरे पत्र पर ध्यान नहीं दिया, जबकि 10 प्रतिशत निर्धारित शुल्क पर मुझे दिए गए सुरक्षा कर्मियों को भी वापस ले लिया गया।

ग्वालियर में धारा 144 लागू: जुलूस, मेला, जिम, स्वीमिंग पूल और सिनेमाघर रहेंगे बंद,संभागायुक्त ने बैठक लेकर दिए दिशा-निर्देश

ग्वालियर। जिले में कोरोना बेकाबू होता जा रहा है। हर दिन के साथ कोरोना संक्रमित की संख्या बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि शासन और प्रशासन ने कोरोना की रोकथाम के लिए त्योहारों को फीका कर दिया है। कोरोना के चलते होली पर होने पर सामूहिक आयोजनों, जुलूस व मेला पर प्रतिबंध रहेगा। साथ ही जिम, स्वीमिंग पूल और सिनेमाघर पूर्णता बंद रहेंगे। इसके अलावा शादियों में 50 और अंतिम यात्रा में 20 से ज्यादा लोग शामिल नहीं हो सकेंगे।
ग्वालियर में कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह ने धारा 144 के तहत आदेश जारी कर दिए है जिनमें शादी समारोह में 50 लोग ही शामिल हो सकेंगे। जनसुनवाई को 30 अप्रैल तक स्थगित कर दिया गया है, वहीं जिम, स्वीमिंग पूल और सिनेमाघर भी बंद रहेंगे। बंद हॉल के कार्यक्रमों में हॉल की क्षमता के 50 फीसदी सदस्य रह सकते हैं, लेकिन अधिकतम 100 व्यक्ति ही उपस्थित रह सकेंगे। सार्वजनिक स्थलों पर बिना अनुमति के बड़ी संख्या में एकत्रित होने पर प्रतिबंध रहेगा साथ ही होली को जुलूस व बड़े आयोजन भी प्रतिबंधित रहेंगे। हालंाकि धारा 144 के प्रतिबंध में खान पान सेंटर को छूट मिली है। होटलों को छूट मिली है, लेकिन वहां बैठाकर खाना खिलाने पर प्रतिबंध है। खाना पैक कराकर ले जा सकते हैं।

कोरोना संक्रमण रोकने संभागीय आयुक्त ने बैठक लेकर अधिकारियों को दिए दिशा-निर्देश
संभागीय आयुक्त आशीष सक्सेना ने श्ुाक्रवार को काईसिस मैनेजमेंट की बैठक लेकर कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम के लिये जारी की गई गाइडलाइन का पालन कराने, टीकाकरण के साथ-साथ कानून व्यवस्था के संबंध में समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। संभागीय आयुक्त ने समीक्षा के दौरान कहा है कि ग्वालियर-चंबल संभाग में भी कोविड-19 के प्रकरण निरंतर बढ़ रहे हैं। इसलिए जन जागरूकता के साथ-साथ सभी आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित की जाएँ। उन्होंने यह भी निर्देशित किया है कि कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम के लिये चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान के तहत भी यह विशेष तौर पर ध्यान रखा जाए कि जितनी वैक्सीन उपलब्ध है उसी के आधार पर प्रत्येक जिला अपना प्लान तैयार कर टीकाकरण की व्यवस्थायें सुनिश्चित करे।

किसान संगठनों का भारत बंद:किसान आंदोलन के 4 महीने पूरे; कृषि कानूनों के विरोध में सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक सड़कें और ट्रेनें रोकी जाएंगी

किसान आंदोलन के 4 महीने पूरे होने पर संयुक्त किसान मोर्चा ने शुक्रवार को भारत बंद बुलाया है। मोर्चा के मुताबिक, देश के तमाम किसान संगठनों, मजदूर संगठनों, छात्र संगठनों, बार संघ, सियासी दलों और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने उनके बंद का समर्थन किया है। बंद सुबह 6 से शाम 6 बजे तक होगा।

