कोरोना का कहर: कलेक्टर ने ग्वालियर व्यापार मेला को लेकर दिया यह बड़ा फैसला

ग्वालियर | ग्वालियर में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र आज ग्वालियर प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है । इसके चलते ग्वालियर व्यापार मेला को समाप्त करने की घोषणा की गई है ।
ग्वालियर में इस समय व्यापार मेला चल रहा है । इस वर्ष मेला न लगाने को लेकर ज्यादातर लोग सहमत थे । ग्वालियर के सांसद विवेक शेजवलकर और भाजपा के जिला अध्यक्ष कमल माखीजानी ने सार्वजनिक रूप से मेला न लगाने की अपील की थी क्योंकि इसमें लाखो की संख्या में सैलानी आते है और इससे कोरोना की दूसरी लहर आने की आशंका है । इसके बावजूद भाजपा से जुड़े कुछ नेता और कुछ व्यापारी नेताओं के प्रयासों और दबाव में बिलंब से मेला शुरू कर दिया गया ।
इसके दुष्परिणाम आना शुरू हो गए । ग्वालियर में कोरोना की दूसरी लहर बहुत ही तेज़ी से फैलना शुरू हो गया है । बीते एक पखबाड़े मे ही लगभग तीन सौ नए मरीज मिल चुके है और यह रफ्तार हर रोज बढ़ रही है ।
इसके चलते बीते दिनों सीएम ने ऑनलाइन मीटिंग में मेला समेटने की बात भी कही थी और आज कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने मेला बन्द करने की घोषणा कर दी . उन्होंने व्यापारियों से 28 मार्च को मेला बन्द करने की अपील की है।

सांसद शेजवलकर ने लाेकसभा में उठाया ग्वालियर एयरपोर्ट पर पर्याप्त स्टाफ न होने का मुद्दा

सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने शून्यकाल के दाैरान लाेकसभा के पटल पर ग्वालियर विमानतल पर पर्याप्त कर्मचारी एवं सुरक्षाकर्मी के अभाव में हवाी सेवाआें का संचालन सुचारू रूप से न हाेने का मुद्दा उठाया। उन्हाेंने कहा कि इस संबंध में कई बार अनुराेध किए जाने के बाद भी अब तक काेई कार्रवाई नहीं की गई है।

सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने कहा कि पर्याप्त कर्मचारी एवं सुरक्षाकर्मियाें के अभाव में महत्वपूर्ण हवाई सेवाएं संचालित नहीं हाे पा रही हैं। स्टाफ की कमी के चलते ग्वालियर से अहमदाबाद हवाई सेवा बंद हाेने वाली है आैर ग्वालियर से मुंबई हवाई सेवा भी प्रारंभ नहीं हाे पा रही है। उन्हाेंने विमानतल पर पर्याप्त कर्मचारी एवं सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराने का अनुराेध करते हुए कहा कि इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियाें काे अवगत कराया गया, लेकिन अब तक काेई कार्रवाई नहीं की गई है। उधर विमानतल पर हालत यह है कि ड्यूटी पर तैनात किए गए कर्मचारियाें काे दाे-दाे शिफ्टाें में काम करना पड़ रहा है। सांसद ने केंद्रीय उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी से आग्रह किया है कि विमानतल पर पर्याप्त स्टाफ पदस्थ किया जाए, जिससे जाे हवाई सेवाएं वर्तमान में संचालित हाे रही हैं, उन्हें यथावत रखा जा सके आैर ग्वालियर के नागरिकाें काे देश के अन्य प्रमुख शहराें के लिए हवाई यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

सांसद ने लिखा था पत्रः सांसद विवेक शेजवलकर ने विमानतल पर स्टाफ बढ़ाने काे लेकर पिछले दिनाेंं केंद्रीय उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी एवं पूर्व में क्षेत्रीय कार्यपालक निदेशक उत्तरी क्षेत्र भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण काे भी पत्र लिखा था।

आपने भी लिया है लोन तो ध्यान दें, मोरेटोरियम पर आज सुप्रीम कोर्ट लेने वाला है फैसला

लोन मोरेटोरियम मामले में आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है. जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने 17 दिसंबर को इस मामले की सुनवाई के दौरान अपना फैसला सुरक्षित रखा था. कोरोना वायरस महामारी के मद्देनज़र लोन लेने वाले लोगों को राहत देते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक ने पिछले साल मोरेटोरियम का ऐलान किया था. इसके तहत 1 मार्च 2020 से 31 मई 2020 के बीच लोगों को टर्म लोन की EMI देने से छूट मिली थी. बाद में इस अवधि को 31 अगस्त 2020 तक के लिए बढ़ा दी गई थी.

केंद्र सरकार ने 8 खास श्रेणियों के तहत 2 करोड़ रुपये तक के लोन पर ब्याज माफ करने का फैसला लिया था. इन 8 कैटेगरी में MSME, एजुकेशन, हाउसिंग, कंज्यूमर ड्यूरेबल, क्रेडिट कार्ड, ऑटोमोबाइल, पर्सनल और खपत को शामिल किया गया था. पिछले lसाल 27 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वो इस फैसले को लागू करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए.

लोन रिस्ट्रक्चरिंग की सुविधा का ऐलान

केंद्रीय बैंक ने एक बार लोन रिस्ट्रक्चरिंग की सुविधा देने का भी ऐलान किया है. इसमें यह भी कहा गया कि कंपनियों द्वारा और व्यक्तिगत स्तर पर लिए गए लोन अगर इस अवधि डिफॉल्ट करते हैं तो उन्हें नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) नहीं घोषित किया जाएगा. केवल उन्हीं लोन अकाउंट को रिस्ट्रक्चरिंग का मौका मिलेगा, जिन कंपनियां या व्यक्तियों का लोन 1 मार्च 2020 तक कम से कम 30​ दिनों के लिए डिफॉल्ट हुआ है. कंपनियों द्वारा लिए गए लोन पर बैंकों के पास रिजॉलुशन के लिए 31 दिसंबर 2020 की डेडलाइन तय की गई ​थी. बैंकों को इसे 30 जून 2021 तक लागू करना है.

व्यक्तिगत लोन के लिए क्या थी रिस्ट्रक्चरिंग की शर्त

व्यक्तिगत लोन के लिए बैंकों के पास 31 दिसंबर 2020 तक रिजॉलुशन शुरू करने का मौका था. रिजॉलुशन करने के 30 दिनों के अंदर इसे लागू भी करने की समयसीमा तय की गई थी. जो लोन अकाउंट स्टैंडर्ड हैं और 1 मार्च 2020 तक 30 दिनों से ज्यादा के लिए डिफॉल्ट नहीं किया है, वो भी रिस्ट्रक्चरिंग के ​लिए योग्य होंगे.

अब नीतियों में ढील देने के मूड में नहीं है आरबीआई

मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, माना जा रहा है कि रिज़र्व बैंक वर्किंग कैपिटल वाले उधारकर्ताओं को ब्याज से राहत देने के लिए बैंकों के अनुरोध को खारिज कर सकता है. आरबीआई अब महामारी के दौरान नीतियों को लेकर लिए गए फैसले को कम करने की दिशा में बढ़ रहा है. इस मामले की जानकारी रखने के तीन लोगों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और आगे का रास्ता देखते हुए आरबीआई ऐसे कदम उठा रहा है.

डिविडेंड न देने के फैसले से मजबूत हुई NBFC की स्थिति

आरबीआई ने हाल ही में अपने एक बैंकिंग रिपोर्ट में कहा है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी (NBFC) पर लोन हानि और कम क्रेडिट डिमांड की वजह से बुरा असर पड़ सकता है. चूंकि, अब लोन मोरेटोरियम और एसेट क्लासिफिकेशन में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इन एनबीएफसी के एसेट क्वॉलिटी में सुधार हुआ है. हालांकि, कई एनबीएफसी ने क्रेडिट नुकसान के अनुमान के तहत अतिरिक्त व्यवस्था की हैं. आरबीआई ने 2019-20 के लिए बैंकिंग सेक्टर को लेकर एक रिपोर्ट में कहा है कि डिविडेंड ने देने के फैसले से इनका पूंजीगत स्थिति भी बेहतर हुई है.

कम NBFC ग्राहकों ने लिया मोरेटोरियम का लाभ

कुल मिलाकर इस रिपोर्ट में कहा गया है कि NBFC में लोन मोरेटोरियम की सुविधा लेने वाले ग्राहकों की संख्या कम है. दूसरी ओर कॉमर्शियल बैंकों में मोरेटोरियम के तहत कुल बकाया लोन की रकम बहुत ज्यादा है. इससे साफ पता चला है कि इन बैंकों पर एसेट को लेकर कितना दबाव है. इसमें कहा गया कि 31 अगस्त 2020 तक एनबीएफसी में कुल ग्राहकों में से केवल 26.6 फीसदी ने लोन मोरेटोरियम का लाभ लिया. इनके द्वारा दिए गए कुल लोन का करीब 44.9 फीसदी लोन की रकम ही मोरेटोरियम के दायरे में रही.

आरबीआई की इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया, ‘एनबीएफसी के लिए लोन में स्थि​रता की वजह से उनके कुल समेकित बैलेंस शीट में गिरावट देखने को मिली है. हालांकि, मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति खराब होने और कमजोर मांग ने इनका जोखिम भी बढ़ाया है.’

मुख्तार, अफजाल की बिल्डिंग का नक्शा पास करने में IAS रामविलास भी दोषी, LDA ने कार्रवाई के लिए भेजी रिपोर्ट

सरकारी जमीन पर बाहुबली मुख्तार अंसारी तथा अफजाल अंसारी का नक्शा पास करने के मामले में उत्तराखंड में तैनात आईएएस रामविलास यादव को भी दोषी बताया गया है। रामविलास यादव एलडीए में 2007 में सचिव के पद पर तैनात थे। इनके साथ कई और अधिकारियों व इंजीनियरों को दोषी बताया गया है। सोमवार को शासन व एलडीए में दिन भर इस मामले को लेकर काफी हलचल रही। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने दोपहर में दोषी इंजीनियरों व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट फिर से शासन को भेज दी है।

एलडीए में भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाए गए 50 इंजीनियरों व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई न होने की खबर हिंदुस्तान ने सोमवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की। इस खबर को शासन ने काफी गंभीरता से लिया है। प्रमुख सचिव आवास ने दोपहर में अधिकारियों को तत्काल दोषी अधिकारियों की रिपोर्ट भेजने को कहा। हालांकि एलडीए पहले ही इस मामले में शासन को रिपोर्ट भेज चुका है। कार्रवाई शासन के स्तर पर ही रुकी हुई है। शासन के निर्देश के बाद सोमवार को दोबारा रिपोर्ट भेजी गई। कहा जा रहा कि जल्दी ही इस मामले में कई अधिकारियों व इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई होगी। अफजाल मुख्तार अंसारी के मकान का नक्शा सरकारी जमीन पर पास करने के मामले में भी रिपोर्ट मांगी गई। इसमें एलडीए के तत्कालीन सचिव रामविलास यादव को भी दोषी ठहराया गया है।

रामविलास यादव मौजूदा समय में उत्तराखंड में तैनात है। एलडीए उपाध्यक्ष अभिषेक प्रकाश ने 19 फरवरी को भी उनके खिलाफ कार्यवाही के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी थी। उपाध्यक्ष ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि 1 फरवरी 2007 को रामविलास यादव ने अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी के भवन मानचित्र की स्वीकृति दी। जिसके लिए वह उत्तरदायी हैं। उपाध्यक्ष ने लिखा है कि उन्होंने शमन मानचित्र स्वीकृति से पहले निष्क्रांति संपत्ति होने की अनापत्ति नहीं ली।
 
अफजाल की पत्नी फरहत अंसारी के मामले में चीफ इंजीनियर दोषी
अफजाल की पत्नी फरहत अंसारी के मकान का नक्शा पास करने के मामले में एलडीए के तत्कालीन अधिशासी अभियंता, प्रवर्तन सेल के प्रभारी व वर्तमान में नगर विकास विकास में मुख्य अभियंता मनीष कुमार सिंह, अवर अभियंता एस भावल, जीएस वर्मा तथा सहायक अभियंता अनूप शर्मा भी दोषी मिले हैं। इनके खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की गई है। 
 
मुख्तार अंसारी का नक्शा भी बिना एनओसी के हुआ पास
मुख्तार अंसारी की बिल्डिंग जिस जमीन पर बनी थी वह राबिया बेगम के नाम थी। इस का नक्शा भी पास किया गया था लेकिन मानचित्र शुल्क नहीं जमा किया। एनओसी भी नहीं जमा की। जिसके चलते इनका मानचित्र 16 जुलाई 2020 को निरस्त कर दिया गया था। 27 अगस्त को इसे ध्वस्त कर दिया गया। इस मामले में तत्कालीन अधिशासी अभियंता राहुल श्रीवास्तव, आर के शर्मा,  आरके अवस्थी को जिम्मेदार बताया गया है। तत्कालीन अपर सचिव भी मामले में जिम्मेदार हैं। 
 
चारबाग होटल अग्निकांड में यह दोषी
चारबाग होटल अग्निकांड में तत्कालीन अधिशासी अभियंता डीसी यादव, अधिशासी अभियंता मामचंद, अधिशासी अभियंता प्रदीप कुमार, सहायक अभियंता राजेंद्र कुमार, सहायक अभियंता अजीत कुमार, अवर अभियंता जनार्दन सिंह, अवर अभियंता गजराज सिंह, अवर अभियंता पीके वर्मा, अवर अभियंता अब्दुल रउफ, अवर अभियंता शिव शंकर सिंह, अवर अभियंता अनिल कुमार द्वितीय, लाल जी शुक्ला, धनीराम, पीएन पांडेय, सतीश चंद्र तथा अवर अभियंता मोहन चंद्र सती दोषी पाए गए। इनमें से कुछ इंजीनियर रिटायर हो चुके हैं तो एक-दो का निधन भी हो चुका है।

ग्वालियर में हुई तेरह मौतों पर क्या बोले मप्र के परिवहन मंत्री ?

ग्वालियर में आज सुबह हुई एक हृदय विदारक सड़क दुर्घटना में ऑटो चालक सहित हुई तेरह लोगो की मौत पर प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद राजपूत ने गहरा दुख जताते  हुए घटना की जांच के आदेश दिए है ।
उन्होंने कहा कि ग्वालियर में जो हादसा हुआ है वह बहुत दुःखद है । सरकार मृतकों के परिजनों के साथ खड़ी है ।
श्री राजपूत ने बताया कि प्रथमदृष्टया पता चला है कि यह घटना एक दूध वाले को बचाने के कारण हुई लेकिन तभी सामने से एक भैंस आ गई । बस बाल ने इसे बचाने का प्रयास किया तो सामने ऑटो से टकरा गई जिससे ये भयबह घटना हुई जिसमें 13 लोगो की जान चली गई ।
सरकार ने हर मृतक के परिवार को चार चार लाख की सहायता देने की घोषणा कर दी । मामले की व्यापक जांच की जाएगी और प्रदेश में इस तरह की घटनाएं न घटें इस पर विचार किया जाएगा ।

विधानसभा उपचुनाव से पहले दमोह पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मनु मिश्रा बने कांग्रेस के जिला अध्यक्ष

दमोह। विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस ने ब्राह्मण कार्ड खेलते हुए दमोह नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष मनु मिश्रा को कांग्रेस का जिलाध्यक्ष बनाया है। दरअसल विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने जिलाध्यक्ष अजय टंडन को अपना प्रत्याशी बनाया है। उनके साथ पूर्व पालिका अध्यक्ष मनु मिश्रा भी दावेदारों की श्रेणी में थे, लेकिन बाद में इस बात की संभावना जताई जाने लगी कि श्री मिश्रा को नपा अध्यक्ष पद की टिकिट देने के साथ ही कांग्रेस का जिला अध्यक्ष बनाने का आश्वासन दिया है। सुबह जिन चार जिला अध्यक्षों की सूची जारी की गई उसमे मनु मिश्रा को शामिल किया गया।

कांग्रेस ने ब्राह्मण वोटों को साधने के लिए भी मनु मिश्रा को अध्यक्ष बनाया है। भाजपा की ओर से कांग्रेस से भाजपा में आये दमोह के पूर्व विधायक राहुल सिंह को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है जबकि पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया अपनी दावेदारी कर रहे थे लेकिन उनका टिकिट कट गया और अब उनके बेटे सिद्धार्थ मलैया निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन अभी तक उन्होंने अपने पत्ते नही खोले ओर इसी बीच कांग्रेस ने अपना नया जिला अध्यक्ष घोषित कर दिया।

मनु मिश्रा 2009 से 2014 तक दमोह नगर पालिका अध्यक्ष रहे उन्होंने सचिन गुरु की हराया था। श्री मिश्रा पुराने कांग्रेस नेता है और ब्राह्मणों के बीच मे काफी लोकप्रिय हैं। अब उनके कांग्रेस जिला अध्यक्ष बनने से कांग्रेस को कोई न कोई फायदा होगा और ब्राह्मण वोट भी कांग्रेस के पास आने की संभावना है। हालांकि अभी तो केवल कयास ही लगाए जा रहे हैं।

खुलासा:9 साल के बच्चे का अपहरण, फिरौती में मांगे 5 लाख रुपए, कॉल ट्रैस कर पुलिस ने बच्चे को मुक्त कराया, पकड़े तीन अपहरणकर्ता

ग्वालियर।

एक 9 साल के छात्र का सोमवार दोपहर अपहरण हो गया था। सनसनी उस समय फैल गई जब शाम को छात्र के पिता पर 5 लाख रुपए की फिरौती का कॉल पहुंचा। अपहरण और फिरौती के कॉल का पता चलते ही पुलिस हरकत में आई।

घटना जनकगंज के हारकोटा सीर की है। तत्काल जनकगंज थाना पुलिस, क्राइम ब्रांच को पड़ताल में लगाया। जिस नंबर से फिरौती के लिए कॉल किया था। उसे ट्रैस करते हुए पुलिस रात 11 बजे बच्चे तक पहुंच गई। बच्चे को मुक्त कराने के बाद तीन अपहरणकर्ता भी पकड़े हैं। इनमें से एक SAF से रिटायर्ड जवान बताया गया है। फिलहाल पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है। पुलिस थोड़ी भी देर कर देती तो बच्चे की जान पर भी बन आती। जनकगंज थानाक्षेत्र स्थित हारकोटा सीर निवासी जीतू उर्फ जितेन्द्र सिंह कुशवाह डेकोरेशन का काम करते हैं। उनके दो बच्चे एक बेटा व बेटी है। उनका 9 वर्षीय बेटा क्रिश सोमवार दोपहर 3 बजे कोल्डड्रिंक लेने के लिए निकला था। इसके बाद वह घर ही नहीं लौटा। जब काफी देर हो गई तो परिजन ने उसकी तलाश शुरू की। शाम को जब 7 बजे जब परिजन जनकगंज थाना शिकायत करने जा रहे थे तभी छात्र के पिता पर कॉल आया। कॉल करने वाले ने सीधे कहा कि अपने इकलौते बेटे को जिंदा देखना चाहता है तो 5 लाख रुपए इंतजाम कर ले, नहीं को उसे हमेशा के लिए भूल जा। इस कॉल के बाद जितेन्द्र घबरा गया। उसने सीधे जनकगंज थाना पहुंचकर मामले की सूचना दी। बच्चे के अपहरण और फिरौती के लिए कॉल आने का पता चलते ही पुलिस हरकत में आ गई। खुद SP अमित सांघी ने पूरे मामले को संभाला है। इस मामले में तत्काल फिरौती के लिए आए पहले कॉल को सुराग मानकर तलाश शुरू की गई। साथ ही बच्चा जिस रूट पर सामान लेने गया था वहां CCTV कैमरों की तलाश की गई। फिरौती के लिए आने वाले कॉल और CCTV फुटेज से पुलिस का सुराग पर सुराग मिलते गए। नंबर की लास्ट लोकेशन गुढ़ा गुढ़ी का नाका पर एकता कॉलोनी के पास आ रही थी। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर मोहन कुशवाह उर्फ मोनू को वहां से उठाया और कुछ ही देर में बच्चा बरामद कर लिया। इसके बाद पूछताछ की गई तो दो नाम और पता लगे 60 वर्षीय किशन पाल और दामोदर कुशवाह। इसमें किशनपाल को SAF से रिटायर्ड जवान बताया गया है। पुलिस ने तीनों अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार कर बच्चे को मुक्त करा लिया है। आरोपियों ने जुर्म कुबूल कर लिया है।

तू महाराष्ट्र में कैसे घूमती है, देखता हूं- शिवसेना सदस्य ने लोकसभा में कहा, महिला सांसद ने ओम बिरला से की शिकायत

महाराष्ट्र के अमरावती से निर्दलीय सांसद नवनीत रवि राणा ने सांसद अरविंद सावंत पर आरोप लगाया कि शिवसेना सांसद ने उन्हें लोकसभा की लॉबी में कहा, ‘तू महाराष्ट्र में कैसे घूमती है, मैं देखता हूं।’ सांसद ने कहा कि शिवसेना सांसद ने मुझे धमकी दी कि तुम्हें जेल के पीछे भेजना पड़ेगा। नवनीत राणा ने कहा कि उन्हें इससे पहले भी शिवसेना द्वारा धमकी मिल चुकी है। इस बारे में नवनीत राणा ने लोकसभा स्पीकर से शिकायत की है और अरविंद सांवत पर कार्रवाई करने की मांग की है।

मामले में जवाब देते हुए शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि सांसद नवनीत राणा द्वारा लगाए गए आरोप सरासर झूठ हैं। सांसद ने कहा, ‘अगर किसी ने देखा हो कि मैंने नवनीत राणा को धमकाया हो तो बता सकते हैं।’ सांसद ने कहा कि सांसद नवनीत राणा की बॉडी लैंग्वेज ठीक नहीं रहती है और वह मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के प्रति सही शब्दों का इस्तेमाल नहीं करती हैं।’ गौरतलब है कि महाराष्ट्र के अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने संसद में सचिन वाजे मामले में जांच की मांग की। राणा ने कहा कि आखिर किस आधार पर सचिन वाजे को फिर से पुलिस सेवा में बहाल किया गया? देवेंद्र फडणवीस से उद्धव ठाकरे ने कहा था कि सचिन वाजे को पुलिस सेवा में बहाल किया जाए लेकिन उस समय पर फडणवीस सरकार ने इंकार कर दिया था।

बता दे कि आज संसद में बीजेपी सांसदों ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग भी की।

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर पर पुलिस वालों को वसूली करने के लिए कहने के आरोप लगाए हैं।

मालूम हो कि इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का तबादला कर दिया था। अपने पत्र में परमबीर सिंह ने लिखा कि उन्हें मामले में बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

बता दें कि मनसुख हीरेन की मौत के मामले में जांच चल रही है। जिसके तहत सचिन वाजे को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि सचिन राजे ने मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के सामने गाड़ी लगाई थी जिसमें की जिलेटिन की छड़ें मिली थीं।

देशमुख मामले में कांग्रेस विधायक ने अपनी ही पार्टी पर उठाए सवाल, कहा- महाराष्ट्र में समर्थन वापस ले कांग्रेस

भोपाल, जेएनएन। महाराष्ट्र में पुलिस अधिकारियों के माध्यम से गृहमंत्री द्वारा पये लिए जाने को लेकर मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने अपनी पार्टी को कठघरे में खड़ा किया है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह ने ट्वीट किया है कि अगर 100 करोड़ रपये प्रतिमाह मुंबई पुलिस के माध्यम से महाराष्ट्र के गृहमंत्री वसूल रहे हैं और यह सत्य है तो देशमुख ‘देश’ के ‘मुख’ नहीं हो सकते। लगता है अगाड़ी सरकार पिछड़ती जा रही है। कांग्रेस को समर्थन वापस लेना चाहिए।

मालूम हो, लक्ष्मण सिंह इससे पहले भी पार्टी गाइडलाइन के खिलाफ जाकर बयान देते रहे हैं। प्रदेश में कमल नाथ सरकार के दौरान एक बार वे दिग्विजय सिंह के बंगले का घेराव कर चुके हैं। सितंबर 2019 में किसानों की कर्जमाफी को लेकर उन्होंने राहुल गांधी को घेरा था। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी को किसानों का कर्ज दस दिन में माफ करने का वादा नहीं करना चाहिए था। कमल नाथ सरकार अपना वादा पूरा नहीं कर पाई, इसलिए हाथ जोड़कर गलती मान लेनी चाहिए। इसके अलावा श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए दिग्विजय सिंह द्वारा चंदा दिए जाने पर टिप्पणी की थी कि राम जी के नाम पर बड़े साहब ने भी चंदा दिया है। बड़े साहब तो सबको एडजस्ट करके चलने वाले हैं, लेकिन आपको और हमको एडजस्ट करने की जरूरत नहीं है।

मुंबई के पूर्व पुलिस कम्निश्नर परमबीर सिंह द्वारा चिट्ठी लिखकर गृहमंत्री पर लगाए गए 100 करोड़ की वसूली जैसे गम्भीर आरोपों के बाद उद्धव सरकार भारी दबाव में हैं। ऐसे में उद्धव, गृहमंत्री अनिल देशमुख से इस्तीफा लेने के मूड में हैं लेकिन अनिल देशमुख के साथ पूरी एनसीपी खड़ी है। अब इस मुद्दे पर मचे बवाल के बीच एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के भाई और चाचौड़ा विधानसभा से विधायक लक्ष्मण सिंह ने भी अपनी बात रखी है।

विधायक लक्ष्मण सिंह ने अपने ट्वीट में राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को टैग करते हुए लिखा है कि अगर 100 करोड़ रुपए प्रति महीना मुंबई पुलिस से महाराष्ट्र के गृहमंत्री वसूल रहे हैं और अगर यह बात सत्य है तो देशमुख, देश के मुख नहीं हो सकते। अगाड़ी सरकार पर पिछड़ती जा रही है कांग्रेस को समर्थन वापस लेना चाहिए।