किसान मोर्चा का कहना है कि इस बार बंद का दायरा ज्यादा बड़ा होगा। दुकानें, मॉल, बाजार बंद रखने के साथ ही तमाम छोटी-बड़ी सड़कें और ट्रेनें रोकी जाएंगी। इस दौरान एम्बुलेंस और जरूरी सेवाएं जारी रहेंगी।

राजधानी में भी प्रभावी होगी नाकेबंदी
किसानों ने तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने, MSP पर फसल खरीद के लिए कानून बनाने, किसानों के खिलाफ दर्ज सभी मामले खत्म करने, इलेक्ट्रिसिटी और पॉल्यूशन बिल वापस लेने और डीजल, पेट्रोल और गैस की कीमतें कम करने की मांग कर यह बंद बुलाया है।

संयुक्त मोर्चा का कहना है कि दिल्ली के पास किसान जिन सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं, वे पहले से ही बंद हैं। जो वैकल्पिक मार्ग बनाए गए हैं, उन्हें भी बंद किया जाएगा। संगठन ने किसानों से अपील की है कि वे शांति से विरोध को सफल बनाएं। किसान मोर्चा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रदर्शनकारी किसी भी तरह की बहस और विवाद में शामिल न हों।

कैट ने किया किनारा
कन्फेडरशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा है कि व्यापारियों ने कुछ किसान संगठनों के भारत बंद के बारे में पूछा है। हमें पता चला है कि कैट का नाम बंद में शामिल किया गया है। यह कि गलत है और इससे भ्रम पैदा किया जा रहा है।देश के 40 हजार व्यापार संगठनों की ओर से कैट यह साफ करता है कि दिल्ली और देश भर में सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले रहेंगे। भारत बंद का समर्थन करने के लिए न तो किसी किसान संगठन ने हमसे बात की है और न ही हम खुद बंद का समर्थन करते हैं। हमारा मानना है कि किसानों और सरकार के बीच गतिरोध को बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए।

दिल्ली ट्रेडर्स ऑर्गेनाइजेशन ने कहा- किसानों का समर्थन, लेकिन दुकानें खुली रखेंगे
​​​​​​​दिल्ली के कारोबारियों के संगठन चैबंर्स ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने गुरुवार को कहा कि भारत बंद के दौरान दुकानें और फैक्ट्रियां खुली रखी जाएंगी।संगठन के कन्वीनर बृजेश गोयल और अध्यक्ष सुभाष खंडेलवाल ने कहा कि हमने व्यापारियों के साथ इस मसले पर चर्चा की। उनमें से ज्यादातर ने कहा कि वे किसानों की मांगों का समर्थन करते हैं। केंद्र को इस मुद्दे का हल ढूंढना चाहिए। हालांकि, व्यापारी शुक्रवार को अपने प्रतिष्ठान खुले रखना चाहते हैं, क्योंकि वे कोरोनो के कारण पहले से नुकसान उठा रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। अगर हालात बदतर होते हैं तो प्रशासन फिर से बाजार बंद कर सकता है। ऐसा करना उनके कारोबार के लिए सही नहीं होगा।

मुंबई के अस्पताल में लगी आग, अब तक 10 लोगों की मौत

मुंबई के सनराइज अस्पताल में देर रात आग लगने से मरनेवालों की संख्या बढ़कर 10 पहुंच गई है। घटना के वक्त अस्पताल में 76 पेशेंट्स एडमिट थे। इनमें से 73 कोरोना पेशेंट्स और 3 सामान्य रोगी हैं। बचाव के दौरान सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था।

सनराइज अस्पताल भांडुप में स्थित ड्रीम्ज मॉल में तीसरी मंजिल पर स्थित है, जहां गुरुवार रात 12.30 बजे के आसपास आग लग गई। घटना की जानकारी मिलते ही फायर ब्रिग्रेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंची और कुछ घंटों में आग पर काबू पा लिया। अभी आग लगने की वजह का पता नहीं चल पाया है। मौके पर पहुंची मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने मॉल में अस्पताल चलने पर आश्चर्य व्यक्त किया और इस मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। मौके पर तमाम बड़े पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे।